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शिक्षा निदेशालय में रिक्त पद को भरने में जुटी सरकार, नामों पर हो रही चर्चा
लखनऊ (4पीएम न्यूज़ नेटवर्क)। प्रदेश सरकार शिक्षा विभाग में खाली पदों को भरने को लेकर काफी सक्रिय दिख रही है। शिक्षकों की तैनाती का मामला हो या निदेशालय में निदेशकों की तैनाती का मुद्दा सरकार सुलझाने में जुटी है। शिक्षा विभाग में निदेशक का एक पद रिक्त है, उस पद पर चयन के लिए गुरुवार को मुख्य सचिव डॉ.अनूप चंद्र पांडेय की अध्यक्षता में विभागीय प्रोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक हुई। वहीं शिक्षा विभाग में अपर निदेशक के छह रिक्त पदों पर चयन के लिए भी डीपीसी के समक्ष चर्चा की गई। इस दौरान निदेशक पद के लिए शिक्षा विभाग के चार अपर निदेशकों के नामों पर चर्चा हुई। इनमें अपर निदेशक (पत्राचार) कीर्ति गौतम, अपर निदेशक बेसिक शिक्षा रूबी सिंह, सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद नीना श्रीवास्तव और संयुक्त सचिव बेसिक शिक्षा ममता श्रीवास्तव के नाम शामिल हैं।

सूबे के सभी जिलों में घोषित होंगे साइलेंस जोन, जिलाधिकारियों से मांगे गये प्रस्ताव
लखनऊ (4पीएम न्यूज़ नेटवर्क)। प्रदेश सरकार स्कूल, अस्पताल व न्यायालयों के पास साइलेंस जोन घोषित करने जा रही है। इसके लिए सरकार ने सभी जिलाधिकारियों से प्रस्ताव मांगे हैं। सरकार की अधिसूचना के बाद साइलेंस जोन के 100 मीटर दायरे में ध्वनि प्रदूषण करने पर सीधे जेल जाना पड़ सकता है। प्रदेश में प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम 2000 लागू हैं। इसके बावजूद प्रदेश में एक भी क्षेत्र को साइलेंस जोन घोषित नहीं किया है। यह नियम केवल कागजों पर चल रहा है। इस हीलाहवाली के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका मोतीलाल यादव बनाम राज्य सरकार व अन्य चल रही है। इसमें ध्वनि नियम 2000 को पूर्णतया लागू करवाने की अपील हाईकोर्ट से की गई है। इस मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को है। इसे देखते हुए सरकार हरकत में आ गई है। ध्वनि नियम में जिलाधिकारियों को प्राधिकारी घोषित किया गया है। इसलिए सरकार ने सभी जिलाधिकारियों से अपने-अपने यहां के स्कूल, अस्पताल व न्यायालयों के पास साइलेंस जोन घोषित करने के लिए प्रस्ताव मांगे हैं। डीएम के प्रस्ताव आने के बाद सरकार इन क्षेत्रों को साइलेंस जोन में अधिसूचित करेगी। इसके बाद शांत क्षेत्र में मानक से अधिक ध्वनि प्रदूषण करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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