इंस्पेक्टर ने खोला राज, कैसे एसएसपी और एडीजी पैसे लेकर कर रहे है ं तैनाती, सच बोलने की सजा दी गयी इंस्पेक्टर को, किया गया सस्पेंड

  • इंस्पेक्टर डिबाई परशुराम ने चैट में पचास हजार देकर तबादला कराने का किया दावा
  • कहा, एडीजी कार्यालय के बाबू के जरिए होता है खेल
  • चैट के वायरल होने से पुलिस महकमे में हडक़ंप सकते में महकमे के उच्चाधिकारी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस में भ्रष्टïाचार चरम पर है। यहां बड़े अधिकारी पैसा लेकर थानों का चार्ज और मनचाही तैनाती दे रहे हैं। इसका खुलासा पुलिस महकमे के एक इंस्पेक्टर ने किया है। जब इस राज से पर्दा हटा तो इंस्पेक्टर को सच बोलने की सजा दी गई। डिबाई में तैनात इस इंस्पेक्टर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
मामला तब गर्म हुआ जब पुलिस महकमे के उच्चाधिकारियों पर पैसे लेकर तैनाती करने की चैट सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। बुलंदशहर के डिबाई इंस्पेक्टर परशुराम ने सोशल मीडिया पर एक व्यक्ति से चैटिंग की थी। चैट में एडीजी पर पैसा लेकर तबादला करने का आरोप लगाया गया है। परशुराम की ओर से चैट में दावा किया गया है कि उन्होंने 50 हजार रुपये देकर अपना तबादला गौतमबुद्धनगर से बुलंदशहर कराया लिया है। चैट में एडीजी कार्यालय में तैनात बाबू का रोल अहम बताया गया है। चैट के मुताबिक यह बाबू 50 हजार रुपये का लिफाफा लेते हैं और आसानी से तबादला करा देते हैं। चैट करने वाले के हैरानी जताने पर इंस्पेक्टर कहते हैं भाई, यह योगी सरकार है। यहां हर जगह पैसा चल रहा है। डिबाई इंस्पेक्टर परशुराम ने एसएसपी केबी सिंह पर भी आरोप लगाया है। चैट में कहा गया है कि एसएसपी ने तीन लाख रुपये लेकर थाने का चार्ज देने की बात कही। चैट के वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में हडक़ंप मच गया है। हालांकि अब थानाध्यक्ष डिबाई परशुराम आरोपों को निराधार बता रहे हैं। दूसरी ओर एडीजी मेरठ जोन प्रशांत कुमार का कहना है कि इस चैट से मेरा कोई मतलब नहीं है। उनका कहना है कि वायरल चैट में न तो जोन और न ही एडीजी का नाम लिखा है। ऐसे में इससे उनका कोई संबंध नहीं है। दूसरी ओर एसएसपी बुलंदशहर केबी सिंह इसे किसी साइबर अपराधी की साजिश बता रहे हैं। सोशल मीडिया में वायरल चैट को लेकर पुलिस अपनी इज्जत बचाने की कोशिश कर रही है। इस मामले में डिबाई इंस्पेक्टर परशुराम को निलंबित कर दिया गया है।

डिबाई इंस्पेक्टर परशुराम ने एसएसपी केबी सिंह पर भी आरोप लगाया है। चैट में कहा गया है कि एसएसपी ने तीन लाख रुपये लेकर थाने का चार्ज देने की बात कही। चैट के वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में हडक़ंप मच गया है।

राहुल को विदेशी बताने पर माया ने बसपा उपाध्यक्ष जयप्रकाश को पार्टी से निकाला

  • कहा, प्रतिद्वंद्वी दलों के नेतृत्व के खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणी बसपा की विचारधारा नहीं

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। बसपा सम्मेलन में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ बयान देना पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयप्रकाश सिंह को महंगा पड़ गया। बसपा प्रमुख मायावती ने जयप्रकाश सिंह को आज पार्टी के सभी पदों से हटा दिया है। जयप्रकाश राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के साथ राष्ट्रीय कोऑर्डीनेटर भी थे।
मायावती ने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और कोऑर्डीनेटर जयप्रकाश सिंह ने लखनऊ में आयोजित सम्मेलन में बसपा की विचारधारा के खिलाफ बात की और प्रतिद्वंद्वी दल के नेतृत्व के खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणी की। उनको तत्काल प्रभाव से सभी पद से हटा दिया गया है। बसपा अनुशासित पार्टी है। हम किसी पर बेवजह टिप्पणी नहीं करते हैं। उन्होंने कहा कि जयप्रकाश सिंह का बयान बसपा का बयान नहीं है। उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में भी जब तक पार्टी के साथ गठबंधन की घोषणा नहीं की जाती है, पार्टी के सदस्यों को किसी भी स्तर पर गठबंधन के बारे में कुछ भी बोलने से बचना चाहिए। पार्टी के सदस्यों को यह सब काम पार्टी के हाईकमान के जिम्मे छोड़ देना चाहिए। गौरतलब है कि जयप्रकाश सिंह ने कल लखनऊ में पार्टी के कार्यकर्ता सम्मेलन में कहा था कि मां सोनिया गांधी के विदेशी मूल के होने के चलते राहुल गांधी देश के प्रधानमंत्री नहीं बन सकते हैं। इसके साथ ही अगले साल होने जा रहे आम चुनाव के लिए बसपा ने इस सम्मेलन में पार्टी अध्यक्ष मायावती को प्रधानमंत्री उम्मीदवार के तौर पर प्रोजेक्ट किया। जयप्रकाश सिंह ने कहा था कि कर्नाटक में एचडी कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बनाने में मायावती की महत्वपूर्ण भूमिका थी। इसके बाद वह पावरफुल पॉलिटिशियन के तौर पर उभरी हैं। वही भाजपा और नरेंद्र मोदी को टक्कर दे सकती हैं।

सीएम के प्रेस नोट ने उजागर कर दी रेप पीडि़ता की पहचान

  • सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ा रहे अफसर
  • संभल और प्रतापगढ़ के एसपी को निलंबित करने के प्रेस नोट में दिया गया पीडि़ता का नाम

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रेस नोट में रेप पीडि़ता की पहचान उजागर कर दी गई। बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर संभल और प्रतापगढ़ के एसपी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई के आदेश में रेप पीडि़ता के नाम का जिक्र किया गया है जबकि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि किसी भी कीमत पर रेप पीडि़ता का नाम सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।
पिछले दिनों संभल में एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी कि आराम सिंह समेत पांच लोगों ने उसकी पत्नी के साथ तमंचे के बल पर बलात्कार किया और बाद में उसे जिंदा जला दिया। इस मामले में सीएम योगी आदित्यनाथ ने संभल के एसपी राधे मोहन भारद्वाज को निलंबित करने का आदेश जारी किया था। वहीं प्रतापगढ़ के कुड़ा थाना क्षेत्र में एक किशोरी ने छेड़छाड़ से आजिज आकर फांसी लगा ली थी। सीएम ने प्रतापगढ़ के एसपी संतोष कुमार सिंह -1 को निलंबित कर दिया था। इसकी सूचना मुख्यमंत्री के प्रेस नोट द्वारा मीडिया को जारी की गई थी।

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