सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर सीवर सफाई कर्मियों की जान से खिलवाड़ कर रहा जल संस्थान

  • करोड़ों के बजट के बावजूद नहीं की जा रही कोई व्यवस्था
  • कोर्ट के आदेशों का भी नहीं किया जा रहा है पालन

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। जल संस्थान महकमा सीवर सफाई करने वाले सफाई कर्मियों को लेकर सजग नहीं है। पिछले कई सालों में सीवर सफाई के दौरान सैकड़ों की संख्या सफाई कमियों की मौत हो चुकी है। सीवर सफाई के नाम पर हर साल जल संस्थान करोड़ों का बजट खर्च करता है लेकिन विभाग में आधे से ज्यादा रजिस्टर्ड ठेकेदार सफाई कर्मियों से बिना सुरक्षा उपकरण काम करा रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश है कि सीवर सफाई करने वाले कर्मचारियों को आधुनिक उपकरण दिए जाएं, लेकिन इस आदेश का पालन नहीं हो रहा है। गैस मास्क में गैस नहीं भराई जाती है। सीवर सफाई के लिए हर साल पांच करोड़ का बजट आता है और 55 ठेकेदार सफाई कार्य कराते हैं। बावजूद इसके जलकल महकमे की तरफ से सीवर सफाई में सुरक्षा मानकों की अनदेखी हो रही है। मैन होल खोलकर सफाई कर्मचारियों को उसमें उतार दिया जाता है अगर सीवर लाइन में गैस होती है तो सफाई कर्मचारी उसकी चपेट में आकर कुछ क्षण में ही दम तोड़ देता हैं। छह साल पहले विक्रमादित्य मार्ग पर सीवर सफाई में तीन मजदूर मर गए थे। वर्ष 2016 में ऐसा ही हादसा जानकीपुरम में हुआ था, जहां एक कर्मचारी की सफाई के दौरान मौत हो गई थी। हकीकत में सीवर सफाई के नाम पर कर्मचारियों के साथ संवेदनहीनता बरती जाती है। दिहाड़ी के सफाई कर्मचारियों को बिना सुरक्षा उपकरण के मैन होल में उतार दिया जाता है।

मीथेन होती है जानलेवा

सीवर लाइनों में मीथेन गैस होती है जिससे दम घुटने लगता है। सीवर सफाई के दौरान पिछले कुछ महीनों में 64 सफाई कर्मी दम तोड़ चुके हैं। इसमें 38 सफाई कर्मियों के परिजनों को 245.71 लाख का मुआवजा दिया गया है।

क्या है मानक

नियमानुसार सफाई के लिए सीवर में उतरने वाले सफाई कर्मी के कमर में रस्सी बंधी होनी चाहिए, जिससे जरूरत पडऩे पर उसे खींचा जा सके। चैंबर का ढक्कन दो-ढाई घंटे पहले खोल देना चाहिए, जिससे गैस निकल जाए। इसके बाद उसमें चार-पांच बाल्टी पानी डालना चाहिए, जिससे गैस का असर कम हो जाए।

 

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