क्या सच में कांग्रेस से अलग होना चाहती हैं माया!

  • चार राज्यों में मनमुताबिक सीट नहीं देने पर कांग्रेस पर भडक़ीं बसपा प्रमुख
  • लोकसभा चुनाव से पहले दबाव की राजनीति कर रही हैं मायावती
  • अपने राजनीतिक कद और वोट बैंक को भुनाने में जुटीं
  • भाजपा के लिए सपा-बसपा गठबंधन खड़ी करेगा मुश्किल

संजय शर्मा
लखनऊ। सपा-बसपा के साथ कांग्रेस का गठबंधन अभी परवान भी नहीं चढ़ा कि कल बसपा सुप्रीमो मायावती ने कांग्रेस और भाजपा को एक ही तराजू में रखकर राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर खलबली मचा दी। भाजपा के रणनीतिकार भी मायावती के इस बयान का राजनीतिक मतलब तलाशने में जुटे हैं। माना जा रहा है कि चार राज्यों में बसपा कांग्रेस के साथ सम्मानजनक समझौता चाहती थी मगर कांग्रेस बसपा के मनमुताबिक सीटें देने को राजी नहीं हुई जिसके बाद बसपा ने भी कांग्रेस को झटका देते हुए यह संकेत दे दिया कि अगर चार राज्यों में कांग्रेस बसपा का साथ नहीं देगी तो उत्तर प्रदेश में बसपा भी कांग्रेस से किनारा कर लेगी। समाजवादी पार्टी भी चाहती है यूपी में गठबंधन सिर्फ सपा और बसपा का हो और कांग्रेस को इस गठबंधन से बाहर रखा जाए। माना जा रहा है कि माया का यह बयान कांग्रेस के ऊपर दबाव बनाने की रणनीति का एक हिस्सा है।
दरअसल, मौजूदा समय में मायावती का राजनीतिक कद और वोट बैंक सभी के लिए जरूरी बन गया है। भाजपा जानती है कि अगर 2014 की तरह उसे दलित वोट नहीं मिला तो उत्तर प्रदेश से उसने जितनी सीटें जीती थी उसमें काफी कमी आ सकती है। भाजपा दलितों को लुभाने की हर कोशिश कर रही है। एससी-एसटी एक्ट पर भी उसने अपने वोट बैंक ऊंची जातियों को भी नाराज कर दिया है जिससे दलितों में यह संदेश जा सके कि भाजपा उसकी सबसे बड़ी हितैषी है। हकीकत में उत्तर प्रदेश में संभावित सपा-बसपा का गठबंधन भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती है क्योंकि यह माना जाता है कि दिल्ली का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर ही गुजरता है। भाजापा जानती हैं कि अगर यह गठबंधन उत्तर प्रदेश में बन गया तो उसको खतरनाक स्थितियों का सामना करना पड़ेगा। गोरखपुर, फूलपुर और कैराना लोकसभा में पूरी मेहनत करने के बावजूद भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा था। कैराना में तो चुनाव से ठीक पहले पड़ोस में प्रधानमंत्री मोदी की रैली कराकर चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की गई थी मगर गठबंधन के आगे सारी कोशिशें परवान नहीं चढ़ सकी। भाजपा जानती है कि जातिगत आधार पर अगर वोट बैंक का बंटवारा हो गया तो सपा और बसपा का वोट बैंक उसके वोट बैंक पर कहीं भारी पड़ जाएगा इसलिए भाजपा समय-समय पर ऐसे बयान देती रहती है जिससे सपा और बसपा में मतभेद हो जाए मगर मौजूदा राजनीतिक समय मायावती के बहुत अनुकूल है। वह सपा और कांग्रेस से अपनी शर्तों पर समझौता करना चाहती हैं। खास तौर पर मध्य प्रदेश और राजस्थान में मायावती अपनी क्षमता से ज्यादा सीटें कांग्रेस से चाहती हैं। मायावती को लगता है कि यही वह उपयुक्त समय है जब वह अपनी पार्टी का राष्टï्रीय स्तर पर विस्तार कर सकती हैं। मायावती यह भी जानती हैं कि यूपी में कांग्रेस की हालत बहुत पतली है और अगर कांग्रेस को गठबंधन में शामिल नहीं किया गया तो कांग्रेस को अपनी परंपरागत सीट अमेठी और रायबरेली जीतने के भी लाले पड़ जाएंगे। इसी बात को ध्यान में रखकर मायावती ने कल कांग्रेस को दबाव में लेने के लिए सोच समझकर बयान दिया जिसमें उन्होंने भाजपा और कांग्रेस को एक ही थैली का चट्टा-बट्टा बताया था। जानकार मानते हैं कि कांग्रेस के पास खोने के लिए ज्यादा है और कांग्रेस इस बात की पूरी कोशिश करेगी कि चार राज्यों के उपचुनाव में बसपा उनके साथ रहे। अब देखना यह होगा कि मायावती आगे चलकर भी कांग्रेस से दूरी बनाती हैं या यह माना जाए कि यह बयान मायावती की राजनीतिक ब्लैकमेलिंग का एक हिस्सा है।

