जिद… सच की

  • संवेदनशील रिश्ते को बदनाम होने से बचाएं

प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कर्मचारियों और डॉक्टरों के बीच विवाद के बाद की गई हड़ताल ने चार मरीजों की जान ले ली। जिन मरीजों को गंभीर अवस्था में तत्काल ट्रामा सेंटर के अंदर ले जाकर इलाज करना चाहिए था उन्हें ट्रामा में घुसने ही नहीं दिया। जब तक मौके पर मौजूद मीडियाकर्मियों और अन्य लोगों ने बच्ची को डॉक्टर तक पहुंचाया बहुत देर हो चुकी थी।

डॉक्टर को भगवान का रूप माना जाता है। गंभीर बीमारियों से पीडि़त व्यक्ति डॉक्टर के पास पहुंचकर और उन्हें अपनी सारी परेशानियां बताकर हर दुख और तकलीफ भूल जाता था। डॉक्टर और मरीज के बीच भगवान और इंसान जैसा यह रिश्ता अब धूमिल होने लगा है। डॉक्टरी पेशे पर बाजारीकरण हावी हो रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में ढेरों ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें मरीजों के साथ अभद्रता और डॉक्टरों की लापरवाही से मरीज की मौत हुई है। दिल्ली के मैक्स अस्पताल पर तो 30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है। वहीं मरीजों में भी सहनशीलता की कमी देखी जा रही है। इस कारण अस्पतालों में आए दिन हंगामे होते रहते हैं। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कर्मचारियों और डॉक्टरों के बीच विवाद के बाद की गई हड़ताल ने चार मरीजों की जान ले ली। जिन मरीजों को गंभीर अवस्था में तत्काल ट्रामा सेंटर के अंदर ले जाकर इलाज करना चाहिए था उन्हें ट्रामा में घुसने ही नहीं दिया। जब तक मौके पर मौजूद मीडियाकर्मियों और अन्य लोगों ने बच्ची को डॉक्टर तक पहुंचाया बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टर्स की लाख कोशिशों के बावजूद बच्ची को बचाया नहीं जा सका।
दरअसल अस्पतालों में मारपीट, तोडफ़ोड़ और हड़ताल की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। इससे अस्पताल की रेपुटेशन तो खराब होती ही है, मरीज की मौत होने का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या डॉक्टर और कर्मचारी, मरीज और तीमारदार से जुड़़ा कोई भी विवाद किसी की जान से बढक़र है ? क्या इमरजेंसी सेवाओं को ठप किए बिना अपनी मांगों को सरकार के सामने नहीं रखा जा सकता ? यदि अस्पताल प्रशासन या सरकार को पूर्व में ही हड़ताल की जानकारी थी तो उसने ट्रामा में आने वाले मरीजों की सुरक्षा और इलाज का प्रबंध क्यों नहीं किया ? हड़ताल के दौरान इलाज नहीं मिलने के कारण जिन लोगों की मौत हो गई उनकी मौतों का जिम्मेदार कौन है ? क्या आम इंसान की जगह शासन स्तर के अधिकारी और मंत्री के परिवार का कोई सदस्य हड़ताल का शिकार बनता तब भी अस्पताल प्रशासन डॉक्टर्स का ही साथ देता ? सरकार और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े लोगों को ऐसे सभी सवालों का जवाब तलाशना होगा। डॉक्टर बनते समय मरीज की जान बचाने की हर संभव कोशिश करने की शपथ लेने का कर्तव्य भी निभाना होगा। इसके अलावा डॉक्टर और मरीज के बीच मजबूत और संवेदनशील रिश्ते को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी भी डॉक्टरी पेशे से जुड़ी नई पीढ़ी के कंधों पर है। वहीं मरीजों को भी डॉक्टर पर विश्वास बरकरार रखना होगा ताकि वह बिना किसी डर और झिझक के इलाज कर सके। साथ ही सरकार और अस्पताल प्रशासन प्रयास करे कि बिना हड़ताल के कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान हो सके।

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