अपनी सरकार में भी पार्षदों की नहीं हो रही सुनवाई, खुद उठानी पड़ रही नाले की सिल्ट

  • सफाई कर्मचारियों के वेतन पर नगर निगम खर्च कर रहा करोड़ों रुपये, शहर में गंदगी का अंबार
  • जनप्रतिनिधियों से उठ रहा जनता का भरोसा

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। नगर निगम में सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। सफाई कर्मचारियों को हर माह करोड़ों रुपये वेतन देने के बावजूद शहर की सडक़ों और गलियों पर गंदगी का अंबार लगा है। नगर निगम में जनप्रतिनिधियों की सुनवाई तक नहीं हो रही है। लिहाजा पार्षद खुद नालों की सिल्ट सफाई कर रहे हैं। यह हाल विपक्ष के नहीं बल्कि प्रदेश की कमान संभालने वाली भाजपा सरकार के पार्षदों का है। बड़ा सवाल यह है कि सफाई कर्मचारी कहां हैं?
भाजपा पार्षद मुकेश सिंह मोंटी ने नगर निगम के अफसरों को सडक़ पर जमा सिल्ट उठाने के लिए दर्जनों बार चिट्ठियां लिखीं। नाले की सिल्ट हटवाने के लिए अफसरों से कई बार कहा। यही नहीं लोक मंगल दिवस में भी शिकायत की, लेकिन जब अफसरों ने ध्यान नहीं दिया तो भाजपा पार्षद खुद फावड़ा लेकर नाले की सिल्ट उठाने में जुट गए। सिल्ट निकाल कर ठेले पर रखवाई और खाली मैदान में फेंकवा दी। मामले की जानकारी जब नगर निगम के अफसरों को हुई तो उनके होश उड़ गए। आनन-फानन में कर्मचारी व गाडिय़ां भेजी। तब तक आधी सडक़ साफ हो चुकी थी। मौलवीगंज वार्ड के पार्षद ने बताया कि क्षेत्र में नाले की सफाई नहीं हुई थी तो उसकी सफाई कराई गई लेकिन सिल्ट नहीं उठी थी। सिल्ट उठाने के लिए कई बार अफसरों ने अधीनस्थ कर्मचारियों को निर्देश दिए लेकिन कर्मचारियों ने सिल्ट नहीं उठाई तो खुद फावड़ा उठाना पड़ा। बता दें कि यह कोई पहला मामला नहीं है जब पार्षदों ने यह आरोप लगाया हो कि उनकी सुनवाई नगर निगम में नहीं हो रही है। सफाई व्यवस्था से लेकर मार्ग प्रकाश व्यवस्था तक के लिए दर्जनों शिकायतें पार्षदों की द्वारा की जाती हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती है। वहीं अयोध्यादास द्वितीय की पार्षद कुमकुम राजपूत ने अपने क्षेत्र में खराब स्ट्रीट लाइटों को लेकर नगर निगम में गुहार लगाई लेकिन सुनवाई नहीं हुई। ऐसी ही शिकायतें अन्य पार्षदों की भी हंै।

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