मिशन 2019: अनुप्रिया के सहारे पिछड़ों को साधने की रणनीति बना रही भाजपा

  • सपा-बसपा दोस्ती को देखते हुए भाजपा के दिग्गजों ने चली चाल
  • अपना दल प्रमुख अनुप्रिया की पटेल वोटों पर है मजबूत पकड़
  • विधानसभा चुनाव में आठ सीटों पर अपना दल ने किया था कब्जा
  • यूपी में करीब 35त्न पिछड़ी जातियां हैं, जिसमें 13त्न यादव और 12त्न कुर्मी हैं

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के ताजा राजनीतिक हालात को देखते हुए भाजपा पूरी तरह सतर्क हो चुकी है। सपा-बसपा की दोस्ती और पिछले लोकसभा व विधानसभा उपचुनाव में शिकस्त खाने के बाद भाजपा के दिग्गज अभी से चालें चलने लगे हैं। भाजपा के रणनीतिकार अमित शाह की नजर यूपी पर लगी है। भाजपा दलितों के साथ पिछड़ों को साधने में जुट गई है। मिशन 2019 में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने पिछड़ों को साधने के लिए अपने सहयोगी दल अपना दल का सहारा लेने की रणनीति तैयार की है। पार्टी यूपी में अपना दल प्रमुख अनुप्रिया पटेल को पिछड़ा चेहरा बनाने जा रही है। भाजपा को उम्मीद है कि अनुप्रिया को आगे कर पिछड़े वोटों को पार्टी के पक्ष में किया जा सकता है। 2017 के विधानसभा चुनाव में अपना दल ने शानदार प्रदर्शन किया था और यूपी की आठ सीटों पर कब्जा किया था। सपा-बसपा को टक्कर देने के लिए भाजपा ने अपनी रणनीति बदल दी है। भाजपा ने इसके लिए अपने सहयोगी दल अपना दल की राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल को उत्तर प्रदेश में एनडीए का पिछड़ा चेहरा के तौर पर पेश करने की तैयारी कर रही है। यूपी में करीब 35 प्रतिशत पिछड़ी जातियां हैं, जिसमें 13 प्रतिशत यादव और 12 प्रतिशत कुर्मी हैं। ऐसे में भाजपा अनुप्रिया पटेल के जरिए इन जातियों के वोटों को अपनी ओर खिचने की कोशिश कर रही है। वैसे पिछड़े वोट बैंक पर सपा की मजबूत पकड़ है। इसके तहत भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने चार और पांच जुलाई को यूपी में चुनावी रणनीति तैयार की। शाह ने यहां कार्यकर्ताओं को जीत का मंत्र दिया। भाजपा के रणनीतिकार शाह ने मिर्जापुर के विंध्याचल और आगरा में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारियां करने के साथ ही जीत के लिए नयी रणनीति पर विचार-विमर्श किया। वहीं अपना दल की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल को यूपी में एनडीए का पिछड़ा वर्ग के चेहरे के तौर पर पेश किया है। इसे गठबंधन की काट के साथ पिछड़े वर्ग को भाजपा की ओर खींचने की कोशिश माना जा रहा है। यह भाजपा की बड़ी चुनावी रणनीति का हिस्सा है।
अनुप्रिया पटेल अपना दल की अध्यक्ष हैं और वह 2014 के लोकसभा चुनाव में मिर्जापुर से सांसद चुनी गईं। उसके बाद केंद्र की एनडीए गवर्नमेंट में उन्हें केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री बनाया गया। 2017 में हुए यूपी विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी अपना दल ने शानदार प्रदर्शन किया। अपना दल को आठ सीटें मिली थीं। अपना दल एनडीए का हिस्सा है। ऐसे में अनुप्रिया पटेल को यूपी में एनडीए का
पिछड़ी जाति का चेहरा पेश करना भाजपा की सोची समझी रणनीति है।

अनुप्रिया पटेल अपना दल की अध्यक्ष हैं और वह 2014 के लोकसभा चुनाव में मिर्जापुर से सांसद चुनी गईं। उसके बाद केंद्र की एनडीए सरकार में उन्हें केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री बनाया गया। 2017 में हुए यूपी विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी अपना दल ने शानदार प्रदर्शन किया।

महिला वोट भी होंगे प्रभावित

अनुप्रिया पटेल युवा महिला सांसद हैं। महिला होने के कारण महिलाओं का वोट भी उनकी तरफ खिंचेगा। वह तेजतर्रार नेता हैं और भाजपा चाहती है कि यूपी में अनुप्रिया पटेल के जरिए पिछड़ी जातियों का वोट एनडीए की तरफ आकर्षित किया जाए।

यूपी में जातीय समीकरण

यूपी में जातीय समीकरण उत्तर प्रदेश में पिछड़ी जाति का करीब 25 प्रतिशत वोट है, जिसमें 13 प्रतिशत यादव, 12 प्रतिशत कुर्मी और 10 प्रतिशत में अन्य पिछड़ी जातियां शामिल हैं। अनुप्रिया पटेल जिस जाति से आती हैं उस जाति का यूपी में वोट 12 प्रतिशत है। अगर 12 प्रतिशत कुर्मी वोट भाजपा ने अपने पाले में कर लिए तो कई सीटों पर वह जीत दर्ज कर सकती हैं।

 

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