मंदसौर में मन का गुबार

डॉ दिलीप अग्निहोत्री

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को शिकायत है कि प्रधानमंत्री अपने मन की बात करते हैं, लेकिन दूसरे के मन की बात नहीं सुनते। इस आधार पर उन्होंने अपने को नरेंद्र मोदी से अलग दिखाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि वह अपने मन की बात नहीं करते, लोगों के मन की बात सुनते हैं। ये बात अलग है कि इसके बाद राहुल मंदसौर रैली में जम कर बोले। नरेंद्र मोदी, अमित शाह, अरुण जेटली एशिवराज सिंह चौहान किसी को नहीं छोड़ी। यदि राहुल की बात सच है कि मन की बात नहीं करते, तो इसे मन की भड़ास ही कहा जायेगा, क्योंकि रैलियों में यह संभव ही नहीं होता कि हजारों लोग बोले और नेता जी सुनते रहें। यदि कोई यह कहता है कि वह रैली में लोगों की बात सुनने आया है, तो इस पर यकीन नही किया जा सकता। कुछ बातों पर समर्थकों की हामी अवश्य भराई जा सकती है, लेकिन नेता को अपनी बात ही रखनी होती है। नि:सन्देह वादे राजनीति उत्साह का संचार करते है। पिछला रिकार्ड भले ही निराशाजनक रहा हो, लेकिन नए वादों में राजनेता कोई कंजूसी नहीं करते। राहुल ने भी मंदसौर में वादों की झड़ी लगा दी। वादों में कभी कोताही नहीं करनी चाहिए। राहुल गांधी ने इस तथ्य को तो समझ लिया, लेकिन वादों की विश्वसनीयता पर विचार नहीं किया। वास्तविकता यह है कि वह जो भी वादे करेंगे ए उसकी कसौटी यूपीए सरकार होगी। इतना ही नहीं तब राहुल गांधी के निर्वाचन क्षेत्र की भी बात चलेगी जहां जमीन अधिग्रण के बाबजूद फूड पार्क और साइकिल फैक्ट्री नहीं लगी। जबकि उस दौरान केंद्र में कांग्रेस और उत्तर प्रदेश में उनका समर्थन करने वाली बसपा एसपा सरकार थी। अब दावा यह कि कांग्रेस प्रत्येक शहर की मेक इन मोहर बनवा कर ही दम लेगी। मतलब यह कि राहुल प्रत्येक शहर में स्मार्ट फोन, जूस,कपड़े और चीन में बनने वाले सभी उत्पादों की फैक्ट्री लगवा देंगे। उन उत्पादों पर मेक इन के आगे उस शहर का नाम होगा। गनीमत है कि राहुल गांधी अभी तहसील ए ब्लाक और गांव के स्तर पर नहीं पहुंचे है। अन्यथा चमत्कार हो जाता। अब इसे मन की भड़ास न कहें तो क्या नाम दें।

कर्नाटक में में उनकी सरकार पांच साल चली एदुबारा भी बन गई । लेकिन राहुल ने यह नहीं बताया कि वहां कितने जिले मेक इन अभियान में शामिल हो गए। राहुल गांधी का मंदसौर भाषण भी दिलचस्प था। ऐसा लगा जैसे वह कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ मिलकर मध्यप्रदेश का कायाकल्प कर देंगे। मंदसौर में किसानों की कर्जमाफी होगी और मेड इन मंदसौर स्मार्ट फोन लोगों की जेब में होंगे। राहुल के भाषण में वैसे नया कुछ भी नहीं था। नरेंद्र मोदी पर वही पुराने आरोप दोहराए। जैसे नोटबंदी नीरव मोदी को धन देने के लिए की गई थी। मतलब लोगों का धन इकट्ठा कराया, फिर वही गठरी नीरव मोदी को दे दी और उसे विदेश भगा दिया। पन्द्रह पूंजीपतियों का लाखों करोड़ रुपये का कर्जा माफ कर दिया।

