मौन का रहस्य

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

ट्रांसगोमती के एक वर्दीधारी साहब का कोई जवाब नहीं है। इन्होंने मौन का गहरा रहस्य समझ लिया है। घटनाएं चाहे जितनी गंभीर हो वे अपना मौन नहीं तोड़ते। इनके मौन के आगे बड़े से बड़े दिलेर भी पानी भरते हैं। आज तक किसी ने बिना उनकी इच्छा के एक वाक्य तक उनके मुखारबिंद से नहीं सुना है। बदमाश भी उनके मौन को देखकर कांप उठते हैं। पता नहीं बोल दिया तो उनका क्या होगा। सो बेचारे उनके मौन को वरदान से कम नहीं मानते हैं। सभी मनाते हैं कि साहब मौन धारण किए रहे। राज की बात यह है कि क्षेत्र के एकछत्र क्षेत्राधिकारी साहब को गुटखा खाने की जबरदस्त लत है। सो बोलने से परहेज करते हैं। गुटखे का मजा कौन किरकिरा करे।

घनचक्कर हुए साहब

लोगों की सेहत का जिम्मा उठाए साहब की सिट्टी-पिट्टी गुम है। न दिन को चैन है न रात को नींद आती है। आखिर अपने ही उनकी फजीहत कराने में जुट गए हैं। आए दिन कोई न कोई कांड कर देते हैं। वर्चस्व की जंग में बेचारे साहब पिस रहे हैं। समझ नहीं आ रहा है कि किस कुघड़ी में यहां की जिम्मेदारी संभालने के लिए हामी भरी थी। साहब रोगियों के इलाज की व्यवस्था करें या फिर इन लोगों की मारपीट को निपटाते फिरें। कई बार बैठाकर समझा लिया, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात रहा। पिछली बार तो लोगों ने हद ही कर दी। जमकर मार-पीट की। मरीजों को जीना मुहाल कर दिया। इनके चक्कर में बेचारे लोगों को जवाब देते-देते थक गए हैं। पता चला है कि साहब ने भविष्य में झगड़ा न हो इसके लिए नई कमेटी बनाई है। अब साहब को कौन समझाएं कि कमेटियों का इनके सहयोगियों पर कोई असर नहीं पड़़ेगा।

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