भाजपा को भारी पड़ गया रावण की रिहाई का फैसला

  • रिहा होते ही संघ और भाजपा पर बोला हमला, माया की शान में पढ़े कसीदे
  • कहा, नहीं होने देंगे दलित वोटों का बंटवारा, दलितों को रिझाने के लिए भाजपा ने चला था दांव

संजय शर्मा

लखनऊ। जेल से रिहा होते ही भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर उर्फ रावण के बयानों ने भाजपा की नींद उड़ा दी है। आनन-फानन में जेल से रावण को रिहा करके भाजपा ने दलितों को लुभाने के लिए जो ट्रंप कार्ड चलने की कोशिश की थी वही ट्रंप कार्ड अब भाजपा के गले की फांस बनता नजर आ रहा है। जेल से रिहा होते ही रावण ने भाजपा और संघ पर हमला करने के साथ ही मायावती की तारीफ कर यह संकेत दे दिए हैं कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दलितों के बंटवारे के लिए भाजपा की कोशिशें इतनी आसानी से परवान नहीं चढ़ सकेंगी।
भाजपा के सामने यह परेशानी भी खड़ी हो रही है कि अरविंद केजरीवाल से लेकर वामपंथी संगठनों तक का झुकाव रावण की तरफ है। उधर, एससी-एसटी एक्ट के बाद जिस तरह भाजपा के परंपरागत ऊंची जाति के वोटरों में नाराजगी बढ़ी है वह भाजपा के लिए चिंताजनक है। इसी बीच रावण की रिहाई के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ऊंची जातियों और विशेषकर राजपूत समाज में भाजपा के लिए नाराजगी और बढ़ गई है। भाजपा भी जानती है कि रावण का जनाधार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तेजी से बढ़ रहा है और दलित जातियां रावण को अपना नेता मान रही हैं। कैराना लोकसभा उपचुनाव में इसकी झलक खुद भाजपा ने देखी थी, जब जेल में रहते हुए रावण ने भाजपा को हराने की अपील की थी और दलित समुदाय ने रावण की बात काफी हद तक मानी भी थी। सहारनपुर में राजपूतों और दलितों के बीच हुए झगड़ों के बाद चर्चा में आए भीम आर्मी के संस्थापक रावण पेशे से वकील हैं। उन्होंने शब्बीरपुर गांव में दलितों के घर जलाए जाने के बाद बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया था और इसमें कुछ लोगों की मौत हो गई थी एवं बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। इस संघर्ष के बाद राजपूत और दलित समुदाय आमने-सामने आ गए थे। इस टकराव को लेकर भाजपा काफी परेशान हुई थी और बाद में रावण को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। बाद में उस पर रासुका लगा दी गई थी।
देश भर में दलितों की नाराजगी को देखते हुए भाजपा ने पहले तो एससी-एसटी एक्ट में संशोधन किया और दलितों को लुभाने की कोशिश की। इसके बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बसपा का प्रभाव कम करने के लिए रावण को अपने साथ लाने की रणनीति पर विचार किया गया। सूत्रों का कहना है कि भाजपा के कुछ नेताओं ने रावण से मुलाकात कर उनसे सहानुभूति जताई थी। रावण ने भी कुशल राजनेता की तरह उन्हें भरोसा दिलाया था कि वह भाजपा के पक्ष में बात कर लेंगे। भाजपा के नेता रावण के इस जाल में फंस गए और बड़ी खुशी-खुशी रावण को जेल से रिहा करने की रणनीति बनाई गई मगर जेल से रिहा होते ही रावण ने भाजपा को सबसे बड़ा झटका देते हुए भाजपा और संघ की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि भाजपा के इस कथित हिंदू साम्राज्य का सपना वह पूरा नहीं होने देंगे। साथ ही उन्होंने अप्रत्याशित रूप से मायावती की सराहना करते हुए यह साफ संकेत दे दिए कि वह किसी भी कीमत पर दलित वोटों का बंटवारा नहीं होने देंगे। भाजपा के लिए रावण का यह धोबी पाट
आने वाले दिनों में भारी पड़ सकता है।

