कागजों में सिमटा वरिष्ठï नागरिक सुरक्षा प्रकोष्ठï जिम्मेदारी से कतरा रही राजधानी पुलिस

  • शहर में बढ़ती जा रही हैं वृद्ध नागरिकों के खिलाफ वारदातें
  • थाने और चौकियों में नाम-पता दर्ज करने की योजना फेल, अभी तक 1150 लोगों का किया गया है पंजीकरण

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। शासन और प्रशासन भले ही वरिष्ठï नागरिकों की सुरक्षा के दावे कर रहा हो लेकिन इनकी सुरक्षा के लिए गठित वरिष्ठï नागरिक सुरक्षा प्रकोष्ठï कागजों में सिमट गया है। इनकी सुरक्षा को लेकर वह पुख्ता इंतजाम के निर्देश भी जब-तब देता रहता है। बावजूद इसके राजधानी पुलिस हीलाहवाली करने में जुटी है। वरिष्ठï नागरिकों के साथ वारदातों के बाद आलाधिकारी तत्काल कई कठोर कदम उठाने के निर्देश देते हैं लेकिन कुछ दिनों बाद धीरे-धीरे यह आदेश ठंडे बस्ते में चला जाता है। यही कारण है कि वरिष्ठï नागरिकों के साथ होने वाली वारदातें बदस्तूर जारी हैं। वरिष्ठï नागरिकों के लिए बना सुरक्षा प्रकोष्ठï भी सिर्फ तमाशा बनकर रह गया है, जिसके कारण वरिष्ठï नागरिकों के खिलाफ आपराधिक घटनाएं बढ़ती जा रही हैं।
राजधानी लखनऊ में वरिष्ठï नागरिकों की सुरक्षा को लेकर पुलिस फिक्रमंद नहीं है, जबकि शासन और प्रशासन ने इसको लेकर पुलिस को सख्त हिदायत दी है। थानों और चौकियों में वरिष्ठï नागरिकों के नाम व पते दर्ज करने के निर्देश दिये गये थे लेकिन ये निर्देश सिर्फ कागजों तक सिमट गए हैं। इसके अलावा राजधानी पुलिस इनकी सुरक्षा के लिए वरिष्ठï नागरिक सुरक्षा प्रकोष्ठï का भी गठन किया है लेकिन यह सेल निष्क्रिय साबित हो रही है। इस सेल के द्वारा अभी तक करीब 1150 वरिष्ठï नागरिकों का रजिस्ट्रेशन किया गया है। हालांकि यह प्रकोष्ठï वरिष्ठï नागरिकों की सुरक्षा के लिए मात्र खानापूर्ति बनकर रह गयी है। राजधानी लखनऊ में आये दिन वरिष्ठï नागरिकों के साथ सनसनीखेज घटनाएं हो रहीं हैं, जिसके बावजूद राजधानी पुलिस चिंतित नहीं दिख रही है। राजधानी पुलिस के इस लापरवाह रवैये से वरिष्ठï नागरिकों के साथ घटनाएं बढ़ रही हैं।

किरायेदारों के सत्यापन में सिर्फ खानापूर्ति

वरिष्ठï नागरिकों के साथ वारदातों में किरायेदार और नौकर की भूमिका खुलासों के समय उजागर होती है। इनकी भूमिका उजागर होने के बाद भी पुलिस इनके सत्यापन पर जोर नहीं देती है। हालांकि किसी वारदात के बाद किराएदारों व नौकरों का सत्यापन और उनकी जांच पड़ताल शुरू होती है। पुलिस का यह अभियान भी महज दो से तीन दिनों तक सक्रिय रहता है, जिसके बाद वह दम तोडऩे लगता है। पुलिस की इस खानापूर्ति से कोई न कोई वरिष्ठï नागरिक बदमाशों का शिकार हो जाता है।

थानों में दर्ज नहीं ब्यौरा

थाने और चौकी पर तैनात पुलिसकर्मी वरिष्ठï नागरिकों का ब्यौरा जुटाने से किनारा काटते हैं। वह इसका जिम्मा वरिष्ठï नागरिक सुरक्षा प्रकोष्ठï पर छोड़ देते हैं, जिसके कारण वरिष्ठï नागरिकों के साथ राजधानी में वारदातें बढ़ रही हैं। वारदात के बाद वह आनन-फानन में सत्यापन समेत कई प्रक्रिया शुरू करती है, जिसके कारण बदमाश आसानी से वारदात कर फरार हो जाते हैं और पुलिस के पास कोई सुराग भी नहीं रहता है। पुलिस के इस लचर रवैए से बदमाश वरिष्ठï नागरिकों को निशाना बना लेते हैं और आसानी से लूटपाट कर फरार हो जाते हैं।

वरिष्ठï नागरिकों के साथ हुईं घटनाएं

  • गाजीपुर में कृष्णा वाष्र्णेय की निर्मम हत्या।
  • सरोजनीनगर में लूसी सिंह का कत्ल।
  • हजरतगंज में दिनदहाड़े रामरति की गला दबाकर हत्या।
  • गोमतीनगर में बुजुर्ग दंपति नारायण और लता का कत्ल।
  • कृष्णानगर में बुजुर्ग योगेश की निर्मम हत्या।
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