जिद… सच की- भारत-दक्षिण कोरिया के मजबूत होते रिश्ते और भविष्य

सवाल यह है कि दक्षिण कोरिया से मजबूत होते संबंधों का भारत की अर्थव्यवस्था और इसके विकास की गति पर क्या और कितना असर पड़ेगा? क्या दोनों देशों के संबंध मेक इन इंडिया की मुहिम को परवान चढ़ाने में सफल होंगे? क्या स्मार्ट सिटी के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी दक्षिण कोरिया भारत की मदद करेगा? दक्षिण कोरिया से मधुर होते रिश्तों का वैश्विक कूटनीति पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

Sanjay Sharma

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन और पीएम नरेंद्र मोदी ने नोएडा में सैमसंग प्लांट का उद्घाटन कर दोनों देशों के संबंधों को और मजबूती दी। इसमें दक्षिण कोरिया की नई दक्षिण नीति और भारत की एक्ट ईस्ट नीति का संगम दिखा। यह यूनिट दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल फैक्ट्री है और इससे हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। सवाल यह है कि दक्षिण कोरिया से मजबूत होते संबंधों का भारत की अर्थव्यवस्था और इसके विकास की गति पर क्या और कितना असर पड़ेगा? क्या दोनों देशों के संबंध मेक इन इंडिया की मुहिम को परवान चढ़ाने में सफल होंगे? क्या स्मार्ट सिटी के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी दक्षिण कोरिया भारत की मदद करेगा? दक्षिण कोरिया से मधुर होते रिश्तों का वैश्विक कूटनीति पर क्या प्रभाव पड़ेगा? क्या दोनों देशों के संबंधों से निकट भविष्य में कोरियाई प्रायद्वीप में परमाणु निरस्त्रीकरण के सपने को साकार किया जा सकेगा? क्या ये संबंध एशिया में शांति और समृद्धि का रास्ता प्रशस्त कर सकेंगे?
दक्षिण कोरिया और भारत के संबंध मधुर रहे हैं। दोनों देश हर मौके पर एक-दूसरे के साथ खड़ रहे हैं। भारत ने जब से एक्ट ईस्ट नीति के तहत एशियायी देशों पर फोकस करना शुरू किया है, स्थितियां बेहतर होती जा रही हैं। वहीं हाल में दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया के बीच सार्थक संवाद के बाद कोरियाई प्रायद्वीप में हालात बदले हैं। इसी के मद्देनजर दक्षिण कोरिया के राष्टï्रपति मून जे इन ने नई दक्षिण नीति का एजेंडा शुरू किया है। इस नीति का आधार थ्री पी यानी पीपुल, प्रॉसपेरिटी और पीस है। इसी नीति के आधार पर दक्षिण कोरिया भारत के साथ अपने संबंध मजबूत कर रहा है। इनसे दोनों देशों को फायदा होगा। दक्षिण कोरिया के पास उन्नत तकनीक, विशेषज्ञ और पूंजी है जबकि भारत के पास बहुत बड़ा बाज़ार और प्रचुर मात्रा में कच्चा माल है। इसके अलावा यहां मानव संसाधन भी सस्ता है। यही वजह है कि भारत में दक्षिण कोरिया की 500 से ज्यादा कंपनियां हैं। पिछले तीन सालों में दोनों देशों के व्यापार में 17 से 20 अरब डॉलर की वृद्धि हुई। दोनों ने इसे 40 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। भारत चाहता है कि दक्षिण कोरिया डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया और स्टार्ट अप इंडिया में उसका सहयोग करे। भारत हमेशा बातचीत के जरिए कोरियाई प्रायद्वीप के परमाणु निरस्त्रीकरण की वकालत करता रहा है। दोनों देशों ने अपने संबंधों को विशेष रणनीतिक साझेदारी में बदल दिया है। बावजूद इसके दक्षिण कोरिया को भारत में अधिक से अधिक निवेश के लिए प्रोत्साहित करने के लिए सरकार को यहां का बुनियादी ढांचा सही करना होगा। साथ ही कागजी कार्रवाई को सरल बनाना होगा। इससे दोनों देशों को आर्थिक और कूटनीतिक फायदा होगा।

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