तेलंगाना में महागठबन्धन को लगा झटका

लोकसभा में नरेंद्र मोदी ने तेलंगाना सरकार की प्रशंसा की थी। चंद्रशेखर राव अब खुलकर कांग्रेस के खिलाफ आ गए हैं। उन्होंने कांग्रेस को तेलंगाना का सबसे बड़ा दुश्मन बताया है। तेलंगाना को अलग राज्य का दर्जा दिलाने में कांग्रेस ने लंबे समय तक बाधा पहुंचाई थी। उन्नीस सौ छप्पन में एकीकृत आंध्र प्रदेश का गठन करना तेलंगाना के लिए छल था। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी सबसे बढ़ा मसखरा बताया। उन्होंने कहा कि वह राज्य का जितना दौरा करेंगे टीआरएस चुनाव में उतना ही बेहतर प्रदर्शन करेगी।

डॉ दिलीप अग्निहोत्री

भाजपा के खिलाफ महागठबन्धन बनाने के प्रयास को तेलंगाना में झटका लगा है। तेलंगना उन प्रदेशों में शामिल है जहां क्षेत्रीय दल की सरकार है। ऐसे में उसके भी महागठबन्धन में शामिल होने की उम्मीद थी। अपने प्रदेश में मजबूत जनाधार रखने वाली चुनिंदा पार्टियों में तेलंगाना राष्ट्र समिति शामिल थी। लेकिन उसने महागठबन्धन से किनारा कर लिया।
तेलंगाना राष्ट्र समिति अध्यक्ष और मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव ने समय पूर्व विधानसभा भंग करके कांग्रेस को सकते में डाल दिया है। इतना ही नहीं इसी के साथ उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला भी बोला है। जबकि भाजपा के प्रति उन्होंने नरमी दिखाई। कुछ समय पहले उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात की थी। तभी से तेलंगाना के समीकरण में बदलाव की अटकलें लग रही थीं।
चर्चा है कि तेलंगाना राष्ट्र समिति राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल होगी। अविश्वास प्रस्ताव के दौरान भी टीआरएस ने सदन में हुई वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया था। लोकसभा में नरेंद्र मोदी ने तेलंगाना सरकार की प्रशंसा की थी। चंद्रशेखर राव अब खुलकर कांग्रेस के खिलाफ आ गए हैं। उन्होंने कांग्रेस को तेलंगाना का सबसे बड़ा दुश्मन बताया है। तेलंगाना को अलग राज्य का दर्जा दिलाने में कांग्रेस ने लंबे समय तक बाधा पहुंचाई थी। उन्नीस सौ छप्पन में एकीकृत आंध्र प्रदेश का गठन करना तेलंगाना के लिए छल था। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी सबसे बढ़ा मसखरा बताया। उन्होंने कहा कि वह राज्य का जितना दौरा करेंगे टीआरएस चुनाव में उतना ही बेहतर प्रदर्शन करेगी। पिछले चार वर्षों में तेलंगाना ने बहुत प्रगति की है। राज्य विधानसभा व लोकसभा चुनाव एक साथ प्रस्तावित थे। चंद्रशेखर राव चाहते हैं कि इस वर्ष के अंत में चार राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के साथ ही इस राज्य के चुनाव हों। राजस्थानए मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम के साथ तेलंगाना के चुनाव हो सकते है। चंद्रशेखर राव विधानसभा चुनाव की तैयारी पहले से कर रहे थे। उन्होंने एक सौ उन्नीस सीटों वाली विधानसभा के लिए एक सौ पांच उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की।
कहा जा रहा है कि तेलंगाना राष्ट्र समिति ने अघोषित रूप से भाजपा के लिए सीट छोड़ी हैं। संभावना है कि भाजपा का तेलंगाना राष्ट्र समिति, द्रमुक, बीजू जनता दल, एसआईडीएमके, से चुनावी समझौता हो जाएगा। तेलंगाना विधानसभा भंग होने से कांग्रेस व तेलगु देशम पार्टी सकते में है। उन्हें लग रहा था कि चुनाव लोकसभा के साथ होंगे। वह अभी चुनाव के लिए तैयार नहीं थे। जबकि चंद्रशेखर राव ने गरीबों के लिए दो लाख आवासए मुफ्त चावल, बिजली और वर्ष में एलपीजी गैस के छह सिलेंडर मुफ्त देने की योजना लागू की थी। उन्हें उम्मीद है कि इन योजनाओं के आधार पर मतदाता आगामी चुनाव में उनको पुन: बहुमत प्रदान करेंगे।
यह सही है कि अब तेलंगाना में कांग्रेस और तेलगु देशम पार्टी का गठबन्धन हो सकता है। लेकिन चंद्रशेखर राव की लोकप्रियता का मुकाबला आसान नहीं होगा। भाजपा ने भी यहां अपना आधार बढ़ाया है। फिलहाल कांग्रेस को यहां नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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