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घाटी में शांति का सवाल पत्थरबाज और पाक

अहम सवाल यह है कि घाटी में यह सब कब तक चलता रहेगा? क्या कश्मीर घाटी में शांति की बहाली में सबसे ज्यादा सियासी चालें रोड़ा अटका रही हैं? क्या जम्मू-कश्मीर की सीएम महबूबा मुफ्ती के दोहरे रवैए और बयानों के कारण पत्थरबाजों और पाकिस्तान दोनों के हौसले बढ़ गए हैं? क्या पत्थरबाजों को भटके हुए कश्मीरी युवा बताकर सेना पर हो रहे हमले को नजरअंदाज करने की कोशिश की जा रही है?

तमाम कवायदों के बावजूद कश्मीर घाटी में शांति का सवाल आज भी खड़ा है। यहां सेना के जवानों के बूटों, बम धमाकों और गोलियों की आवाजें गूंज रही हैं। अलगाववादियों की शह पर पत्थरबाज सेना पर पत्थर बरसा रहे हैं तो पाकिस्तान सीमा पार से कश्मीरियों व सेना के जवानों को गोलियों से छलनी कर रहा है। कश्मीर में ऑपरेशन ऑल आउट के स्थगित होने के बाद आतंकी हमले बढ़ गए हैं। इन सबके बीच अहम सवाल यह है कि घाटी में यह सब कब तक चलता रहेगा? क्या कश्मीर घाटी में शांति की बहाली में सबसे ज्यादा सियासी चालें रोड़ा अटका रही हैं? क्या जम्मू-कश्मीर की सीएम महबूबा मुफ्ती के दोहरे रवैए और बयानों के कारण पत्थरबाज और पाकिस्तान दोनों के हौसले बढ़ गए हैं? क्या पत्थरबाजों को भटके हुए कश्मीरी युवा बताकर सेना पर हो रहे हमले को नजरअंदाज करने की कोशिश की जा रही है? कश्मीर में शांति के सबसे बड़े दुश्मन अलगाववादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने से सरकारें क्यों बच रही हैं? एकतरफा सीजफायर करने का खामियाजा आखिर कौन भुगत रहा है?

ऑपरेशन ऑल आउट को रमजान के दौरान स्थगित करने के केंद्र सरकार के फैसले के बाद घाटी के हालात बदतर हो गए हैं। अलगाववादी, पाकिस्तान और पत्थरबाज सभी खुलकर खेलने लगे हैं। पाकिस्तान सीमा पार से रिहायशी इलाकों को निशाना बना रहा है। इसके पीछे पाकिस्तान की शातिर मंशा है। रिहायशी इलाकों के खाली हो जाने से वह इन रास्तों से भारत में आतंकियों की घुसपैठ कराने की फिराक में है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच महीने में पाकिस्तान की ओर से 1000 बार सीजफायर तोड़ा गया। सेना और नागरिकों को निशाना बनाया गया। पिछले 20 दिनों में आतंकियों ने तीन दर्जन से ज्यादा लोगों की जान ले ली, जिसमें पुलिस और सुरक्षा बल के जवान शामिल हैं। केवल श्रीनगर में अलग-अलग जगहों पर 18 हैंड ग्रेनेड फेंके गए। इनमें दो दर्जन से ज्यादा लोग जख्मी हो गए। इन पांच महीनों में 143 लोग जिसमें 37 आम नागरिक, 71 आतंकी और सुरक्षाबलों के 31 जवान शहीद हुए। इन 143 में से तीन दर्जन लोग सिर्फ रमजान में हुए सीजफायर के दौरान मारे गए हैं। इसके बावजूद सीएम महबूबा मुफ्ती अपनी सियासी रोटी सेंकने से बाज नहीं आ रही हैं। वे पाकिस्तान से बातचीत करने का दबाव भारत पर बना रही हैं। पत्थरबाजों और अलगाववादियों को खुली छूट दी गई है। यह सब इसलिए किया जा रहा है ताकि चुनाव के दौरान इसका फायदा उठाया जा सके। कश्मीर की समस्या तभी हल हो सकती है जब केंद्र व राज्य सरकारें मजबूत राजनीति इच्छाशक्ति का प्रदर्शन करें। साथ ही पत्थरबाजों और इनके आकाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

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