जिद… सच की- एसिड अटैक, सरकार और अदालत

सवाल यह है कि एसिड अटैक की घटनाओं पर लगाम क्यों नहीं लग पा रही है? क्या बाजार में आसानी से उपलब्ध हो रहे एसिड ने वारदातों में इजाफा किया है? सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद खुलेआम एसिड बेच रहे दुकानदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है? क्या पुलिस प्रशासन की लापरवाही के चलते एसिड के बेचने-खरीदने पर अंकुश नहीं लग पा रहा है?

Sanjay Sharma

हलाला, तीन तलाक व बहुविवाह के खिलाफ लड़ाई लड़ रही शबनम रानी पर एसिड यानी तेजाब फेंका गया। वह बुरी तरह झुलस गई है और उसका इलाज चल रहा है। इस मामले में दो लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। प्रदेश में एसिड अटैक की घटनाएं बढ़ रही हैं। अहम सवाल यह है कि एसिड अटैक की घटनाओं पर लगाम क्यों नहीं लग पा रही है? क्या बाजार में आसानी से उपलब्ध हो रहे एसिड ने वारदातों में इजाफा किया है? सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद खुलेआम एसिड बेच रहे दुकानदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है? क्या पुलिस प्रशासन की लापरवाही के चलते एसिड के बेचने-खरीदने पर अंकुश नहीं लग पा रहा है? क्या एसिड अटैक को लेकर सरकार कड़े कदम उठाएगी?
प्रदेश में महिलाओं पर एसिड अटैक की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। पिछले वर्ष रायबरेली से लखनऊ आ रही एक गैंगरेप पीडि़ता पर चलती ट्रेन में एसिड से हमला किया गया था। इसी तरह राजधानी स्थित गल्र्स हॉस्टल में रह रही एक युवती पर कुछ लोगों ने एसिड फेंका था। एसिड अटैक की इन घटनाओं की बड़ी वजह बाजार में खुलेआम हो रही एसिड की बिक्री है। हमलावरों को इन दुकानों से आसानी से एसिड मिल जाता है और वे इसका प्रयोग वारदातों को अंजाम देने में करते हैं। यह स्थिति तब है जब सुप्रीम कोर्ट ने एसिड की खरीद और बिक्री को नियंत्रित करने के लिए गाइड लाइन जारी की है। राजधानी लखनऊ समेत कई शहरों में खुलेआम एसिड बिक रहा है। कोर्ट के आदेश के बावजूद इन दुकानों पर न तो एसिड लेने वाले का नाम और पता दर्ज किया जाता और न ही उसकी उम्र लिखी जाती है। दुकानदार कमाई के चक्कर में नाबालिगों तक को एसिड की बोतल बेच देते हैं। कोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश सरकार ने भी एसिड की खरीद और बिक्री को नियंत्रित करने के लिए फरमान जारी किया था। नियमानुसार पंजीकृत दुकानदारों द्वारा ही एसिड की बिक्री की जा सकती है। इसके लिए बिक्री करने वाले दुकानदारों का ब्यौरा प्रशासनिक व पुलिस अफसरों के पास होना चाहिए। पुलिस को इनकी समय-समय पर जांच करनी चाहिए। हकीकत यह है कि एसिड की बिक्री कितनी दुकानों में हो रही, इसकी जानकारी तक संबंधित विभागों को नहीं है। लिहाजा प्रदेश में एसिड अटैक की घटनाएं बढ़ रही हैं। अगर सरकार एसिड अटैक की घटनाओं पर लगाम लगाना चाहती है तो उसे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराना होगा। साथ ही संबंधित विभागों के अधिकारियों को जवाबदेह बनाना होगा।

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