शंघाई सहयोग संगठन सम्मेलन का हासिल, जिद… सच की!

Sanjay Sharma

सवाल यह है कि इस सम्मेलन से भारत को क्या हासिल हुआ? क्या चीन और पाकिस्तान पर भारत की नसीहतों का कोई असर पड़ेगा? क्या वन बेल्ट, वन रोड की नीति पर चीन भारत की अखंडता और संप्रभुता की बात को स्वीकार करेगा? क्या आतंकवाद पर लगाम लगाने के लिए पाकिस्तान कोई ठोस पहल करेगा? क्या चीन और भारत के बीच नया कूटनीतिक समीकरण तैयार हो रहा है?

चीन के किंगदाओ शहर में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन के 18वें शिखर सम्मेलन में भारत की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिरकत की। भारत ने पहली बार इस सम्मेलन में पूर्णकालिक सदस्य के रूप में भाग लिया। हालांकि इस सम्मेलन से इतर भी भारतीय प्रधानमंत्री ने संगठन के सदस्य देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। पाकिस्तान के साथ कोई बैठक नहीं हुई। भारत ने इस बैठक में सदस्य देशों के सामने कुछ सवाल उठाए। कुछ नसीहतें दीं। इसके साथ क्षेत्रीय सहयोग का एक वैचारिक और व्यवहारिक खाका भी पेश किया। सवाल यह है कि इस सम्मेलन से भारत को क्या हासिल हुआ? क्या चीन और पाकिस्तान पर भारत की नसीहतों का कोई असर पड़ेगा? क्या वन बेल्ट, वन रोड नीति पर चीन भारत की अखंडता और संप्रभुता की बात को स्वीकार करेगा? क्या आतंकवाद पर लगाम लगाने के लिए पाकिस्तान कोई ठोस पहल करेगा? क्या चीन और भारत के बीच नया कूटनीतिक समीकरण तैयार हो रहा है? क्या एशिया में शांति बनाए रखने में भारत और चीन कामयाब रहेंगे?
शंघाई सहयोग संगठन सम्मेलन से भारत को बहुत कुछ हासिल नहीं होना था, न हुआ। हां, दोनों देशों के बीच दो अहम समझौते हुए। पहले समझौते के मुताबिक चीन ब्रह्मïपुत्र व सतलुज नदी की हाईड्रोलॉजिकल जानकारी भारत के साथ साझा करने पर राजी हो गया। दूसरे समझौते के मुताबिक अब चीन भारत को नॉन बासमती चावल भी निर्यात करेगा। पहला समझौते इसलिए अहम है क्योंकि ब्रह्मïपुत्र में बाढ़ आने पर हर साल अरबों का नुकसान होता है। साथ ही बहुत से लोगों की मौतें हो जाती हैं। जानकारी उपलब्ध होने से बाढ़ से बचाव की तैयारी की जा सकेगी। नॉन बासमती चावल निर्यात करने से चीन और भारत दोनों को लाभ होगा। भारत भी इसके जरिए नागरिकों को सस्ता चावल उपलब्ध करा सकेगा। सम्मेलन में भारत ने चीन की वन बेल्ट, वन रोड पॉलिसी पर सवाल उठाए। हालांकि चीन अपनी इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर भारत को साधने का प्रयास कर रहा है। भारत ने साफ कर दिया कि संपर्क परियोजनाओं को लागू करने से पहले देशों की संप्रभुत्ता और अखंडता का सम्मान होना चाहिए। भारत, पाक अधिकृत कश्मीर से गुजरने के कारण इसका विरोध कर रहा है। भारत ने आतंकवाद का भी मुद्दा उठाया। कई विवादों के बावजूद भारत-चीन के लिए यह नए युग की शुरुआत है। यही वजह है कि पीएम मोदी अप्रैल में अनौपचारिक दौरे पर चीन पहुंचे थे और राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी। कुल मिलाकर समिट अपने उद्देश्य में पूरी तरह भले सफल नहीं हुआ हो लेकिन इसने विभिन्न विचारधारा के देशों को एक मंच पर अपनी बात रखने का मौका दिया।

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