गणेश चतुर्थी गणपति उत्सव

भगवान गणेश के जन्मदिन के उत्सव को गणेश चतुर्थी के रूप में जाना जाता है। गणेश चतुर्थी के दिन, भगवान गणेश को बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के देवता के रूप में पूजा जाता है। यह मान्यता है कि भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष के दौरान भगवान गणेश का जन्म हुआ था। गणेशोत्सव अर्थात गणेश चतुर्थी का उत्सव, 10 दिन के बाद, अनन्त चतुर्दशी के दिन समाप्त होता है और यह दिन गणेश विसर्जन के नाम से जाना जाता है। अनन्त चतुर्दशी के दिन श्रद्धालु-जन बड़े ही धूम-धाम के साथ सडक़ पर जुलूस निकालते हुए भगवान गणेश की प्रतिमा का सरोवर, झील, नदी इत्यादि में विसर्जन करते हैं। इस साल गणेश चतुर्थी का पर्व आज से शुरू हो रहा है जो कि 23 सितंबर तक चलेगा। कई बार अनजाने में गलत जगह या वास्तु के अनुसार गलत दिशा में गणेशजी की मूर्ति स्थापित हो जाती है। इसके कारण पूजा का पूरा फ ल नहीं मिल पाता। गणेश जी की ऐसी मूर्ति घर लानी चाहिए जो शास्त्रों के अनुसार सही हो। यानी पुराणों और ग्रंथों में जैसा गणेशजी का स्वरूप बताया गया है उनकी मूर्ति भी वैसी ही होनी चाहिए। गणेशजी की मूर्ति जनेऊ, रंग, सूंड, वाहन, अस्त्र-शस्त्र, हाथों की संख्या और आकृति जैसी कुछ खास बातों को ध्यान में रखकर खरीदनी चाहिए।

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