कुपोषण व एनीमिया से निपटने के लिए विशेष अभियान चलाएगी सरकार

  • योगी सरकार की कैबिनेट में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को दी गई मंजूरी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को लोक भवन में हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। यूपी में राज्य पोषण मिशन अब राष्ट्रीय पोषण मिशन के अंग के तौर पर काम करेगा। इसके तहत बच्चों में कुपोषण और किशोरियों में एनीमिया की समस्या से निपटने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस मद में राज्य सरकार ने 80.51 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसमें प्रशिक्षण और क्षमता वृद्धि, कम्युनिटी मोबिलाइजेशन एंड बिहेवियर चेंज कम्युनिकेशन, इनोवेशन, परफॉर्मेंस इन्सेंटिव और फ्लैक्सी कार्य शामिल हैं।

कैबिनेट बैठक में पुलिसकर्मियों की वैवाहिक स्थिति से संबंधित पुलिस नियमावली में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। संशोधन के मुताबिक कोई पुरुष या महिला कर्मी जिसने किसी ऐसे व्यक्ति या महिला से विवाह किया है जिसका पहले से पति या पत्नी जीवित है तो वह सेवा में नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगा। पहले यह बाध्यता सिर्फ कर्मचारी पर थी, लेकिन अब दोनों पक्षों (वर-वधू) को इसके लिए बाध्य कर दिया गया है।

वाराणसी में आरएएफ के लिए दी जाएगी जमीन

वाराणसी में सीआरपीएफ को रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) की नई वाहिनी के लिए वाराणसी सदर तहसील के ग्राम भंदहा कला में नागरिक उड्डयन विभाग की जमीन स्थानांतरित की जाएगी। इसके अलावा पीडब्ल्यूडी के अनुरोध पर 10वीं वाहिनी पीएसी बाराबंकी की 1.024 हेक्टेयर भूमि राष्ट्रीय राजमार्ग 28-सी के लिए निशुल्क हस्तांतरित की जाएगी। यह जमीन अधिशासी अभियंता के माध्यम से राष्ट्रपति के पक्ष में निशुल्क दी जाएगी। इस पर आने वाला खर्च केंद्रीय परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय वहन करेगा। इसके अलावा मुजफ्फरनगर-सहारनपुर स्टेट हाईवे-59 पर टोल टैक्स वसूली की अधिसूचना को कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी है। इस मार्ग पर उप्र. राज्य राजमार्ग नियमावली-2011 के अनुसार पथकर वसूली का प्रस्ताव कैबिनेट के सामने रखा था।

पुनरीक्षण में विभागों के अधिकार बढ़े

योगी सरकार की कैबिनेट ने निर्माण परियोजनाओं के रिवाइज इस्टीमेट (अनुमान) के मूल्यांकन व मंजूरी में प्रशासकीय विभागों के अधिकार बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। इससे निर्माण परियोजनाओं के काम तेजी से हो सकेंगे। दरअसल, शासन स्तर पर योजनाओं, परियोजनाओं के प्रस्तावों के मूल्यांकन, औचित्य के परीक्षण व लागत में पुनरीक्षण से जुड़ी कार्यवाही की प्रक्रिया तय है। इसमें पूर्व में स्वीकृत परियोजना की लागत में 50 फीसदी से अधिक वृद्धि होने पर इस्टीमेट पुनरीक्षण का प्रस्ताव सीधे प्रमुख सचिव वित्त की अध्यक्षता वाली व्यय वित्त समिति के पास आता है।

 

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