डोनाल्ड ट्रंप व किम जोंग की मुलाकात के निहितार्थ, जिद… सच की

Sanjay Sharma
अहम सवाल यह है कि अमेरिका पर परमाणु हमले की तैयारी कर रहे उत्तर कोरिया के तानाशाह किम ने अचानक इतना बड़ा फैसला क्यों लिया? क्या उत्तर कोरिया का यह फैसला चीन के आभामंडल से निकलने की छटपटाहट का नतीजा है? क्या उत्तर व दक्षिण कोरिया के साथ मिलकर अमेरिका चीन को घेरने की तैयारी कर रहा है? उत्तर कोरिया और अमेरिका की दोस्ती का भारत पर क्या असर पड़ेगा? 

आखिरकार उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन और अमेरिका के राष्टï्रपति डोनाल्ड टं्रप की मुलाकात हो ही गई। किम परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए राजी हो गए। अमेरिकी राष्टï्रपति ने किम की इस पहल का स्वागत किया। साथ ही उत्तर कोरिया के विकास में हर संभव मदद की पेशकश की। हालांकि अमेरिका ने साफ कर दिया कि उत्तर कोरिया पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने की कार्रवाई और मदद देने की शुरुआत तब होगी जब किम इसका प्रमाण देंगे कि उन्होंने परमाणु शस्त्रों को नष्टï कर दिया है। इस मुलाकात को दोनों देशों के रिश्तों में एक नये युग का प्रारंभ माना जा रहा है। अहम सवाल यह है कि अमेरिका पर परमाणु हमले की तैयारी कर रहे उत्तर कोरिया के तानाशाह किम ने अचानक इतना बड़ा फैसला क्यों लिया? क्या उत्तर कोरिया का यह फैसला चीन के आभामंडल से निकलने की छटपटाहट का नतीजा है? क्या उत्तर व दक्षिण कोरिया के साथ मिलकर अमेरिका चीन को घेरने की तैयारी कर रहा है? उत्तर कोरिया और अमेरिका की दोस्ती का भारत पर क्या असर पड़ेगा? क्या कोरियाई प्रायद्वीप की शांति भारत के लिए एक बड़े बाजार का द्वार खोल देगी?
हाल तक अमेरिका के खिलाफ परमाणु हमले की धमकी देने वाले उत्तर कोरिया के तानाशाह किम के भीतर यह बदलाव अचानक नहीं आया। उत्तर कोरिया चीन के प्रभाव से निकलने के लिए काफी दिनों से छटपटा रहा है। उत्तर कोरिया आर्थिक रूप से बहुत कुछ चीन पर निर्भर है। किम के क्रियाकलापों से भी चीन के प्रति बेरुखी दिखाई देती है। किम ने अपने अंकल जांग सॉन्ग थेक और अपने सौतेले भाई किम जोंग नाम को मारने का आदेश दिया था। दोनों ही चीन के करीबी थे। किम ने चीन से दूरी बनाए रखी और चीन के राष्टï्रपति शी जिनपिंग से एक बार भी मुलाकात नहीं की। चीन उत्तर कोरिया को अमेरिका के खिलाफ इस्तेमाल करता रहा है। अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच तनाव यहां तक बढ़ गया था कि दुनिया एक और विश्व युद्ध की आशंका से ग्रसित हो गई थी। चीन इस बात को अच्छी तरह समझता है कि यदि विश्वयुद्ध हुआ तो वह भी लपेटे में आएगा। लिहाजा चीनी राष्टï्रपति शी जिनपिंग ने किम जोंग उन से वार्ता की। इस वार्ता के बाद किम में बदलाव दिखने लगा। किम ने अमेरिकी राष्टï्रपति से मुलाकात की तैयारी की। अमेरिकी दोस्ती से उत्तर कोरिया को दोहरा फायदा होगा। पहला यह कि वह वैश्विक राजनीति में अछूत नहीं रहेगा दूसरे उसे अमेरिका से पर्याप्त आर्थिक मदद मिल सकेगी। इससे उसकी चीन पर निर्भरता खत्म जाएगी। भारत को भी इसका फायदा मिलेगा। उत्तर कोरिया भारत के लिए उभरता बाजार साबित हो सकता है, लेकिन यह दोस्ती चीन की चिंता का कारण बन सकती है।

Pin It