द ग्रेट चमार का बोर्ड लगाकर सुर्खियों में आया रावण

भीम आर्मी के संस्थापक रावण उस समय देशभर में सुर्खियों में आ गए थे जब उन्होंने अपने गांव घडक़ौली के सामने द ग्रेट चमार का बोर्ड लगा दिया था। इस बोर्ड के बाद पूरे इलाके में ऊंची जातियों ने नाराजगी जताई थी। तब चंद्रशेखर उर्फ रावण ने कहा था कि पूरे इलाकों में वाहनों पर जातियों के नाम लिखे होते हैं जैसे द ग्रेट राजपूताना, द ग्रेट पंडित तो फिर हमने भी अपने सम्मान के लिए द ग्रेट चमार का बोर्ड लगाया है। देहरादून से लॉ की पढ़ाई करने वाले चंद्रशेखर खुद को रावण कहलाने में सम्मान महसूस करते हैं और कहते हैं कि कुछ लोगों ने रावण का नकारात्मक चित्रण किया है जो व्यक्तिअपनी बहन के सम्मान के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा सकता है वह रावण गलत कैसे हो सकता है। जाहिर है कि राम की पार्टी की रावण से यह लड़ाई आगामी चुनाव में कोई बड़ा गुल खिला सकती है।]

भाजपा विधायक ने कहा नाम के रावण का भी होगा वध 2019 में
भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह ने चंद्रशेखर उर्फ रावण को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जब असली रावण का खात्मा हो गया तो यह तो नाम का रावण है। 2019 के चुनाव में इन रावण का भी राजनीतिक रूप से वध हो जाएगा। रावण की रिहाई मानवीय आधार पर की गई है और इस पर राजनीति नहीं करनी चाहिए।

लोकसभा चुनाव जीतने के लिए लखनऊ में जुटे भाजपा के महारथी

  • सरकार और संगठन में फेरबदल को लेकर भी चर्चा होने की संभावना

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। भाजपा के प्रदेश पदाधिकारियों की आयोजित बैठक में विभिन्न मुद्दों पर मंथन जारी है। बैठक में लोकसभा चुनाव की तैयारियों समेत विभिन्न अभियानों को जमीन पर उतारने पर चर्चा की गई। माना जा रहा है कि इस बैठक में संगठन और सरकार में फेरबदल पर भी चर्चा हो सकती है।
प्रदेश कार्यालय में आज भाजपा के प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक हो रही है। बैैठक में राष्ट्रीय महामंत्री भूपेंद्र यादव मौजूद रहे। इसके अलावा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडे व संगठन मंत्री सुनील बंसल भी पहुंचे। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा भी बैठक में बुलाए गए हैं। बैठक में लोकसभा चुनाव की तैयारियों और 15 सितंबर से स्वच्छता ही सेवा अभियान के शुभारंभ पर चर्चा की गई। बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी की स्मृति कार्यक्रमों पर चर्चा होगी।

अब भाजपा, सपा व बसपा के पार्टी कार्यालयों का मामला पहुंचा हाईकोर्ट

  • अधिवक्ता मोती लाल ने कई बंगलों को मिलाकर ऑफिस बनाने पर उठाये सवाल

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। सरकारी बंगले के बाद अब राजनीतिक पार्टियों के कार्यालय को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है। अधिवक्ता मोतीलाल यादव द्वारा दाखिल इस याचिका में भाजपा, सपा व बसपा के पार्टी दफ्तर को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। याचिका की सुनवाई 17 सितंबर को होगी।
अधिवक्ता मोतीलाल यादव द्वारा दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य संपत्ति विभाग के नियमों को ताक पर रखते हुए इन पार्टियों के दफ्तरों का विस्तार किया। अवैध रूप से पार्टी दफ्तरों के विस्तार के लिए सरकारी बंगलों का विलय कराया गया। इन पार्टियों ने सत्ता में रहते हुए सरकारी खर्चे से पार्टी कार्यालय का विस्तार कराया है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से राजनीतिक पार्टियों के दफ्तर में कराए गए अवैध खर्च की रिकवरी का भी जिक्र किया है। कोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए सुनवाई की तारीख तय कर दी है।

 

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