मोदी ने ढूंढा नौकरशाही पर लगाम लगाने का तरीका

ललित गर्ग

 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नया भारत निर्मित करना चाहते हैं, इसके लिये देश के प्रशासनिक क्षेत्र को सशक्त बनाने एवं नौकरशाही को दक्ष, प्रभावी एवं कार्यकारी बनाने की तीव्र आवश्यकता है। नौकरशाही को प्रभावी, सक्षम एवं कार्यक्षम बनाने और उसमें नए तौर-तरीकों को समाहित करने के इरादे से संयुक्त सचिव पद के स्तर पर निजी क्षेत्र के दक्ष, विशेषज्ञ पेशेवर लोगों को नियुक्त करने का फैसला एक नई पहल है, जिसका स्वागत किया जाना चाहिए। एक अर्से से यह महसूस किया जा रहा था कि नौकरशाही में ऐसे प्रतिभाशाली पेशेवर लोगों का प्रवेश होना चाहिए जो अपने-अपने क्षेत्र में विशेष योग्यता के साथ अनुभव से भी प्रतिभाशाली और दक्ष हों।
सवाल उठता है कि इतने ऊंचे वेतन एवं साधन-सुविधाओं के बावजूद भारत सरकार एवं राज्य सरकार के उच्च पदों पर योग्य एवं प्रतिभाशाली व्यक्तियों का चयन क्यों नहीं होता? आरक्षण के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेंकने वाले राजनीतिक दल यह संभव नहीं होने देते। मोदी सरकार ने यह साहस किया है तो निश्चित ही भारत की तस्वीर बदलेगी। यह एक नयी एवं अभिनव शुरुआत है। भले ही प्रारंभ में दस पदों के लिए आवेदन मांगे गए हैं। उम्मीद यह भी की जाती है कि वे पेशेवर इस अवसर का लाभ उठाने के लिए आगे आएंगे जिनके पास अनुभव के साथ विशेष योग्यता है और जो देश एवं समाज के लिए कुछ कर दिखाना चाहते हैं। इन्हीं लोगों के बल पर नया भारत निर्मित हो सकेगा।
राजनीतिक जागृति के साथ प्रशासनिक जागृति का अभियान वर्तमान की बड़ी जरूरत है। नौकरशाहों पर नकेल कसना एवं उन्हें अपनी जिम्मेदारियों के लिये प्रतिबद्ध करना भी जरूरी है। कभी-कभी ऊंचा उठने और भौतिक उपलब्धियों की महत्वाकांक्षा राष्ट्र को यह सोचने-समझने का मौका ही नहीं देती कि कुछ पाने के लिए उसने कितना खो दिया? और जब यह सोचने का मौका मिलता है तब पता चलता है कि वक्त बहुत आगे निकल गया और तब राष्ट्र अनिर्णय के ऊहापोह में दिग्भ्रमित हो जाता है।
जब भी कोई बड़ा परिवर्तन किया जाता है तो उसकी प्रतिक्रिया अवश्य होती है। संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी के तौर पर पेशेवर लोगों की भर्ती की इस पहल का यह कहते हुए विरोध किया जा रहा है कि सरकार तय प्रक्रिया का उल्लंघन कर रही है और वह पिछले दरवाजे से पसंदीदा लोगों को नौकरशाही में प्रवेश कराने का इरादा रखती है। यह स्पष्ट ही है कि ऐसे आलोचक इस तथ्य की जानबूझकर अनदेखी कर रहे हैं कि सरकार केवल पेशेवर एवं अनुभवी लोगों को ही संयुक्त सचिव स्तर पर नियुक्त करने जा रही है। देश में तमाम ऐसे पेशेवर हैं जिन्होंने आईएएस अधिकारियों से कहीं बेहतर काम कर दिखाया है। इस पहल को सरकार में वरिष्ठ पदों पर सीधी भर्ती के रूप में देखा जा रहा है। यह नौकरशाही में बड़े बदलाव की तैयारी है। इस नयी शुरुआत से उच्च पदों से आईएएस का वर्चस्व खत्म होगा। केंद्र सरकार को अपने 10 महत्वपूर्ण मंत्रालयों एवं क्षेत्रों जैसे राजस्व वित्तीय सेवा, आर्थिक मामले, कृषि, सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग, पोत परिवहन, पर्यावरण, नवीकरणीय ऊर्जा, नागरिक उड्डयन और वाणिज्य के क्षेत्र में विशेषज्ञता रखने वाले मेधावी और उत्साही लोगों की जरूरत है। संयुक्त सचिव स्तर पर अधिकारियों की कमी से जूझ रही केंद्र सरकार को इससे राहत मिलेगी। यह एक नया प्रयोग है जिससे भारत सरकार के उच्च प्रशासन की शक्ल को नया आकार मिलेगा।
इस नयी पहल से केंद्र सरकार की वे बड़ी परियोजनाएं जो समय से पीछे चल रही हैं, शीघ्रता से पूरी हो सकेंगी। आम तौर पर अब तक परियोजनाएं इसीलिए लंबित होती रही हैं, क्योंकि नौकरशाही उन्हें समय से पूरा करने के लिए आवश्यक इच्छाशक्ति का प्रदर्शन नहीं करती। आखिर नौकरीशाही की लापरवाही को राष्ट्र क्यों भुगते? अब इन नये नियुक्त नौकरशाहों के बलबूते से गिरते विकास एवं अधूरी पड़ी परियोजनाओं को गति देने में मदद मिल सकेगी, समस्याओं से ग्रस्त सामाजिक व राष्ट्रीय ढांचे को सुधार सकेंगे, तोडक़र नया बना सकेंगे।
इस नए प्रयोग के परिणाम कुछ भी हों, यह वक्त की मांग है कि शासन-प्रशासन में विषय विशेषज्ञ एवं अनुभवी लोगों की हिस्सेदारी बढ़े। आखिर जब शासन में ऐसे लोग भागीदार बन सकते हैं तो प्रशासन में क्यों नहीं बन सकते? यह नया प्रयोग इस जरूरत को भी रेखांकित कर रहा है कि मोदी सरकार को प्रशासनिक सुधार को अपने एजेंडे पर लेना चाहिए।

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