बारिश, जलभराव और व्यवस्था -जिद… सच की!

अहम सवाल यह है कि हर बार बारिश के समय शहर की जल निकासी व्यवस्था ध्वस्त क्यों हो जाती है? बारिश से पहले नाले और नालियों की सफाई के लिए सरकार द्वारा जारी करोड़ों रुपये कहां जा रहे हैं? क्या राजधानी में बेहतर जल निकासी व्यवस्था स्थापित करने में नगर निगम नाकाम साबित हो रहा है? क्या भ्रष्टïाचार के कारण पूरा
सिस्टम ध्वस्त हो गया है?

पिछले दिनों हुई बारिश ने शहर के जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। कई इलाकों में सडक़ों पर घुटनों तक पानी भर गया। बारिश के दौरान जब प्रदेश की राजधानी का यह हाल है तो अन्य शहरों का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। अहम सवाल यह है कि हर बार बारिश के समय शहर की जल निकासी व्यवस्था ध्वस्त क्यों हो जाती है? बारिश से पहले नाले और नालियों की सफाई के लिए सरकार द्वारा जारी करोड़ों रुपये कहां जा रहे हैं? क्या राजधानी में बेहतर जल निकासी व्यवस्था स्थापित करने में नगर निगम नाकाम साबित हो रहा है? क्या भ्रष्टïाचार के कारण पूरा सिस्टम ध्वस्त हो गया है? शहर की साफ-सफाई व्यवस्था को दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी निभा रहे नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी आखिर कर क्या रहे है? क्या इसी बिना पर राजधानी को स्मार्ट सिटी बनाने का सपना साकार किया जा सकेगा? क्या नगर निगम की लापरवाही पर सरकार कोई कड़ा कदम उठाएगी?
बारिश में पूरे प्रदेश की स्थिति खराब हो जाती है। लोगों का सडक़ों पर चलना दूभर हो जाता है। जलभराव की समस्या आम हो जाती है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ का भी कमोवेश यही हाल है। यहां के पाश इलाकों तक में जलभराव की समस्या उत्पन्न हो जाती है। निचले इलाकों में स्थिति बेहद खराब हो जाती है। फैजुल्लागंज, मडियांव, निशातगंज जैसे इलाकों में जलभराव पूरे बरसात रहता है। जलभराव के कारण संक्रामक रोगों का खतरा बना रहता है। एनेक्सी जैसे इलाके में भी बारिश के दौरान जलभराव की स्थिति बन जाती है जबकि इस क्षेत्र से वीवीआईपी लोगों का आना-जाना लगा रहता है। यह स्थिति तब है जब राजधानी में बारिश के पहले जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए करोड़ों का बजट सरकार नगर निगम को जारी करती है। बावजूद इसके स्थितियां सुधर नहीं रही है। अभी तक नाले और नालियों की सफाई नहीं कराई जा सकी है। कई इलाकों में नाले और नालियां चोक हैं। यह स्थिति तब है जब इसके लिए नगर निगम के पास भारी भरकम कर्मचारियों का अमला है। मेट्रो के निर्माण कार्य के चलते भी कई नाले ध्वस्त हो चुके हैं। लेकिन इसे लेकर नगर निगम गंभीर नहीं है। हकीकत यह है कि नगर निगम में फैले भ्रष्टïाचार के कारण सारी व्यवस्थाएं धराशायी हो चुकी है। सरकार यदि शहर की जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करना चाहती है तो उसे संबंधित विभागों की जवाबदेही तय करनी होगी। इन कार्यों की सतत निगरानी की व्यवस्था भी बनानी होगी। इसके अलावा लापरवाह अधिकारियों व कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी होगी। यदि ऐसा नहीं किया गया तो लखनऊ को स्मार्ट सिटी बनाने का सपना शायद ही कभी साकार हो पाएगा।

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