बजट के बावजूद पीजीआई नहीं कर रहा बच्चों के दिल का इलाज

  • राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत साल भर से कर रहे इलाज का इंतजार
  • बच्चों को दी जा रही तारीख पर तारीख, तीन बच्चों की होनी है सर्जरी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। सरकार के बड़े-बड़े दावों के बावजूद दिल की गंभीर बीमारी से पीडि़त तीन बच्चों को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत साल भर से इलाज के लिये इंतजार करना पड़ रहा है। उनको तारीख पर तारीख मिल रही है। पीजीआई में इन तीनों बच्चों की सर्जरी होनी है। इसके लिए सरकार ने संस्थान को 50 लाख का बजट भी दिया है। हालत यह है कि 2017-18 के पूरे सत्र में पीजीआई में कुल तीन मरीजों को रेफर किया गया था लेकिन उनकी भी सर्जरी नहीं की गई।

दिल की बीमारी से पीडि़त जो बच्चे सर्जरी के लिये पीजीआई में साल भर से इंतजार कर रहे हैं उनमें बाराबंकी के दिव्यांश त्रिपाठी (10), इलाहाबाद के प्रियांशु (9) व मोहनलालगंज के अर्जुन (साढ़े तीन साल) है। बाराबंकी के अरविंद त्रिपाठी खेती कर परिवार का पालन पोषण करते हैं। उनके बेटे दिव्यांश त्रिपाठी (10) को जन्म से दिल की बीमारी (कंजनाइटल हार्ट डिजीज) है। बच्चे के दिल का करीब 65 प्रतिशत वॉल्व सिकुड़ चुका है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत दिव्यांश का इलाज जून 2017 में शुरू किया गया था। पिता अरविंद ने बताया कि इलाज के लिए उन्हें पीजीआई भेजा गया था। पीजीआई में डॉक्टर ने उन्हें हार्ट सर्जरी की सलाह दी थी लेकिन पूरा एक साल बीतने के बाद अब भी सिर्फ अगली तारीख दी जा रही है। आखिरी बार उन्हें पीजीआई की ओर से एक मई 2018 की तारीख दी गई थी लेकिन उसके बाद विशेषज्ञ डॉ. नवीन गर्ग के छुट्टी पर जाने की बात कह कर फिर से एक अगस्त 2018 की तारीख दी गई है। पीजीआई के इस रवैए से अभिभावक परेशान हैं।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत गंभीर बच्चों को इलाज के लिए केजीएमयू या पीजीआई संस्थान भेजा जाता है। इनके इलाज का पूरा खर्च सरकार की ओर से दिया जाता है। 2017-18 के सत्र में पीजीआई व केजीएमयू दोनों ही संस्थानों को इस योजना के तहत 50-50 लाख का बजट दिया गया था।

डॉ. अजय राजा
एसीएमओ व नोडल अधिकारी राष्टï्रीय बाल स्वास्थ्य योजना

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