शर्मनाक: सीएम के प्रमुख सचिव एसपी गोयल पर 25 लाख घूस का आरोप राज्यपाल ने सीएम को सीएम ने चीफ सेके्रटरी को दिए जांच के आदेश पर जांच शुरू होने से पहले शिकायतकर्ता को पुलिस ने लिया हिरासत में

  • सीएम के प्रमुख सचिव एसपी गोयल पर भ्रष्टाचार के आरोपों ने मचाई सनसनी
  • पुलिस ने शिकायतकर्ता को ही लिया हिरासत में तो सोशल मीडिया पर लोगों का फूटा गुस्सा
  • एसपी गोयल के कारनामों की शिकायत पहुंची पीएमओ तक
  • माया सरकार में कैबिनेट सेक्रेटरी के पीएस रहे गोयल को सीएम का प्रमुख सचिव बनाए जाने से हैरान थे लोग

संजय शर्मा
लखनऊ। सीएम योगी के प्रमुख सचिव एसपी गोयल पर लगे घूस के आरोप ने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक न सिर्फ नौकरशाही अपितु राजनैतिक गलियारे में भी हडक़ंप मचा दिया है । व्यापारी अभिषेक गुप्ता के राज्यपाल को लिखे खत और राज्यपाल के सीएम को जांच कराने के आदेश वाले खत के वायरल होते ही पूरा तंत्र इस युवक के उत्पीडऩ में जुट गया। सीएम ने चीफ सेके्रटरी को इसकी जांच के आदेश कर दिये। यह जांच शुरू हो पाती उससे पहले ही पुलिस ने शिकायत करने वाले युवक को ही हिरासत में ले लिया। मजे की बात तो यह रही कि विपक्ष हमला बोलता उससे पहले भाजपा नेता आईपी सिंह ने ही एसपी गोयल पर भ्रष्टाचार के तमाम आरोप लगा डाले। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत तमाम विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इस  भ्रष्टाचार की सीबीआई से जांच कराने की मांग की।
सीएम के प्रमुख सचिव एसपी गोयल अपनी तैनाती के बाद से ही विवादों मे आ गये थे। लोग हैरान थे कि जो शख्स मायावती सरकार मेें कैबिनेट सेक्रेटरी शशांक शेखर सिंह का पीएस रहा हो उसे सीएम अपना प्रमुख सचिव कैसे बना सकते हैं। तैनाती के बाद से ही गोयल की कार्यशैली से न सिर्फ मंत्री और विधायक परेशान हुए बल्कि नौकरशाह भी गोयल की कार्यशैली देखकर हैरान थे। सीएम की प्राथमिकताओं की फाइलें भी पंचम तल पर बेवजह कोई टिप्पणी लगाकर वापस कर दी जाती। नौकरशाहों के बीच यह बात चर्चा का विषय बनने लगी कि आखिर सीएम दफ्तर सीएम की सबसे प्राथमिकता वाले कामों को रोकने में क्यों लगा रहता है। मगर बिल्ली के गले मे घंटी कौन बांधे इस स्टाइल पर गोयल के खिलाफ कोइ बोलने को तैयार नही हुआ।

गोयल के कारनामों का खुलासा तब हुआ जब हरदोई में पेट्रोल पंप की जमीन के मामले में अभिषेक गुप्ता नामक युवक की फाइल लंबे समय तक पंचम तल तक अटकी। इस युवक ने पूरे मामले को लेकर राज्यपाल को मेल किया। राज्यपाल ने 30 अप्रैल को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर गोयल के खिलाफ इस शिकायती पत्र की जांच कराने के आदेश दिए। मगर राज्यपाल का खत भी एसपी गोयल ने दबा दिया। मगर यह खत कल 7 जून को वायरल हो गया।

चूंकि मामला सीएम के प्रमुख सचिव के घूस मांगने से जुड़ा था तो नौकरशाही और राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई। चूंकि भाजपा दावा करती है कि सीएम योगी अब तक के सबसे ईमानदार मुख्यमंत्री हैं तो यह सवाल उठना लाजिमी था कि अगर सीएम ईमानदार है तो उनके प्रमुख सचिव घूस कैसे मांग सकते हैं। होना तो यह चाहिए था कि राज्यपाल का खत मिलते ही इस मामले की जांच कराकर अभिषेक गुप्ता को न्याय दिया जाता, मगर यहां उल्टा हुआ।

