लोकसभा चुनाव: मोदी विरोधी रणनीति के जरिए अपना कद बढ़ाने में जुटीं मायावती

  • गठबंधन के साथी सपा को उपचुनाव में मिली सफलता से बसपा प्रमुख हैं उत्साहित
  • युवा नेताओं को सौंपी पार्टी काडर की जिम्मेदारी
  • महागठबंधन का नेतृत्व करने की कर रहीं तैयारी

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के बाद मायावती अपने आपको राष्ट्रीय नेता के तौर पर तैयार कर रही हैं और 2019 के लोकसभा चुनाव में महागठबंधन का नेतृत्व करने का मन बना रही हैं। मायावती ने यूपी के बाहर पैर जमाने भी शुरू कर दिए हैं और उन्हें सफलता भी मिल रही है। उनकी इस मजबूती में गठबंधन के अन्य दल भी उनका साथ देंगे। मसलन मध्यप्रदेश, राजस्थान में कांग्रेस से हाथ मिलाकर वे पांव जमाने की जुगत में हैं।

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। लोकसभा चुनाव से पहले बसपा प्रमुख मायावती पीएम नरेंद्र मोदी और भाजपा विरोधी रणनीति के जरिए राजनीति में अपना कद बढ़ाने में जुट गई हैं। उत्तर प्रदेश में हुए लोकसभा उपचुनाव परिणामों ने बसपा प्रमुख की महत्वाकांक्षा को पंख लगा दिए हैं। कर्नाटक विधानसभा चुनाव में पार्टी का खाता खुलने के बाद मायावती अन्य प्रदेशों में भी जनाधार को मजबूत करने में जुटी हैं। पार्टी काडर को मजबूती देने के लिए मायावती युवाओं को तरजीह दे रही हैं। माना जा रहा है कि मायावती इन सबके जरिए आगामी लोकसभा चुनाव में मोदी विरोधी गठबंधन का नेतृत्व हासिल करने की तैयारी कर रही हंै।

चुनावी बिसात में मायावती बड़ी सूझबूझ से आगे बढ़ रही हैं। उत्तर प्रदेश के 2007 में हुए विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी की धमाकेदार जीत हुई थी। तब राजनीति के जानकार यह मानने लगे थे कि मायावती भविष्य में देश की बागडोर संभाल सकती हैं। लेकिन अखिलेश यादव ने यूपी में ऐसी साइकिल दौड़ाई कि 2012 के विधानसभा चुनाव में बसपा को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। 2012 के विधानसभा, 2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव में हाथी बेदम हो गया। हाल में फूलपुर, गोरखपुर और कैराना लोकसभा उपचुनाव में बसपा के समर्थन से सपा और रालोद के उम्मीदवारों ने भाजपा को पटखनी दी है। इससे यूपी में मायावती का रूतबा एक बार फिर बढ़ गया है। इन सबके पीछे मायावती का अपना दलित वोट बैंक है। कांग्रेस, सपा के साथ अन्य छोटे दलों के मुकाबले बसपा के पास करीब 22 फीसदी दलित वोट है। 2014 के लोकसभा चुनाव में काफी कुछ दलित वोट भाजपा के पक्ष में चला गया था। इससे सतर्क मायावती ने अंदरखाने अपने कैडर को फिर से खड़ा किया। पार्टी से कई नेताओं को बाहर कर युवाओं के हाथों में पार्टी की बागडोर सौंपी। लिहाजा बसपा ने निकाय चुनाव में अन्य दलों के मुकाबले ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज की। इसके कारण राष्ट्रीय स्तर की पार्टी कांग्रेस के साथ-साथ सपा और रालोद जैसी क्षेत्रीय पार्टियों के भी समझ में यह बात आ गई है कि अगर भाजपा को हराना है तो बसपा का साथ जरूरी है। अपने इसी दबदबे के चलते मायावती 2019 में महागठबंधन का नेतृत्व करने के प्रयास में हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव के ताजा बयानों से साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में गठबंधन में सीटों का बंटवारा मायावती के हिसाब होगा। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मैनपुरी में कहा था कि वे मोदी को मात देने के लिए गठबंधन में कुछ कम सीटों पर समझौता कर सकते हैं।

हाल में फूलपुर, गोरखपुर और कैराना लोकसभा उपचुनाव में बसपा के समर्थन से सपा और रालोद के उम्मीदवारों ने भाजपा को पटखनी दी है। इससे यूपी में मायावती का रूतबा एक बार फिर बढ़ गया है।

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के बाद मायावती अपने आपको राष्ट्रीय नेता के तौर पर तैयार कर रही हैं और 2019 के लोकसभा चुनाव में महागठबंधन का नेतृत्व करने का मन बना रही हैं। मायावती ने यूपी के बाहर पैर जमाने भी शुरू कर दिए हैं और उन्हें सफलता भी मिल रही है। उनकी इस मजबूती में गठबंधन के अन्य दल भी उनका साथ देंगे। मसलन मध्यप्रदेश, राजस्थान में कांग्रेस से हाथ मिलाकर वे पांव जमाने की जुगत में हैं। कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर शीर्ष नेताओं के बीच बात भी हो रही है। हरियाणा में अभय चौटाला की इंडियन नेशनल लोकदल के साथ मायावती का गठबंधन पहले ही हो चुका है। इसी तरह बिहार, वेस्ट बंगाल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में भी गठबंधन के सहारे राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी को मजबूत करने की रणनीति बनाई जा रही है। बसपा नेताओं की मानें तो भाजपा के बाद सबसे ज्यादा वोट उनकी पार्टी के पास ही है। इसलिए मायावती ही महागठबंधन का नेतृत्व करेंगी। चुनाव के बाद सभी दल बैठकर पीएम पद के नाम का चयन करेंगे।

दूसरे राज्यों में भी बढ़ाए कदम

कर्नाटक और राजस्थान में बसपा प्रभारी अशोक सिद्धार्थ के मुताबिक मायावती ही एक ऐसा चेहरा हैं जिन्हें दलित से लेकर मुस्लिम और सवर्णों का समर्थन प्राप्त है। 2019 में मोदी को रोकने के लिए मायावती ही एक चेहरा हो सकती हैं। बसपा ही ऐसा दल है, जो देश के कई राज्यों में फैला है। कर्नाटक में पार्टी का एक विधायक जीता। साथ ही मध्य प्रदेश और राजस्थान विधानसभा चुनाव में बसपा अहम रोल निभाएगी। सिद्धार्थ के मुताबिक भाजपा और मोदी से समाज का हर तबका नाराज है। लिहाजा एक ऐसे सर्वमान्य नेता की जरुरत है जो मोदी का विकल्प बन सके। इसके अलावा उनका कहना है कि गठबंधन यूपी में ही नहीं अन्य राज्यों में भी होगा। जहां बसपा का कैडर पहले से ही मौजूद है। हम मध्य प्रदेश के चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ेंगे।

 

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