सैकड़ों पार्कों पर भारी पड़ रही नगर निगम की अनदेखी, अधिकांश की बिगड़ चुकी सूरत

  • आज तक नहीं बनी पार्कों को संवारने की ठोस कार्ययोजना
  • उद्यान और इंजीनियरिंग विभाग में तालमेल नहीं होने से घट रही हरियाली
  • सीमित संसाधनों का रोना रो रहे हैं नगर निगम के अफसर

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। राजधानी के सैकड़ों पार्क बदहाली का शिकार हो चुके हैं। नगर निगम की लापरवाही के कारण इनकी सूरत बिगड़ चुकी है। उद्यान और इंजीनियरिंग विभाग के बीच तालमेल के अभाव के कारण इन पार्कों की हरियाली घटती जा रही है। दूसरी ओर नगर निगम के अफसर कम बजट और सीमित संसाधनों का रोना रो रहे हैं।
शहर में नगर निगम के हजारों पार्कों की स्थिति खस्ताहाल है। बजट और सीमित संसाधनों के अभाव में पाक विकसित नहीं हो पा रहे हैं। इसके कारण शहरवासी शुद्ध हवा और प्राकृतिक वातावरण से वंचित हैं। कुछ पॉश इलाकों को छोड़े दें तो अधिकांश क्षेत्रों में बच्चों के खेलने और मॉर्निंग वाक के लिए कोई पार्क नहीं हैं। बावजूद इसके नगर निगम बदहाल पार्कों को संवारने में लापरवाही बरत रहा है।
शहर में नगर निगम के पास वर्तमान समय में 1657 पार्क हंै। इनमें से 935 पार्क बदहाल पड़े हैं। इसके अलावा अभी लखनऊ विकास प्राधिकरण की ओर से नगर निगम को रखरखाव के लिए 86 पार्क अलग से मिले हैं। पिछले कई सालों से नगर निगम ने पार्कों को संवारने में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई है। इसके पीछे अफसर सीमित संसाधनों और बजट के अभाव का रोना रोते हैं। निगम के उद्यान और इंजीनियरिंग विभाग के बीच तालमेल नहीं होने के कारण पार्क में हरियाली घट रही है। उद्यान विभाग का दावा है कि उनके पास लाखों की संख्या में पौधरोपण का लक्ष्य है लेकिन अविकसित और अर्धविकसित पार्कों में पौधरोपण नहीं किया जा सकता है। इन पार्कों में न तो सुरक्षा के लिए बाउंड्रीवाल है न पेड़ों को पानी देने के लिए सबमर्सिबल पंप ही लगे हैं। ऐसे में उद्यान विभाग अकेले पार्कों को नहीं संवार सकता। दूसरी ओर नगर निगम के अभियंत्रण विभाग का कहना है कि उनके पास पार्कों की सुरक्षा दीवार, जागिंग ट्रैक, सबमर्सिबल पंप समेत अन्य विकास कार्यों के लिए जरूरी बजट नहीं है, जिसके चलते शहर में हरियाली नहीं हो पा रही है। नगर निगम के अफसरों ने बताया कि पिछले महीने शासन को बदहाल पड़े पार्कों की रिपोर्ट भेजी गई है।

पार्कों में न तो सुरक्षा के लिए बाउंड्रीवाल हैं न ही पेड़ों को पानी देने के लिए सबमर्सिबल पंप ही लगे हैं। दूसरी ओर नगर निगम के अभियंत्रण विभाग का कहना है कि उनके पास पार्कों की सुरक्षा दीवार, जागिंग ट्रैक, सबमर्सिबल पंप समेत अन्य विकास कार्यों के लिए जरूरी बजट नहीं है, जिसके चलते शहर में हरियाली नहीं हो पा रही है।

रिपोर्ट से खुलासा

शासन ने नगर निगम से सफाई व्यवस्था, शिक्षा, चिकित्सा और स्वास्थ्य के लिए कितने संसाधन है, इसकी जानकारी तलब की थी। इस रिपोर्ट में बदहाल पार्कों की जानकारी भी दी गई थी। रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि नगर निगम के आधे से ज्यादा पार्क बदहाली के शिकार हैं।

एलडीए से मिले 86 पार्कों पर फोकस

नगर निगम इस साल एलडीए से मिले 86 पार्कों को संवारने में जुटा है। पार्कों को संवारने के लिए एलडीए की ओर से नगर निगम को 2 करोड़ की धनराशि देने की बात कही गई है। इसके तहत एक करोड़ रुपया एलडीए ने नगर निगम को ट्रांसफर भी कर दिया है। नगर निगम ने इन पार्कों की बाउंड्री वाल, गेट, सबमर्सिबल पंप समेत अन्य काम कराने का फैसला लिया है। इसके बाद पार्कों में पेड़ पौधे लगाए जाएंगे।

 

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