इलाज के अभाव में हुई मौतों को नकार रहा केजीएमयू

  • कहा, कर्मचारी हड़ताल पर थे लेकिन मरीजों का इलाज कर रहे थे डॉक्टर
  • जूनियर डॉक्टरों के अभी भी हड़ताल पर जाने की आशंका

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। केजीएमयू में डॉक्टरों और कर्मचारियों के मध्य विवाद के बाद गुरुवार को दिन भर चली हड़ताल चार जिंदगियां लेने के बाद देर शाम को समाप्त हो गई। इलाज के अभाव में होने वाली इन मौतों का जिम्मेदार कौन है, इसका जवाब केजीएमयू के पास नहीं है, लेकिन केजीएमयू प्रशासन ट्रामा सेंटर से बाहर और अंदर इलाज के अभाव में दम तोडऩे वालों की मौत को स्वाभाविक बताकर अपना पल्ला झाड़ रहा है। यहां के अधिकारियों का कहना है कि इलाज के अभाव में कोई भी मौत नहीं हुई है, क्योंकि डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे थे। स्वाभाविक मौतों का केजीएमयू के पास कोई इलाज नहीं है।

केजीएमयू में हड़ताल के दौरान ट्रामा सेंटर में इलाज के लिए पहुंची 13 महीने की बच्ची लविका सहित चार मरीजों की मौत हो गई। लेकिन केजीएमयू प्रशासन उदासीन बना रहा। इलाज के अभाव में चार लोगों की मौत होने और मामला उच्चाधिकारियों तक पहुंचने व प्रेशर पडऩे के बाद केजीएमयू प्रशासन ने आरोपी छात्र के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामले को शांत कराया। वहीं कर्मचारियों ने भी आरोपी छात्र के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए चौबीस घण्टे का अल्टीमेटम दिया था। कर्मचारी यूनियन के महामंत्री प्रदीप गंगवार ने बताया कि कार्यवाही के लिए केजीएमयू के पास पूरा 24 घण्टे का वक्त था लेकिन केजीएमयू प्रशासन ने आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही करने में उदासीनता बरत रहा है। हालांकि गुरुवार को देर शाम केजीएमयू प्रशासन के कुलसचिव ने चौक कोतवाली में कलेक्शन सेंटर पर कर्मचारियों के साथ मारपीट करने वाले मेडिकोज के खिलाफ रिपोर्ट न दर्ज करा कर मारपीट करने वाले सौ लोगों के खिलाफ अज्ञात रिपोर्ट दर्ज करा दी है। इसके अलावा केजीएमयू प्रशासन का कहना है कि सीसीटीवी कैमरे की जंाच के आधार पर दोषी मेडिकोज की पहचान करायी जाएगी। उधर कर्मचारी परिषद का कहना था कि एमबीबीएस मेडिकोज की पहचान उन लोगों ने बतायी है। उसी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करायी। वहीं सूत्रों की मानें तो जूनियर डॉक्टरों ने मेडिकोज के खिलाफ किसी भी तरह की कार्यवाही होने पर हड़ताल पर जाने का मन बनाया है। रेजीडेंट डॉक्टर एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अगर एक भी मेडिकोज के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज हुई और कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं की गई तो जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर जा सकते हैं।

केजीएमयू में कर्मचारियों की हड़ताल के कारण कोई भी मौत नहीं हुई है। हमारे जूनियर डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे थे। उन्हें भर्ती भी किया जा रहा था। जो भी मौतें हुईं हैं वह स्वाभाविक मौते हैं।

सुधीर कुमार प्रवक्ता, केजीएमयू

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