पूरा तंत्र उल्टा अभिषेक को ही सबक सिखाने में जुट गया। पत्र के वायरल होते ही भाजपा नेता की एक चि_ïी पर पुलिस ने अभिषेक गुप्ता को हिरासत में ले लिया। भाजपा के कार्यालय प्रभारी भारत दीक्षित ने एसएसपी को खत लिखकर कहा कि सीएम के विशेष सचिव और पत्रकार ने उन्हें सूचना दी कि अभिषेक गुप्ता पार्टी का नाम बदनाम कर रहे हैं। पुलिस ने भी बिना कुछ सोचे समझे अभिषेक को घर से उठा लिया जब वह एसपी गोयल के खिलाफ प्रेस कॉफ्रेंस करने जा रहे थे। लोगों ने सवाल किया कि सीएम का विशेष सचिव भाजपा के कार्यालय प्रभारी को कब से रिपोर्ट करने लगा।

अभिषेक गुप्ता का परिवार सडक़ पर उतरा सीएम से मिलने की मांग के साथ आंदोलन की चेतावनी देने लगे। मामले को तूल पकड़ता देखकर डीएम हरदोई को पूरी फाइल के साथ लखनऊ तलब किया गया। कुछ लोगों ने पीएमओ को भी मेल करके गोयल के कारनामों की जानकारी दी है। यह बात तय है कि अगर गोयल के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो सीएम दफ्तर पर भ्रष्टïाचार के आरोप लगाने में विपक्ष कोई कमी नहीं छोड़ेगा।

इस मामले की जांच होनी चाहिए सीबीआई से: अखिलेश यादव
रिश्वत लेना-देना दोनों ही अपराध है। इस मामले में जांच के बाद अगर दोषी होते तो दोनों को जेल भेजा जाना चाहिए, मगर भ्रष्टïाचार के आरोप लगाने वाले युवक के आरोपों की जांच कराने की जगह उसकी गिरफ्तारी करना शर्मनाम है। भाजपा के विधायक और मंत्री ही चिल्ला रहे हैं कि भ्रष्टाचार बहुत हो रहा है तो मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए।

भाजपा नेता आईपी सिह ने लगाये आरोप
भाजपा के फायर ब्रांड नेता आईपी सिंह ने भी एसपी गोयल के भ्रष्टाचार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने ट्वीट करके अप्रत्यक्ष रूप से यह भी आरोप लगाया कि एनआरएचएम घोटाले में जब दो सीएमओ की हत्या हो गई थी तब पंचम तल पर गोयल के इशारे पर ही सबूत नष्टï किए गए थे। उन्होंने लिखा कि परमपूज्य योगी जी की जनकल्याणकारी नीतियों को विफल करने वाले अधिकारी एसपी गोयल ही हैं। श्री सिंह के ट्वीट से भाजपा में हडक़ंप मच गया।

अभिषेक गुप्ता के आरोप में सच्चाई नहीं है। शिकायतकर्ता की गतिविधियां संदेह के घेरे में हैं। शिकायत और शिकायतकर्ता दोनों की जांच करेंगे।

-सिद्धार्थनाथ सिंह, कैबिनेट मंत्री

पूरे मामले की निष्पक्ष रूप से जांच होनी चाहिए। साथ ही जांच में दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

-आलोक रंजन, पूर्व मुख्य सचिव

प्रदेश में क्या जंगलराज चल रहा है ? शिकायतकर्ताओं और व्हिसिल ब्लोअर पर ही एकतरफा उत्पीडऩ की कार्यवाही की जाती है, जिनके ऊपर आरोप होते हैं उसकी जांच भी नहीं की जाती, बिना जांच के शिकायत करने वाले को ही अपराधी मान लिया जाता है। योगी सरकार को सोचना चाहिए कि उसकी छवि दिन-पर-दिन हास्यास्पद होती जा रही है, और इस आक्रोश के नतीजे चुनाव परिणामों में भी साफ दिख रहे हैं।

-वैभव माहेश्वरी, प्रवक्ता, आम आदमी पार्टी

इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जांच में जो भी दोषी हो उसको कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। इस तरह जांच से पहले ही गिरफ्तार करना उचित नहीं है।

-आराधना मिश्रा, विधायक, कांग्रेस

अभिषेक घर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाला था । इस बीच कुछ लोग सादी वर्दी में आए और उसे खींचते हुए गाड़ी में बैठा लिया और कहां ले गए हैं इसका अभी तक हम लोगों को पता नहीं चला है। हम लोग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने के लिए आए हैं, अगर सच बोलना पाप है तो अभिषेक ने पाप किया है। एक 22 साल के बच्चे के अंदर कम से कम इतनी हिम्मत तो होनी ही चाहिए कि वह सच बोल सके।

-अल्पना, अभिषेक की बहन

अभिषेक मीडिया वालों से बात कर रहा था तभी कुछ लोग आए और उसे प्रेस कॉन्फ्रेंस के बीच से उठाकर ले गए। मैंने दीनदयाल उपाध्याय के साथ काम किया है सच बोलना अगर गलत है तो उसने गलत किया है।

-ओम प्रकाश गुप्ता, अभिषेक के नाना

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