अनंत की ओर अटल

 

4PM News Network

पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न और कालजयी राजनीतिज्ञ अटल बिहारी वाजपेयी आज सबको बिलखता छोड़ अनंत की यात्रा पर निकले। जैसे ही उनकी अंतिम यात्रा भाजपा मुख्यालय से राष्टï्रीय स्मृति स्थल की ओर निकली लोगों का हुजूम अपने लोकप्रिय नेता के पार्थिव शरीर के पीछे चल पड़ा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह समेत कई राजनेता अंतिम यात्रा में शामिल हुए और आम जनता के साथ अटल जी के पार्थिव शरीर के पीछे पैदल चलते रहे। अटल जी के निधन पर देश और दुनिया में शोक की लहर है। उनको श्रद्धांजलि देने के लिए देश-विदेश के राजनयिक भी पहुंचे हैं।

 

आप नहीं गए आप जा भी नहीं सकते….

हम सब रंगमंच के एक पात्र की तरह जिंदगी में आते रहते हैं। बस कभी-कभी मंच पर कोई पात्र ऐसा आता है जिसकी जिंदगी हमारे लिए कई सपनों को जन्म देती है। लगता है यह शख्स मानो हमारे लिए ही इस दुनिया में आया है। अटल जी भी इस दुनिया के रंगमंच के ऐसे ही पात्र थे। उनके जाने से जिदंगी में एक खालीपन का एहसास इस देश को हो रहा है। मुझे याद नहीं आ रहा इंदिरा जी की मृत्यु के बाद देश के लोग कभी किसी नेता के लिए इतना दुखी हुए हों। यह उसी जन नेता के लिए हो सकता है जो इस देश की आत्मा में बसा हो। अटल जी का राजनीतिक जीवन, सामाजिक जीवन और निजी जीवन शीशे की तरह साफ था। कहीं कोई चीज ऐसी नहीं जिसको छिपाने की जरूरत हो। चाहे मदिरापान का मामला हो या मांसाहर का मामला, अटल जी ने कभी कुछ छिपाने की जरूरत ही नहीं समझी। वो न किसी पर निजी हमले करते थे और न कोई उन पर। लोकतंत्र का सही अर्थ क्या होता है यह अटल जी को देखकर समझा जा सकता है। विपक्ष में भी रहते हुए अटल जी के महत्व को समझते हुए तत्कालीन पीएम नरसिम्हा राव ने उन्हें गुटनिरपेक्ष सम्मेलन में भाग लेने जेनेवा भेजा और वहां पर उन्होंने जो हिंदी में भाषण दिया वो इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज हो गया। काश, आज अपने देश की संसद में अंग्रेजी में बोलते सांसद अटल जी से कुछ सीख पाते।
अटल जी हमेशा कहते थे कि लोकतंत्र में विपक्ष से स्वस्थ बहस होनी चाहिए। विपक्ष को दुश्मन नहीं समझना चाहिए। उन्होंने कहा भी कि एक बार जब वह पीएम बन गये तो संसद में एक जगह लगा नेहरू जी का चित्र हटा दिया गया। वे यह देखकर रूके और बोले नेहरू जी का यह फोटो कहां है और कुछ घंटों में ही वह फोटो अपनी जगह वापस आ गयी। मैं शायद तब कक्षा पांच का छात्र था। अटल जी किसी पथराव में घायल हो गये थे और उसी अवस्था में बदायूं आये थे। लाखों की भीड़ जमा थी। मैं बचपन से अटल जी का दीवाना था। अटल जी के सामने मैंने भाषण दिया। अटल जी ने मुझे गले से लगा लिया और कहा यह बच्चा बहुत आगे जायेगा।
इस देश को ऐसी मानसिकता वाले युग पुरुष की बहुत जरूरत थी। अटल जी स्वस्थ होते तो सालों से राजनीति में जो नफरत दिख रही है वह नहीं दिखती।
हमने इस युग पुरुष की याद में आज अखबार के सभी पेज अटल जी की याद में उनके लिये समर्पित किये हैं। आज किसी पेज पर कोई विज्ञापन, कोई खबर नहीं जा रही हैं। मैं अपने विज्ञापनदाताओं और पाठकों से भी माफी चाहता हूं। अखबार में यह नहीं होना चाहिए पर आज के सभी एड मैंने हटा दिए हैं क्योंकि आज अटल जी के अलावा कुछ जाता तो मुझे अपने दिल पर बोझ लगता।
अटल जी आप कहीं नहीं गये,आप जा भी नहीं सकते, आप रहेंगे हमेशा हमारी आत्मा में, हमारे बहते लहू में।
नमन आपको

संजय शर्मा, संपादक 4पीएम

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