भाजपा का रथ रोकने के लिए बसपा के साथ को बेकरार कांग्रेस, गठबंधन की पक रही खिचड़ी

  • शीर्ष नेताओं के बीच चल रहा है बातचीत का दौर सीटों पर अभी नहीं हुआ फैसला
  • मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में साथ पर राजस्थान में अकेले चुनाव लडऩा चाहती है कांग्रेस
  • लोकसभा चुनाव से पहले सियासी जमीन तैयार कर रही पार्टी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। भाजपा का रथ रोकने के लिए वह बसपा से गठबंधन की तैयारी कर रही है। दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व में कई दौर की बातचीत हो चुकी है। फिलहाल राज्यों में होने वाले चुनाव में सीटों और गठबंधन को लेकर पेंच फंसा है। हालांकि कांग्रेस आलाकमान को उम्मीद है कि यदि बसपा का साथ उसे मिल गया तो कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए वह मुश्किल खड़ी करने में कामयाब हो जाएगी। दूसरी ओर बसपा प्रमुख मायावती भी पार्टी का विस्तार करने में जुटी हैं। कर्नाटक चुनाव में बसपा का खाता खुलने से वे काफी उत्साहित हैं। बसपा प्रमुख कांग्रेस से गठबंधन के पहले राजनीतिक नफा-नुकसान को पूरी तरह तोल रही हैं। यदि दोनों दलों में गठबंधन हो जाता है तो न केवल मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के विधानसभा चुनाव बल्कि लोकसभा चुनाव में भी भाजपा को कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
लोकसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आता जा रहा है, कांग्रेस आलाकमान अपनी चालें चल रहे हैं। कांग्रेस को बसपा प्रमुख से कुछ ज्यादा उम्मीदें हैं। कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमार स्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में मायावती और सोनिया गांधी की मुलाकात भी हो चुकी है। दोनों की नजदीकियों से यह कयास लगाया जाने लगा था कि आने वाले दिनों में कांग्रेस और बसपा एक साथ चुनाव लड़ सकती है। कांग्रेस की चालों से भी पता चल रहा है कि वह बसपा का साथ पाने के लिए बेकरार है। यह बेकरारी यूं ही नहीं है। दरअसल, कांग्रेस की नजर बसपा के दलित वोट बैंक पर है। कांग्रेस के दिग्गजों को लगता है कि यदि बसपा ने कांग्रेस का साथ दिया तो वह न केवल मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में होने वाले विधानसभा चुनाव में बाजी पलट सकती है बल्कि लोकसभा चुनाव के दौरान यूपी में भी भाजपा के लिए चुनौती पेश कर सकती हैं। हालांकि इसमें एक पेंच अभी भी फंस रहा है। बसपा प्रमुख किसी राज्य में नहीं बल्कि सभी राज्यों में कांग्रेस से गठबंधन करना चाहती हैं। अन्यथा वे अकेले चुनाव लडऩे की बात कह चुकी हैं। दरअसल, कांग्रेस मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बसपा का सहयोग चाहती है लेकिन राजस्थान में वह अकेले दम पर चुनाव लडऩा चाहती है। कांग्रेस के दिग्गजों का मानना है कि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के दलित वोटों से बड़ा अंतर पैदा हो सकता है। इसके सहारे वह दोनों राज्यों में लगातार 15 साल से चली आ रही भाजपा सरकार को सत्ता से हटा सकती है। इसके विपरीत राजस्थान एक ऐसा राज्य है जहां कांग्रेस अपने दम पर सत्ता में आ सकती है। पिछले कई चुनावों से सूबे की राजनीतिक तासीर ही ऐसी है कि यहां सत्ताधारी दल का चुनाव में फिर जीतकर आना बेहद कठिन रहा है। राजस्थान में भाजपा की सरकार है और कांग्रेस को इस चुनाव में वापसी की उम्मीद है। कांग्रेस ने तीनों राज्यों में गठबंधन की बसपा की मांग पर गंभीरता से विचार कर रही है। इस मामले में कई दौर की बातचीत हो चुकी है। हालांकि अभी सीटों को लेकर तस्वीर अभी साफ नहीं हुई है। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि यह समस्या जल्द हल हो जाएगी। कांग्रेस के वरिष्ठï नेताओं को उम्मीद है कि जल्द ही विधानसभा और लोकसभा दोनों को लेकर गठबंधन हो जाएगा। इसका फायदा कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में भी हो सकता है। यूपी में कांग्रेस की सियासी जमीन लगभग समाप्त हो चुकी है। ऐसे में बसपा के साथ मिलकर वह यहां अपनी सियासी जमीन मजबूत कर सकती है।

राफेल विमान सौदा समेत कई मुद्दों को धार दे रही कांग्रेस

लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस भाजपा के खिलाफ राफेल विमान सौदा समेत कई मुद्दों को धार दे रही है। नोटबंदी और जीएसटी को भी मुद्दा बनाया जाएगा। इसके लिए कांग्रेस ने अभी से रणनीति तैयार कर ली है। कांग्रेस जल्द ही गांव-गांव जाकर लोगों के बीच केंद्र और राज्य सरकार की विफलता का पर्दाफाश करेगी। इसके लिए आलाकमान की ओर से जल्द ही निर्देश जारी होंगे।

 

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