जिद… सच की, जानलेवा अग्निकांड और लचर तंत्र

संजय शर्मा

सवाल यह है कि राजधानी में बढ़ते अग्निकांडों की वजह क्या है और यह क्यों जानलेवा होते जा रहे हैं? क्या होटल और अन्य सार्वजनिक बिल्डिंगों में आग से बचाव के सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है? क्या यह सारा खेल फायर सेफ्टी विभाग और होटल संचालकों की मिलीभगत से चल रहा है? क्या आग से सुरक्षा के पर्याप्त इंतजामों की मौके पर जांच के बिना एनओसी जारी किए जा रहे हैं?

राजधानी के चारबाग क्षेत्र में दो होटलों में लगी भीषण आग ने एक मासूम समेत 6 लोगों की जान ले ली। कई गंभीर रूप से झुलस गए। पुलिस ने संचालकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। राज्य सरकार ने भी इस पूरे मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। हालांकि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आग लगने के कारणों का पता चल सकेगा बावजूद कुछ सवाल अपनी जगह बरकरार हैं। अहम सवाल यह है कि राजधानी में बढ़ते अग्निकांडों की वजह क्या है और यह क्यों जानलेवा होते जा रहे हैं? क्या होटल और अन्य सार्वजनिक बिल्डिंगों में आग से बचाव के सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है? क्या यह सारा खेल फायर सेफ्टी विभाग और होटल संचालकों की मिलीभगत से चल रहा है? क्या आग से सुरक्षा के पर्याप्त इंतजामों की मौके पर जांच के बिना एनओसी जारी किए जा रहे हैं? आखिर कब तक लोग अग्निकांडों की भेंट चढ़ते रहेंगे? क्या सरकार इस पर नियंत्रण के लिए कोई ठोस कदम उठाएगी या फिर जांच के बाद मामला एक बार फिर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
राजधानी के तमाम सरकारी और गैरसरकारी बिल्ंिडगों में आग के सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ रही हैं। अस्पताल, होटल समेत अधिकांश बिल्ंिडगों में आग से बचाव की पुख्ता व्यवस्था नहीं है। यह स्थिति तब है जब फायर सेफ्टी विभाग इन संस्थानों को एनओसी देता है। चारबाग क्षेत्र में दर्जनों की संख्या में छोटे से लेकर बड़े होटल संचालित हैं। इनका संचालक तमाम मानकों को दरकिनार कर किया जा रहा है। अधिकांश होटलों में आग लगने की घटना को ध्यान में रखकर बचाव की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है। होटल संचालक फायर सेफ्टी विभाग से साठगांठ कर एनओसी हासिल कर लेते हैं। ऐसा नहीं है कि केवल होटलों में ही सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। यहां के तमाम अस्पतालों का भी यही हाल है। पिछले दिनों राजधानी के ट्रामा सेंटर में आग लगने से कई लोगों की मौत हो गई थी। बावजूद फायर सेफ्टी विभाग और प्रशासन सक्रिय नहीं हुआ। अधिकांश स्थानों पर फायर फायटिंग यंत्रों को नहीं लगाया गया है। जहां ये लगे भी हैं वे एक्सपायरी हो चुके हैं। इसके अलावा आग लगने की स्थिति में इनको संचालित करने की जानकारी तक कर्मचारियों को नहीं होती है। यदि सरकार अग्निकांडों से लोगों को बचाना चाहती है तो वह संबंधित विभागों की जवाबदेही तय करे। साथ ही लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की व्यवस्था करे। इसके अलावा नियमित रूप से सार्वजनिक बिल्ंिडगों के निरीक्षण की व्यवस्था भी की जानी चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया गया तो अग्निकांडों को जानलेवा बनने से रोका नहीं जा सकेगा।

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