कांग्रेस को झटका देने की वजहें

 नीरज कुमार दुबे

बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने क्या सचमुच मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भाजपा की राह आसान कर दी है। मायावती ने कांग्रेस पार्टी के साथ चली लंबी वार्ताओं के बाद ‘एकला चलो’ की राह पकड़ ली। भाजपा इन तीनों राज्यों में अभी सत्ता में है और अगर बसपा का कांग्रेस के साथ गठबंधन हो जाता तो यह सत्तारुढ़ पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन सकता था। कांग्रेस आलाकमान खुद भी इस फैसले से हतप्रभ है क्योंकि तीनों राज्यों में सीटों के लिए बातचीत अभी जारी थी और अचानक ही माया ने छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी के साथ गठबंधन करने, मध्य प्रदेश में अकेले लडऩे और राजस्थान में अपना मोर्चा बनाकर चुनाव लडऩे की घोषणा कर दी। कांग्रेस अब महागठबंधन बनाने के प्रति आशंकित नजर आ रही है।
जिन लोगों ने कर्नाटक में मुख्यमंत्री एचडी कुमार स्वामी के शपथ ग्रहण में सोनिया गांधी और मायावती की एक दूसरे के बेहद करीब वाली तसवीर देखकर भविष्य के बारे में सुनहरी भविष्यवाणी कर दी थी आज वह लोग सकते में हैं क्योंकि उन्होंने इन तसवीरों के राजनीतिक कैप्शन बेहद लुभावने दिये थे। दरअसल मायावती एक साथ दो रणनीति पर काम करती हैं। कांग्रेस के साथ ही वह अन्य दलों के संपर्क में थीं। मायावती पहले ही कह चुकी थीं कि सम्मानजनक सीटें मिलने पर ही समझौता होगा। उनके इस बयान पर मात्र समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ही प्रतिक्रिया दी थी और कहा था कि भाजपा को रोकने के लिए वह दो कदम पीछे हटने को तैयार हैं लेकिन कांग्रेस ने मायावती के बयान को शायद हल्के में ले लिया था।
हालांकि कांग्रेस चाहती है देश स्तर पर भाजपा के खिलाफ महागठबंधन बना कर चुनाव लड़ा जाये और चुनाव बाद जिस दल के सर्वाधिक सांसद हों उसके नेता को प्रधानमंत्री बनाया जाये। लेकिन कांग्रेस के बारे में कई दल ज्यादा अच्छी राय नहीं रखते। तृणमुल कांग्रेस वैसे तो विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर कांग्रेस के साथ खड़ी दिखती है लेकिन उसके गठबंधन के तले आने को तैयार नहीं है। सपा भी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के साथ गठबंधन करने पर नुकसान उठा चुकी है। बसपा ने साफ कर दिया है कि वह विधानसभा चुनावों में अकेले जा रही है। इसी प्रकार कई अन्य विपक्षी दल चुनावों बाद ही गठबंधन बनने को सही बता रहे हैं।
भाजपा ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में राहत की सांस इसलिए महसूस की है क्योंकि इन तीनों ही राज्यों में बसपा को पिछले चुनावों में 3 से 6 फीसदी तक मत मिले थे। राज्यवार आंकड़ों पर निगाह डालें तो मध्य प्रदेश में भाजपा को पिछले विधानसभा चुनावों में लगभग 45 फीसदी और कांग्रेस को 37 फीसदी मत मिले थे जबकि बसपा सवा 6 फीसदी तक मत हासिल करने में सफल रही थी। अब अगर कांग्रेस और बसपा के मत मिल जाते तो निश्चित रूप से भाजपा सत्ता से बाहर हो जाती। अब बसपा राज्य में क्षेत्रीय दल गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और शायद समाजवादी पार्टी के साथ भी गठबंधन कर सकती है। बसपा ने मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए अपना एक और कदम आगे बढ़ाते हुए अपने 22 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान भी कर दिया है जिसमें तीन निवर्तमान विधायक शामिल हैं। छत्तीसगढ़ में पिछले विधानसभा चुनावों में भाजपा और कांग्रेस के बीच बेहद कड़ी टक्कर हुई थी और कांग्रेस तथा भाजपा के बीच सिर्फ एक फीसदी मतों का ही अंतर था, जबकि बसपा 4 फीसदी तक मत हासिल करने में सफल रही थी। ऐसे में यदि कांग्रेस और बसपा का गठबंधन हो जाता तो भाजपा के लिए सत्ता में वापसी की राह बेहद मुश्किल हो जाती। अब बसपा ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की पार्टी के साथ गठबंधन किया है और उन्हें ही मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार भी घोषित कर चुनाव लडऩे का ऐलान किया है। इससे कांग्रेस को मिलने वाले वोटों में सेंध लग गई है। इस बात का सीधा फायदा भाजपा उठा सकती है।
वहीं राजस्थान में भी कुछ सीटों पर बसपा प्रभावी भूमिका में है और राजस्थान में अशोक गहलोत की सरकार के लिए तो एक बार बसपा के विधायक तारणहार भी बन चुके हैं। लेकिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट बसपा के साथ गठबंधन करने के एकदम खिलाफ हैं जबकि गहलोत चाहते हैं कि यह गठबंधन हो। अब बसपा ने यहां भी तय कर लिया है कि वामपंथी दलों के साथ मोर्चा बनाकर चुनाव लड़ा जायेगा। यदि ऐसा होता है तो फिर से एक बार भाजपा विरोधी मतों का बंटवारा होगा जिससे कांग्रेस को नुकसान हो सकता है।
बहरहाल, मायावती का प्रयास है कि विधानसभा चुनावों में एक बड़ी ताकत बनकर उभरा जाये और मत प्रतिशत बढ़ाने के साथ ही सीटों की संख्या बढ़ायी जाये। विधानसभा चुनावों बाद यदि बसपा किसी भी राज्य में निर्णायक भूमिका में आ गयी तो लोकसभा चुनावों के लिए कांग्रेस तथा अन्य दलों से राजनीतिक सौदेबाजी प्रभावी रूप से हो सकेगी। बसपा की तीन राज्यों में अच्छा प्रदर्शन करती है तो उत्तर प्रदेश में भी सीटों के बंटवारे में सर्वाधिक सीटें हासिल करने का दबाव बनाने में सफल हो सकती है।

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