बढ़ रहा राजधानी का दायरा, सिमटती जा रही पुलिस, भगवान भरोसे सुरक्षा व्यवस्था

  • बदमाशों का सॉफ्ट टारगेट बनी कॉलोनियां, आए दिन हो रहीं वारदातें
  • आज तक नहीं बढ़ी पुलिसकर्मियों की संख्या गश्त के लिए भी नहीं है पर्याप्त जवान

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हर तरह की सुविधाएं हैं। यहां छोटे स्तर से लेकर बड़े स्तर तक के अधिकारी और नेताओं का जमावड़ा लगा रहता है। यही वजह है कि यहां आने वाला हर व्यक्ति चाहता है कि लखनऊ में उसका अपना घर हो। लोग प्लाट और अपार्टमेंट खरीद रहे हैं। इन सबके बावजूद राजधानी के चारों ओर बढ़ रही कॉलोनियों और कस्बों की सुरक्षा भगवान भरोसे है। इसकी बड़ी वजह यह है कि कॉलोनियां और कस्बे के सापेक्ष पुलिस की संख्या में कोई वृद्धि नहीं की गई है। आज भी यहां पुलिसकर्मियों की वही संख्या है जो पूर्व में थी। तमाम आपराधिक घटनाओं के बावजूद इन कॉलोनियों की सुरक्षा के लिए पुलिस के पास कोई खास योजना तक नहीं है।
राजधानी का गुडम्बा क्षेत्र हो या जानकीपुरम, ऐसे कई क्षेत्र है जहां लगातार प्लाट और अपार्टमेंट की बिक्री तेजी से हो रही है। राजधानी के चारों तरफ कॉलोनियों और कस्बों की संख्या बढ़ती जा रही है। लोग अपने-अपने प्लाट पर निर्माण कराकर निवास कर रहे हैं। सुरक्षा के अभाव में बदमाश इन कॉलोनियों को अपना निशाना बना रहे हैं। राजधानी में बढ़ती आबादी की सुरक्षा को लेकर न तो सरकार को चिंता है न पुलिस विभाग को। पुलिस और सरकार के पास भी सुरक्षा के लिये कोई खास इंतजाम नहीं है। हाल यह है कि राजधानी के सभी थानों में नियत संख्या से कम पुलिसकर्मी तैनात हैं। जो तैनात हैं वह भी कई अन्य कार्यों में लगा दिये जाते हैं। लिहाजा सुरक्षा के नाम पर दिन हो या रात कोई पुलिसकर्मी मौजूद नहीं होता है। राजधानी के कई थाना क्षेत्रों में निर्धारित संख्या के मुताबिक पुलिसकर्मी नहीं है। हैरत की बात यह है कि शहर के कुछ प्रमुख थानों में भी पुलिसकर्मियों की संख्या काफी कम है, ऐसे में थानाध्यक्ष भी कहां-कहां गश्त लगाए। मसलन, कैसरबाग कोतवाली में 270 कर्मियों के सापेक्ष 88 की उपस्थिति रहती है जबकि अमीनाबाद में 72 के सापेक्ष 60 की उपस्थिति रहती है। वहीं नाका कोतवाली में 100 के मुकाबले 85, गोमतीनगर थाने में 100 के मुकाबले 80, हुसैनगंज में 81 के सापेक्ष 49 और विभूतिखंड थाना क्षेत्र में 86 के सापेक्ष 55 की उपस्थिति रहती है।

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