यह ठीक है कि वित्तमंत्री अरुण जेटली ने पूंजीपतियों की कर्जमाफी पर राहुल को चुनौती दी है। जेटली के दावा है कि किसी पूंजीपति का एक रुपया माफ नहीं किया गया। अरुण जेटली ने राहुल गांधी के मंदसौर भाषण का जबाब दिया है। उनका कहना है कि हर बार संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह जब मैं राहुल गांधी के विचारों को सुनता हूं तो खुद से कुछ सवाल करता हूं कि वह कितना जानते हैं, वह कब जानेंगे। मध्य प्रदेश के मंदसौर में उनके भाषण को सुनकर सवालों के जवाब के बारे में मेरी जिज्ञासा की पुष्टि हो गई। उन्होंने कहा कि क्या उन्हें अपर्याप्त जानकारी दी जा रही या फिर क्या वह तथ्यों को लेकर थोड़ा लापरवाह हैं। जेटली ने लिखा कि राहुल का प्रधानमंत्री पर पन्द्रह शीर्ष उद्योगपतियों का दो लाख लाख करोड़ से अधिक का कर्ज माफ करने का आरोप तथ्यहीन और पूरी तरह से गलत है। सरकार ने किसी भी उद्योगपति का एक भी पैसा माफ नहीं किया है। सच्चाई बिल्कुल अलग है। जिन्होंने बैंकों और अन्य कर्जदाताओं से कर्ज लिया है और चुकाया नहीं, उन्हें दिवालिया घोषित किया गया है। उन्हें प्रधानमंत्री मोदी की सरकार द्वारा लागू किए गए कानून के तहत कंपनियों से बेदखल कर दिया गया है। हकीकत यह है, ये कर्ज यूपीए सरकार के दौरान दिया गया था। राहुल यदि अपने को सही मानते है तो उन्हें जेटली की चुनौती स्वीकार करनी चाहिए। अन्यथा ऐसे आरोप लगाने से बचना चाहिए।

राहुल गांधी के भाषण का जबाब केवल जेटली ने ही नहीं दिया। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी पीछे नहीं रहे। उन्होंने आकड़ों के आधार पर बताया कि कांग्रेस ने किसानों की मूलभूत समस्याओं को दूर करने की दिशा में कारगर कदम नहीं उठाए थे। दस वर्ष के शासन में एक बार कर्जमाफी का ढिढोरा वह आज तक पीट रही है। दस वर्षों में उसने सात वर्षों तक कोई कर्जमाफी नहीं दी। अब उन्हें कर्ज की याद आ रही है।

भाजपा ने तथ्यों के आधार पर राहुल गांधी को घेरने का प्रयास किया। यह राहुल के लिए चुनौती की तरह था। लेकिन इनका जबाब देना आसान नही है। यूपीए सरकार के आधार पर राहुल के मंदसौर में किये गए दावों पर विश्वास नहीं किया जा सकता। भाजपा ने राहुल के सामने चार वर्ष की उपलब्धियों को चुनौती के रूप में पेश किया है। चार वर्षों में अभूतपूर्व कार्य हुए है। अठारह हजार गांवों में पहली बार बिजली पहुंची। चौतीस करोड़ लोगों ने पहली बार बैंक में खाता खुलवाया। चौतीस प्रतिशत के मुकाबले आज बयासी प्रतिशत लोगों के पास बैंक खाता है। पहली बार सत्रह करोड़ लोगों का रिकार्ड बना। पहले नौ प्रतिशत लोगों के पास बीमा था आज छब्बीस प्रतिशत लोगों के पास है। पहले प्रतिशत विद्यालयों में टॉयलेट थे आज सत प्रतिशत विद्यालयों में हैं। तीन करोड़ से अधिक परिवारों को एलपीजी कनेक्शन दिए गए। यूपीय सरकार में प्रतिदिन एक से दो किलोमीटर नई सडक़ बनती थी आज आठ किलोमीटर प्रतिदिन बनती है। यूपीए के समय में सेना के पास दो दिन युद्ध लडऩे का आयुध था आज सोलह दिन लडऩे का आयुध उपलब्ध है। नोटबन्दी और जीएसटी से आयकर दाताओं की संख्या में तीस प्रतिशत की बृद्धि हुई है। आयुष्मान भारत योजना के तहत लगभग पचास करोड़ गरीब लोगों को मुफ्त स्वास्थ्य बीमा देने का कार्य प्रगति पर है। तीन से अधिक करोड़ युवाओं को स्टार्टअप योजना के तहत कम इंटरेस्ट पर लोन देकर रोजगार के अवसर पैदा किये गए हैं। यह संयोग है कि भाजपा इस समय सरकार के चार वर्ष पूरे होने पर संपर्क अभियान चला रही है। उसके पास अपनी सरकार के चार और यूपीए के दस वर्षों का रिपोर्ट कार्ड है। इसमें यूपीए सरकार कहीं नहीं ठहरती। राहुल गांधी पता नहीं किस आधार पर सब्जबाग दिखा रहे है।

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