जिद… सच की- दागी नेताओं पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मायने

सवाल यह है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के क्या मायने हैं? क्या कोर्ट के इंकार के बाद संसद दागी नेताओं को चुनाव लडऩे से रोकने के लिए कोई कानून बनाएगी? क्या राजनीति में बढ़ते अपराधीकरण को रोकने के लिए सियासी दल कोई पहल करेंगे या यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

Sanjay Sharma

सुप्रीम कोर्ट ने दागी नेताओं और गंभीर आपराधिक मामलों के आरोपियों के चुनाव लडऩे पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। संविधान का हवाला देते हुए शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि वह विधायिका के दायरे में जाकर दागी नेताओं को चुनाव लडऩे से अयोग्य करार नहीं दे सकती और इस मामले पर संसद को कानून बनाना चाहिए। हालांकि कोर्ट ने राजनीति में बढ़ते अपराधीकरण और भ्रष्टाचार को लोकतंत्र के लिए घातक बताया। अहम सवाल यह है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के क्या मायने हैं? क्या कोर्ट के इंकार के बाद संसद दागी नेताओं को चुनाव लडऩे से रोकने के लिए कोई कानून बनाएगी? क्या राजनीति में बढ़ते अपराधीकरण को रोकने के लिए सियासी दल कोई पहल करेंगे या यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला जाएगा? क्या राजनीति में अपराधीकरण और भ्रष्टïाचार को रोका जा सकेगा?
देश में राजनीति का अपराधीकरण पूरी तरह अपनी जड़ें जमा चुका है। वर्तमान के कई दर्जन सांसद और विधायकों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से कई तो जेल से सियासत कर रहे हैं। एक आंकड़ें के मुताबिक वर्तमान में 1518 नेताओं पर आपराधिक केस दर्ज हैं। इसमें 50 से ज्यादा सांसद हैं। वहीं 35 नेताओं पर बलात्कार, हत्या और अपहरण जैसे गंभीर आरोप हैं। हैरत की बात यह है कि अधिकांश सियासी दल स्वच्छ छवि वाले उम्मीदवार को टिकट देने का वायदा करते हैं लेकिन जैसे ही चुनाव आता है बाहुबलियों की खोज शुरू कर देते हैं। सियासी पार्टियां यह सब इसलिए करती हैं ताकि वे संख्या बल के जरिए सत्ता के शीर्ष तक पहुंच सकें। धन व बाहु बल से चुनाव जीतना अधिकांश दलों का जरिया बन चुका है। यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट को भी राजनीति में बढ़ते अपराधीकरण को लेकर नसीहत देनी पड़ रही है। ऐसी स्थिति में सियासी दल संसद में कानून बनाकर दागी नेताओं को चुनाव लडऩे से रोकने का फैसला लेंगे, इसकी संभावना दूर तक नहीं दिखाई पड़ रही है। यदि ऐसा किया गया तो अधिकांश दलों की ताकत कम हो जाएगी और वे सत्ता पर काबिज होने की अपनी महत्वाकांक्षा शायद पूरी नहीं कर पाएंगे। बावजूद इसके सियासी दलों को यह याद रखना चाहिए कि राजनीति का अपराधीकरण लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। लिहाजा सभी दलों को इस मामले पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और एक राय होकर इस समस्या को समाप्त करने की पहल करनी चाहिए। यदि एक बार इस समस्या का समाधान कर दिया गया तो निश्चित रूप से देश में लोकतंत्र का भविष्य काफी उज्जवल होगा। राजनीति में अपराधीकरण समाप्त होने से भ्रष्टïाचार पर भी बहुत हद तक लगाम लग जाएगी।

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