जिद… सच की- बढ़ते महिला अपराध पुलिस और समाज

अहम सवाल यह है कि महिला अपराध बढऩे की वजहें क्या हैं? क्या बदलता समाज और सामंती सोच इसके लिए जिम्मेदार है? क्या पुलिस की लापरवाही ने अपराधियों के हौसले बुलंद कर दिए हैं? क्या ग्लोबल गांव में तब्दील हो चुकी दुनिया महिला अपराधों को प्राकारांतर से बढ़ाने में भूमिका निभा रही है? क्या भारतीय समाज कुंठा का शिकार हो चुका है?

Sanjay Sharma

महिला सुरक्षा के तमाम दावों के बावजूद प्रदेश में महिलाओं के प्रति अपराधों का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। आए दिन हत्या, बलात्कार, अपहरण और छेड़छाड़ की वारदातें हो रही हैं। बच्चियां तक सुरक्षित नहीं हैं। वहीं ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने में पुलिस तंत्र पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है। अहम सवाल यह है कि महिला अपराध बढऩे की वजहें क्या हैं? क्या बदलता समाज और पुरुषवादी सोच इसके लिए जिम्मेदार है? क्या पुलिस की लापरवाही ने अपराधियों के हौसले बुलंद कर दिए हैं? क्या ग्लोबल गांव में तब्दील हो चुकी दुनिया महिला अपराधों को प्राकारांतर से बढ़ाने में भूमिका निभा रही है? क्या भारतीय समाज कुंठा का शिकार हो चुका है? क्या सिनेमा और पोर्न साइटों ने ऐसे सामाजिक अपराधों को हवा दी है?
प्रदेश में महिला अपराधों का बढ़ता ग्राफ चिंतित कर रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में रोजाना आठ महिलाएं बलात्कार का शिकार हो रही है और तीस से अधिक महिलाओं का अपहरण हो रहा है। महिलाओं के खिलाफ अपराध की प्रदेश में रोजाना सौ से ज्यादा एफआईआर दर्ज हो रही है। पिछले वर्ष की तुलना में इस साल महिलाओं के खिलाफ हुए अपराधों में 24 फीसदी की वृद्धि हुई है। इनमें वे घटनाएं शामिल नहीं है जिन्हें पुलिस रिकार्ड में दर्ज नहीं किया गया है। बढ़ते महिला अपराधों का कोई एक कारण नहीं है। आधुनिकीकरण ने समाज का ढांचा और सोच बदल दी है। हर व्यक्ति इंटरनेट के जरिए ग्लोबल हो चुका है। इंटरनेट का दुरुपयोग बढ़ा है। पोर्न साइटों ने महिला अपराधों को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। पुरुषवादी मानसिकता का सबसे घिनौना रूप बलात्कार के रूप में सामने आ रहा है। कठोर कानून के बावजूद आज भी दहेज प्रथा जारी है। पर्याप्त दहेज न मिलने पर महिला का उत्पीडऩ किया जाता है और कई बार उसकी हत्या तक कर दी जाती है। बच्चियों तक के साथ घिनौनी हरकतें की जा रही हैं। मनोचिकित्सक ऐसे अपराधों को मानिसक कुंठा का परिणाम मानते हैं। साफ है समाज गर्त की ओर जा रहा है। वहीं पुलिस की लापरवाही ने अपराधियों के हौसले बुलंद कर दिए हैं। कई बार पुलिस बलात्कार का केस दर्ज करने में आनाकानी करती है। वह आरोपी को बचाने और मामले को रफा-दफा करने का दबाव पीडि़ता पर बनाती है। कोर्ट में केस वर्षों लंबित हैं और कई बार अपराधी को सजा तक नहीं मिलती है। इन अपराधों को तभी रोका जा सकेगा जब पुलिस पूरी ईमानदारी से अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी और उसे अंजाम तक पहुंचाएगी। पोर्न साइटों पर प्रतिबंध लगाने की भी जरूरत है क्योंकि ये कई बार अपराध में उत्प्रेरक का काम करती हैं। समाज को भी अपनी मानसिकता में बदलनी होगी। समाज को यह बात समझनी होगी कि महिलाओं को सम्मान दिए बिना देश को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।

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