भड़ास के दस साल पूरे होने पर शानदार आयोजन पत्रकारों ने मीडिया की भूमिका पर की चर्चा

  • पांच सितारा होटल रेडिसन ब्लू में हुआ समारोह देशभर से आए पत्रकारों ने की शिरकत
  • भड़ास 4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह का जताया आभार

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। भड़ास फोर मीडिया के दस साल पूरे होने पर पांच सितारा होटल रेडिसन ब्लू में एक शानदारा समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर पत्रकारों ने मीडिया की भूमिका पर चर्चा की। आयोजन में पूरे देश से बुद्धजीवी और पत्रकार शिरकत करने पहुंचे।
समारोह की शुरुआत करते हुए भड़ास के संपादक यशवंत सिंह ने कहा कि भड़ास का आयोजन चाहे जहां हो, इसके चाहने वाले दूर-दूर से चलकर न सिर्फ वहां पहुंचते हैं बल्कि अपने ओरिजनल तेवर के कारण उस जगह को अपने जैसा बना लेते हैं। जो लोग आयोजन में आ सके, उनका दिल से आभार और जो लोग न आ सके, उनका दूर से आभार। अमरेंद्र राय ने कहा कि भड़ास दस साल से पत्रकारों के दुख-सुख, आवा-जाही, संघर्ष-विमर्श में लगातार अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मैं तो उसे देखकर ही पूरे पत्रकार जगत का हाल जान लेता हूं। यह भी कि आजकल कौन नौकरी देने की स्थिति में हैं और कौन सडक़ पर संघर्ष करने के लिए आ गया। भड़ास परिचय का मोहताज नहीं, वैसे ही इसके संपादक यशवंत को भी किसी परिचय की जरूरत नहीं। मस्तमौला, फक्कड़ और बिंदास। उनके भड़ासी रूप को बहुत लोग जानते हैं पर उनके लेखन को उतना महत्व नहीं मिला, जितना मिलना चाहिए। भाषा के धनी हैं, बेबाक लिखने वाले भी हैं। इस कार्यक्रम को देखकर ऐसा लगा कि यशवंत अपने आप में एक संगठन हैं। जम्मू, हरियाणा, हिमाचल, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि सभी जगहों के भड़ासी पत्रकारों ने हिस्सा लिया। पूजन प्रियदर्शी ने कहा कि भड़ास की दसवीं वर्षगांठ के कार्यक्रम की रूपरेखा बनाते समय जिस मकसद को चिन्हित किया गया होगा, उसे वाकई हासिल कर लिया गया है। राजाराम त्रिपाठी ने मौजूदा तंत्र को बेनकाब किया तो अशोक दास ने मीडिया को। दोनों ही व्यक्ति हैमिंग्वे की उस सोच पर खरे हैं कि मनुष्य को हराया जा सकता है, पर नष्ट नहीं किया जा सकता। तमाम वक्ताओं ने मुद्दे की बात की और भटके नहीं। ओम थानवी की चिंता मौजूदा दौर के अघोषित आपातकाल व इशारा सत्ता की खरीदार होने की प्रवृत्ति की ओर थी, कि कैसे जनता के पैसे से वे मीडिया पर अंकुश लगाते हैं। उन्होंने भविष्य का आईना भी दिखाया। गुरदीप सिंह सप्पल और क्षमा शर्मा ने भी बहुत मार्के की बातें कहीं। कमर वहीद नकवी ने हमारे जमीर को जगाने की कोशिश की।
अशोक अनुराग ने कहा कि भड़ास वह प्लेटफॉर्म है जहां हम सब ने सुख से कहीं ज्यादा अपना दु:ख, अपनी परेशानी को यहां साझा किया। मीडिया जगत में खबर बनाते बनाते कब हम सब खबर बन जाते हैं पता ही नहीं चलता और जब पता चलता है तो देर हो चुकी होती है। आज के वर्तमान हालत में स्वावलंबी बन कर सम्मान के साथ कैसे जिया जाए ये मन्त्र भी यशवंत जी हम सब की कान में फूंकते रहे हैं, आपने भड़ास 4 मीडिया में अक्सर इन्हें बाबा के नाम से भी सम्बोधित करते देखा और पढ़ा भी होगा।

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