जिद… सच की- जीवनदायी नदियां और बाढ़ व सूखा झेलने को मजबूर जनता

दरअसल जलवायु परिवर्तन की वजह से दुनिया भर में जल संकट बढ़ रहा है। देशमें बढ़ती जनसंख्या, बढ़ती आय और शहरों के विस्तार से पानी की मांग में भारी बढ़ोतरी हो रही है, जबकि जल आपूर्ति की कोई ठोस व्यवस्था कहीं नहीं है। यदि हम समय रहते न चेते तो जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम का मिजाज पूरी तरह से गड़बड़ा जाएगा।

Sanjay Sharma.

नदियां हम सब को जीवन देती हैं। नदियों के सूखने और उनका जल स्तर बढऩे से व्यक्ति का विकास और विनाश जुड़ा होता है। इसलिए जीवनदायी नदियों को बचाना और उनको पुनर्जीवित करना हम सबके लिए चुनौती बन गया है। यदि देश और प्रदेश को बाढ़, सूखा और जल संकट से बचाना है तो जल संचयन, जल संरक्षण, नदियों को पुनर्जीवित करने और नदियों को जोडऩे का काम प्रमुखता से किया जाना चाहिए।
देश में भले ही नदियों को जोडऩे की संकल्पना को साकार करना आसान नहीं है, लेकिन पानी की किल्लत और बाढ़ से मुक्ति पाने का यही सबसे अच्छा विकल्प है। मौजूदा समय में जल संकट, बाढ़, सूखा आदि समस्याओं से निपटने के लिए इस तरह की परियोजनाओं को भारत में लागू करना अति आवश्यक है, क्योंकि आपदाओं से होने वाला आर्थिक नुकसान एवं जान-माल की क्षति नदियों को जोडऩे में होने वाले खर्च और विस्थापितों के दुख-दर्द से कहीं अधिक है। यूपी की सूख चुकी नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार की तरफ से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। उन योजनाओं पर काम भी हो रहा है, लेकिन विशेषज्ञों की नजर में अब तक के सारे प्रयास नाकाफी हैं। ऐसे में प्रदेश की करीब 24 नदियों को पुनर्जीवित करने की रणनीति तैयार करने पर मंथन शुरू हो गया है। सिंचाई विभाग के अधिकारी, सामाजिक संस्थाओं के सदस्य और विशेषज्ञ मिलकर कोई ठोस उपाय तलाशने में जुटे हैं। उम्मीद है इस मंथन का कोई सार्थक परिणाम निकलेगा। सवाल उठता है कि क्या जल संकट के लिए सिर्फ जलवायु परिवर्तन जिम्मेदार है? क्या भूमिगत जल का अंधाधुंध दोहन करना उचित है? क्या जनता के सहयोग के बिना सरकार जल संकट का समाधान ढूंढ लेगी? क्या हम अपनी आने वाली पीढिय़ों को जल संकट, सूखा और बाढ़ गिफ्ट में देने वाले हैं ? यदि ऐसा नहीं है तो हमें सरकार के साथ मिलकर जल संकट की समस्या का समाधान करना होगा। जल संरक्षण, जल संचयन, बंधों के निर्माण, नदियों एवं नहरों की सफाई, नदियों को जोडऩे में सरकार का पूरा सहयोग करना होगा। ताकि हमारे बच्चों को सूखा, बाढ़ की समस्या से दो चार न होना पड़े।
दरअसल जलवायु परिवर्तन की वजह से दुनिया भर में जल संकट बढ़ रहा है। देशमें बढ़ती जनसंख्या, बढ़ती आय और शहरों के विस्तार से पानी की मांग में भारी बढ़ोतरी हो रही है, जबकि जल आपूर्ति की कोई ठोस व्यवस्था कहीं नहीं है। यदि हम समय रहते न चेते तो जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम का मिजाज पूरी तरह से गड़बड़ा जाएगा। जनसंख्या वृद्धि, शहरीकरण, औद्योगिकीकरण आदि के कारण पानी की मांग बढ़ेगी। जिसे पूरा कर पाना संभव नहीं होगा। इसलिए हमें आज और अभी से जल संकट से मुक्ति का समाधान ढूंढने की दिशा में काम शुरू करना होगा,तभी हम आने वाली पीढिय़ों को बेहतर भविष्य दे पाएंगे।

Pin It