फिर आया जलजला, बिहार, पश्चिम बंगाल व असम समेत कई राज्य हिले

  • रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.5, घरों से बाहर भागे लोग
  • असम के कोकराझार में था केंद्र, जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

नई दिल्ली। हिंदुस्तान की जमीन एक बार फिर हिल उठी। बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में आज सुबह भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.5 बताई जा रही है। खबर लिखे जाने तक कहीं से जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है। करीब 25 से 30 सेकंड तक भूकंप के झटके महसूस किए गए। लोग घर के बाहर भागे। असम के कोकराझार में भूकंप का केंद्र बताया जा रहा है।
सुबह सवा 10 बजे के करीब भूकंप के झटके महसूस किए गए। इसका असर बिहार के पूर्णिया, अररिया, कटिहार, कूचबिहार, किशनगंज और पटना में दिखाई दिया। पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी व कुछ अन्य हिस्सों में झटके महसूस किए गए। भूकंप से घरों में पंखे हिलने लगे और लोग खुले मैदान की ओर भागे। असम, नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। नेशनल सिस्मॉलाजी सेंटर के निदेशक विनीत गहलोत ने बताया कि भूकंप सतह से करीब 10-12 किमी नीचे आया था। इससे पहले जम्मू-कश्मीर और हरियाणा में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। कश्मीर में भूकंप की तीव्रता 4.6 थी। कश्मीर में सुबह सवा पांच बजे भूकंप आया और इसके कुछ देर बाद करीब पौने छह बजे हरियाणा के झज्जर जिले में 3.1 की तीव्रता का भूकंप आया। बिहार की राजधानी पटना में भूकंप के बाद लोगों में दहशत दिखी। लोगों में तीन साल पहले आए भूकंप की यादें ताजा हो गईं।

बीएचयू में भोजन को लेकर बवाल दर्जनों गाडिय़ों में की गई तोडफ़ोड़

  • धरने पर बैठे छात्र पुलिस फोर्स तैनात

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
वाराणसी। मेस में भोजन को लेकर बीएचयू स्थित बिरला व अय्यर हॉस्टल के छात्रों ने हंगामा कर दिया। आक्रोशित छात्रों ने सडक़ पर खड़ी गाडिय़ों में तोडफ़ोड़ की। इसके बाद धरने पर बैठ गए। एसपी सिटी और चीफ प्रॉक्टर ने छात्रों को समझा-बुझा कर धरना खत्म करने की कोशिश की। वहीं सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए परिसर में पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है।
छात्रों का आरोप है कि बिड़ला हॉस्टल के छात्र अक्सर अय्यर के मेस में जबरन खाना खाने जाते हैं। अय्यर हॉस्टल में विज्ञान संकाय के शोध छात्र और बिड़ला हॉस्टल में कला संकाय के बीए के छात्र रहते हैं। आज यह विवाद बढ़ गया। इसके बाद छात्रों ने हास्टल परिसर में धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। गाडिय़ों में तोडफ़ोड़ की। छात्रों का कहना है कि बिड़ला हॉस्टल के छात्र सुबह जबरन नाश्ता कर रहे थे। जब कुछ छात्रों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो पांच दर्जन की संख्या में छात्रों ने पूरे हॉस्टल में खड़ी छात्रों की गाडिय़ां व कमरों के सामने रखे कूलर आदि में तोडफ़ोड़ की। तोडफ़ोड़ करने वाले छात्रों पर कार्रवाई की मांग करते हुए छात्रों ने जाम लगा दिया। घटना की सूचना मिलने के बाद एसपी सिटी दिनेश सिंह और चीफ प्रॉक्टर रायना सिंह मौके पर पहुंची और छात्रों से प्रदर्शन खत्म करने की अपील की।

 

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