एसिड अटैक सर्वाइवर्स के पुनर्वास योजना को झटका अनुभवहीन संस्था को शीरोज कैफे की जिम्मेदारी

  • एसिड अटैक सर्वाइवर अंशू ने महिला कल्याण निगम के अफसरों पर नियमों को ताक पर रखकर ठेका देने का लगाया आरोप
  • 2016 में आगरा की तर्ज पर राजधानी में शुरू किया गया था शीरोज कैफे

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। कोई सामाजिक सरोकार नहीं, न एसिड अटैक सर्वाइवर्स के साथ काम करने का अनुभव, फिर भी गोमतीनगर के शीरोज हैंगआउट कैफे का ठेका उस लोटस हास्पिटैलिटी संस्था को सौंप दिया गया जो केवल मैन पावर सप्लाई का काम करती है। एसिड अटैक सर्वाइवर अंशू का आरोप है कि महिला कल्याण निगम ने नियमों को ताक पर रखकर यह ठेका दिया। यही नहीं छांव फाउंडेशन के माध्यम से शीरोज कैफे में काम करने वाली एसिड अटैक सर्वाइवर्स ने टेंंडर प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि निगम के अधिकारियों ने शीरोज कैफे के संचालक के लिए टेंडर के नियमों को ताक पर रख कर प्राइवेट फर्म लोटस हास्पिटैलिटी को जिम्मेदारी सौंपी दी। यही नही टेंडर खुलने से पहले ही शीरोज कैफे पर कब्जा जमाने का प्रयास किया गया।
महिलाओं को समाज में जिस बर्ताव और हिंसा का सामना करना पड़ता है उसका एक भयानक रूप एसिड हमला है। अगर समाज कुछ करने को तैयार न हो तो भविष्य अपने हाथों में लेना ही सही रास्ता है। कुछ ऐसी ही कहानी है शीरोज कैफे में काम करने वाली एसिड अटैक सर्वाइवर्स की, जो समाज में अपने अस्तित्व की लड़ाई आज भी लड़ रही हैं। शीरोज कैफे में काम करने वाली छांव फाउंडेशन की लड़कियों का मनोबल टूट रहा है। सर्वाइवर्स के प्रोजेक्ट को दिये जाने वाले 54 लाख के बजट को रोका दिया गया और संस्था की ओर से दर्जनों पत्र भेजने के बाद भी कोई जवाब नहीं मिला। पिछले दो वर्षों में कर्माचारियों की तनख्वाह छह से नौ महीने के विलंब से दी जा रही थीं। ऐसे न जाने कितने दंश एसिड अटैक सर्वाइवर्स को झेलने पड़े।
पिछले दो साल तक शीरोज कैफे को ऊंचाई तक पहुंचाने के बाद अब दूसरी संस्था को शीरोज कैफे संचालन की जिम्मेदारी सौंपी दी गई। वह भी नियम कायदे को ताक पर रख कर। संस्था के सदस्यों का कहना है कि टेंडर खुलने से पहले ही लोटस संस्था के प्रतिनिधि कैफे में आकर काम करने वाले सर्वाइवर्स को प्रलोभन देने लगे। ऐसे में सवाल उठता है जब टेंडर ही नहीं खुला था तो उन्हें कैसे पता चला कि टेंडर उन्हें मिल रहा है। हालांकि इन आरोपों को लेकर यूूूपी महिला कल्याण निगम का दावा है कि फाउंडेशन ने अग्रिम धनराशि का ड्राफ्ट नहीं जमा किया था। बाकी तीन ने जमा किया इसलिए उनमें से उपयुक्तको आंवटन कर दिया गया। छांव फाउंडेशन का कहना है कि लोटस कंपनी के कर्मचारी हर रोज कैफे पर आकर इसे खाली कराने और सर्वाइवर्स को निगम के अधिकारियों की धमकी देकर कंपनी के साथ कार्य करने के लिये बाध्य कर रहे हैं। इससे सभी लड़कियों का मनोबल टूटा हुआ है और हमारी नौकरियां तथा पुनर्वास की अन्य योजनाएं बंद होने की ओर कगार पर हैं। बता दें कि प्रदेश में सपा सरकार के समय शीरोज हैंगआउट कैफे वर्ष 2016 में राजधानी के गोमतीनगर में खोला गया था। यह आगरा में संचालित कैफे की तर्ज पर खोला था। उस समय दो साल का कॉन्ट्रैक्ट छांव फाउंडेशन के साथ हुआ था। इसमें 12 सर्वाइवर्स काम करती हैं, जिनका वेतन महिला कल्याण निगम की ओर से दिया जाता है। छांव फाउंडेशन के निदेशक आलोक दीक्षित का कहना है कि टेंडर के फॉर्म में यह शर्तें थीं कि जिस संस्था ने एसिड अटैक सर्वाइवर्स के साथ काम किया हो,जिसे उनकी सर्जरी आदि की जानकारी हो और उनका इलाज करने वाले हॉस्पिटल आदि से संपर्क हो, उसी संस्था को टेंडर दिया जाए। संचालक का कहना है कि सारे सर्वाइवर्स हमारे साथ हैं। उनका कहना है कि वे हमारे ही साथ काम करना चाहते हैं इसलिए अगर दूसरी संस्था को शीरोज का संचालन दिया गया तो सभी सर्वाइवर्स कैफे छोड़ देंगे। आलोक का आरोप है कि महिला कल्याण निगम काफी दिनों से यहां काम करने वाले सर्वाइवर्स को समय से वेतन भी नहीं दे रहा था। शीरोज हैंगआउट की कैंपेनर और एसिड अटैक सर्वाइवर अंशू ने कहा कि वह शीरोज हैंगआउट से एसिड अटैक कर्मियों की सेवाएं समाप्त करने का हर स्तर पर विरोध करेंगी। अंशु का आरोप है कि महिला कल्याण निगम के अधिकारियों ने अपने करीबियों को फायदा पहुंचाने के लिये ऐसा किया।

देश- विदेश में सराहा गया छांव फाउंडेशन के कार्यों को

शीरोज हैंगआउट को साल 2016 में भारत सरकार द्वारा राष्ट्रपति के हाथों नारी शक्ति सम्मान मिल चुका है। दुनिया भर में तमाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से इसे नवाजा जा चुका है। छांव फाउंडेशन के कार्यों को अमेरिका की प्रथम महिला मिशेल ओबामा द्वारा भी सम्मानित किया गया है। फाउंडेशन को सीएनएन इंडियन ऑफ द इयर, जर्मन मीडिया डायचे वैले का बीओबीएस अवार्ड, राष्ट्रीय महिला आयोग के अवार्ड समेत तमाम विश्वसनीय संस्थानों द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। बावजूद इसके इस प्रोजेक्ट को अनजान प्राइवेट फर्म को देने से सर्वाइवर्स का मनोबल गिरा है।

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