मोदी को मात देने के लिए कम सीटों पर भी गठबंधन जारी रखने के अखिलेश के दांव पर सियासत गर्मायी

  • यूपी में गठबंधन के लिए कम सीटों पर समझौता करने को तैयार सपा
  • परेशान भाजपा ने सपा पर साधा निशाना, कांग्रेस ने बताया दूरदर्शी कदम
  • आम आदमी पार्टी ने भी अखिलेश के रुख का किया समर्थन
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। आगामी लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी और भाजपा को मात देने के लिए सपा मुखिया अखिलेश यादव ने एक और दांव चला है। उन्होंने साफ कह दिया है कि गठबंधन के लिए वह त्याग करने को तैयार हैं। यदि गठबंधन के लिए उन्हें दो-चार सीटें कम पर भी समझौता करना पड़ेगा तो वे पीछे नहीं हटेंगे। सपा मुखिया के इस बयान के बाद प्रदेश की सियासत गर्म हो गई है। भाजपा ने इसको सपा की कमजोरी बताया है जबकि कांग्रेस ने अखिलेश के इस कदम को दूरदर्शी कदम बताया है।
लोकसभा चुनाव से पहले गठबंधन को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव सक्रिय हो गए हैं। बसपा-सपा गठबंधन को आगे ले जाने के लिए उन्होंने नरम रुख अपनाया है। मैनपुरी में अखिलेश यादव ने गठबंधन के लिए कोई भी त्याग करने की बात स्वीकार की है। गठबंधन को धरातल पर उतारने के लिए वे कम सीटों पर भी समझौता करने को तैयार हैं। यूपी में कुल 80 संसदीय सीटें हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन ने 73 सीटों पर जीत हासिल की थी। सपा को 5 और कांग्रेस को 2 सीटें मिली थी जबकि बसपा का खाता नहीं खुला था। वहीं यूपी विधानसभा चुनाव में सपा बसपा से ज्यादा सीटें जीतने में कामयाब रही थी। हालांकि इन चुनावों में दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ी थीं। दोनों पार्टियों में दोस्ती तब परवान चढ़ी जब फूलपुर-गोरखपुर सीट के लिए हुए लोकसभा उपचुनाव में सपा को बसपा ने समर्थन दिया। भाजपा को करारी हार मिली। इसके बाद दोनों पार्टियों के बीच रिश्ते मजबूत हुए। लिहाजा अखिलेश यादव बसपा का साथ छोडऩे को तैयार नहीं है। गौरतलब है कि मायावती ने गठबंधन के लिए सम्मानजनक सीटों की बात की थी। वहीं अखिलेश के इस दांव से भाजपा भौचक है। भाजपा का कहना है कि जूनियर पार्टनर बनकर अखिलेश ने पहले ही हार मान ली है। सपा यूपी में पहले नंबर दो की पार्टी थी और अब वह नंबर तीन हो जाएगी। दूसरी ओर अखिलेश यादव के बयान को कांग्रेस ने दूरदर्शिता वाला बताया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अखिलेश के बयान से यह संदेश मिलता है कि 2019 में हर हाल में महागठबंधन होकर रहेगा। गोरखपुर, फूलपुर के बाद कैराना और नूरपुर ने दिखा दिया है कि एकसाथ मिलकर भाजपा को परास्त किया जा सकता है। वहीं आम आदमी पार्टी ने भी अखिलेश के रुख का समर्थन किया है।

मुलायम सिंह यादव कई चुनाव हारे और जीते लेकिन कभी झुककर समझौता नहीं किया। बसपा प्रमुख मायावती ने भी कई विपरीत परिस्थितियों का सामना किया लेकिन कभी झुकी नहीं। अखिलेश यादव जिस तरह घुटने टेकने पर आमादा है इससे पता चलता है कि वे सेल्फ मेड लीडर नहीं है।
-शलभ त्रिपाठी
प्रवक्ता, भाजपा

हम लोग इसलिए एक नहीं हो रहे हैं कि सत्ता मिल जाए बल्कि इसलिए हो रहे हैं ताकि संविधान और देश की एकता और अखंडता को बचाया जा सके। अखिलेश यादव जी का बयान बहुत सकारात्मक और स्वागत योग्य है। उनका यह बयान उनकी राजनीतिक परिपक्वता का प्रतीक है ।
-प्रमोद तिवारी, कांग्रेस नेता

देश में भाजपा और मोदी की दंगाई राजनीति का हारना बेहद जरूरी है। धर्म और नफरत की राजनीति को किसी भी तरह देश से निकालकर बाहर फेंकना होगा और इसके लिए सभी दलों को मतभेद भुलाकर साथ आना होगा। अखिलेश सही कर रहे हैं और आम आदमी पार्टी उनके इस कदम का समर्थन करती है।
-वैभव माहेश्वरी, प्रवक्ता, आम आदमी पार्टी

4पीएम में अधिवक्ता प्रिंस लेनिन के घर तांडव मचाने वाले पुलिसकर्मियों की खबर छपने के बाद जागा पुलिस प्रशासन

  • आईजी सुजीत पांडे ने दिए जांच के आदेश, 48 घंटे में मांगी सीओ हजरतगंज से रिपोर्ट
  • हुसैनगंज थाने की सीसीटीवी फुटेज जब्त करने के आदेश
  • एनआरएचएम घोटाला, चकगंजरिया घोटाला जैसे दर्जनों मामलों पर प्रिंस की याचिका पर ही हुई थी कार्रवाई

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। देश के जाने-माने अधिवक्ता प्रिंस लेनिन के घर में घुसकर पुलिस ने गुंडागर्दी की थी। इस खबर को 4पीएम ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर छपने के बाद पुलिस प्रशासन जागा। आईजी सुजीत पांडे ने आज इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं। साथ सीओ हजरतगंज अभय मिश्रा से 48 घंटे के भीतर रिपोर्ट तलब की है। आईजी ने हुसैनगंज थाने की सीसीटीवी फुटेज जब्त करने के भी आदेश जारी किए है।

हुसैनगंज निवासी अधिवक्ता प्रिंस लेनिन के पिता शिवमोहन निगम ट्रस्ट में ट्रस्टी हैं। पिछले माह एक महिला व एक पुरुष ने खुद को परेशान बताते हुये ट्रस्ट में रहने की इजाजत मांगी। उनके पिता ने दोनों को रहने की इजाजत दे दी। बाद में पता चला कि महिला फ्राड है। इस पर श्री निगम ने औरत को कमरा खाली करने को कहा। इस पर महिला ने पुलिस को बुला लिया। पुलिस महानिरीक्षक को दिए गए शिकायती पत्र में कहा गया है 7 मई को कांस्टेबल कमलेश तिवारी और अन्य घर पहुंचे और अभद्रता की। बाद में दारोगा कौशलेंद्र यादव, सिपाही कमलेश तिवारी और दो अन्य सिपाहियों के साथ घर पर पहुंचे। यहां उनकी मां ऊषा देवी और बहन मिली। इन लोगों ने उनकी मां और बहन के साथ मारपीट की और बहन को लॉकप में बंद कर दिया। एसपी पूर्वी के हस्तक्षेप के बाद बहन को छोड़ा गया। प्रभारी कोतवाली आनंद प्रकाश शुक्ला ने मामले को रफा-दफा करने का दबाव बनाया था। 4पीएम में प्रकाशित होने के बाद पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। गौरतलब है कि एनआरएचएम, चकगंजरिया समेत कई घोटालों पर प्रिंस लेनिन की याचिका के बाद कार्रवाई हुई थी।

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