जिद… सच की- ढहते फ्लाईओवर भ्रष्टïाचार और तंत्र

सवाल यह है कि करोड़ों की लागत से बनाए जा रहे फ्लाईओवर अचानक भरभराकर क्यों गिर रहे हैं? क्या मोटी कमाई के चक्कर में कंपनियां और ठेकदार फ्लाईओवर की गुणवत्ता के साथ खेल कर रहे हैं? निर्माण के दौरान गुणवत्ता की निगरानी क्यों नहीं की जाती है? घटना के बाद ही सरकारी तंत्र क्यों सक्रिय होता है? क्या भ्रष्टïाचारियों के भीतर से कार्रवाई का डर समाप्त हो चुका है?

Sanjay Sharma

पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस के बाद अब बस्ती में एक निर्माणाधीन फ्लाईओवर ढह गया। मलबे की चपेट में आकर तीन मजदूर घायल हो गए। घटना की जांच उच्चस्तरीय तकनीकी टीम करेगी। अहम सवाल यह है कि करोड़ों की लागत से बनाए जा रहे फ्लाईओवर अचानक भरभराकर क्यों गिर रहे हैं? क्या मोटी कमाई के चक्कर में कंपनियां और ठेकदार फ्लाईओवर की गुणवत्ता के साथ खेल कर रहे हैं? निर्माण के दौरान गुणवत्ता की निगरानी क्यों नहीं की जाती है? घटना के बाद ही सरकारी तंत्र क्यों सक्रिय होता है? क्या भ्रष्टïाचारियों के भीतर से कार्रवाई का डर समाप्त हो चुका है? क्या संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर देने से नुकसान की भरपाई हो जाएगी? क्या ऐसे हादसे प्रदेश के विकास को पीछे की ओर नहीं ढकेल रहे हैं? क्या निर्माण कार्यों को लेकर सरकार को नए सिरे से सोचने की जरूरत है?
राष्ट्रीय राजमार्ग 28 पर नगर थाना क्षेत्र के फुटहिया चौराहे पर दो साल से फ्लाईओवर का निर्माण कराया जा रहा था। साठ फीसदी काम पूरा हो चुका था और ताजा हादसा शटरिंग खोलने के दौरान हुआ। सडक़ परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इसके निर्माण का ठेका हैदराबाद की कंपनी केएमसी लिमिटेड को दिया था। यह ठेका 397 करोड़ का था। इस कम्पनी ने लखनऊ की कंपनी विजय कांस्ट्रक्शन प्रा.लिमिटेड को फ्लाईओवर का ठेका दिया था। इस हादसे के पहले 15 मई को बनारस में एक फ्लाईओवर धराशायी हो गया था। हादसे में करीब डेढ़ दर्जन लोगों की मौतें हो गई थीं। इस हादसे को लेकर योगी सरकार ने सख्ती दिखाई थी। हादसे के लिए सेतु निगम को जिम्मेदार माना गया था और इसके कई अफसरों पर कार्रवाई की गाज गिरी थी। सात इंजीनियरों और एक ठेकेदार को गिरफ्तार किया गया था। हैरानी की बात यह है कि कड़ी कार्रवाई के बावजूद ठेकदार और कंपनियों पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। वे मजबूती के मानकों को दरकिनार कर दोनों हाथों से पैसा लूट रहे हैं। बस्ती में हुआ हादसा इस बात की ताकीद करता है कि फ्लाईओवर भ्रष्टïाचार की भेंट चढ़ गया। यदि गुणवत्तापूर्ण तरीके से इसका निर्माण होता तो यह ढहता नहीं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकारी विभागों में भ्रष्टïाचार कहां तक पहुंच चुका है। यही वजह है कि निर्माणाधीन फ्लाईओवर के गुणवत्ता की जांच तक की जहमत नहीं उठाई गई। सरकार यदि निर्माणाधीन फ्लाईओवर, सडक़ें और सरकारी इमारतों को सही सलामत देखना चाहती है तो उसे इसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करनी होगी। गुणवत्ता की सतत निगरानी की व्यवस्था होनी चाहिए। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही विभागों में व्याप्त भ्रष्टïाचार को भी समाप्त करना होगा।

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