किसान आंदोलन में सियासी अराजकता

डॉ. दिलीप अग्निहोत्री

किसानों की समस्याओं से इंकार नहीं किया जा सकता। ऐसा भी नहीं कि ये सभी समस्याएं पिछले तीन चार वर्ष की देन हैं। इसके पहले किसान काफी खुशहाल थे। आज कांग्रेस पार्टी स्वामीनाथन आयोग के लिए बेचैन है। जबकि इसकी रिपोर्ट कांग्रेस के शासन काल में आई थी। रिपोर्ट आने के बाद सात वर्ष तक यूपीए की सरकार थी। तब उसने रिपोर्ट की सिफारिशों पर कोई कारगर कदम नहीं उठाया। जबकि इस रिपोर्ट की सिफारिशों पर मोदी सरकार ने अनेक प्रभावी कदम उठाए हैं।
स्वामीनाथन आयोग का गठन 2004 में किया गया था। इसे किसानों की स्थिति सुधारने के लिए सिफारिश देनी थी। दो वर्ष बाद 2006 में आयोग ने अपनी रिपोर्ट दी थी। इसमें फसल लागत से 50 प्रतिशत अधिक कीमत मिलने, उचित मूल्य पर गुणवत्ता युक्त बीजों की उपलब्धता, किसान जोखिम फंड, फसल बीमा , किसान क्रेडिट कार्ड, उपजाऊ जमीन और वन भूमि उद्योगों के लिए न देने आदि की सिफारिश की गई थी। मुम्बई और मंदसौर में गत वर्ष ऐसे ही आंदोलन हुए थे। मंदसौर में उसने हिंसक रूप भी ले लिया था। बाद में पता चला कि किसानों के नाम पर राजनीतिक दल के लोग अराजकता फैला रहे थे। यही लोग जबरदस्ती दूध, सब्जी एकत्र करके सडक़ों पर फैला रहे थे। आज फिर वही दृश्य दोहराया जा रहा है। ग्रामीणों से दूध व सब्जियां लेकर सडक़ों पर फैलाया जाता है। क्या प्रथमदृष्टया यह किसान आंदोलन लगता है। जी नहीं, भारतीय ग्रामीण चिंतन में दूध का गिरना, फैलना अपशगुन माना जाता है। जो टैंकरों से दूध बहा रहे हैं, वह किसान नहीं हो सकते। इस आंदोलन का खर्च तो कोई न कोई वहन कर ही रहा होगा।
नरेंद्र मोदी सरकार ने स्वामिनाथन आयोग की सर्वाधिक सिफारिशों को लागू किया है। यूरिया की उपलब्धता सुनिश्चित करवाई और उसकी कालाबाजारी पर रोक लगाई। किसानों को पर्याप्त यूरिया मिलने लगी। जबकि यूपीए सरकार ने ऐसा नहीं किया। स्वामीनाथन ने मोदी सरकार द्वारा कृषि विश्वविद्यालयों और निजी क्षेत्र के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के कौशल को बढ़ावा देने के प्रयासों की भी सराहना की है। ग्रामीण महिलाओं ने पचास प्रतिशत कृषि कार्य में योगदान दिया है। मोदी सरकार ने किसान आयोग की बेहतर बीज, सॉयल हेल्थ कार्ड, बीमा, सिंचित क्षेत्र में वृद्धि सिफारिशों को लागू किया है। नरेंद्र मोदी ने स्वरोजगार, कौशल विकास,मुद्रा बैंक आदि की व्यवस्था की। प्रतीक के रूप में मोदी ने पकौड़ा बनाने के स्वरोजगार की बात कही थी। विपक्ष ने इसे मजाक का विषय बना दिया। वस्तुत: विपक्ष कम जोत वाले किसानों का मजाक बना रहा था। वह उन्हें साधारण जोत में उलझाए रखना चाहता था। इसलिए कृषि के साथ स्वरोजगार का मजाक बनाया, लेकिन आंदोलन के समर्थन में पहुंचने लगे। चर्चा यह भी है कि आंदोलन में राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र पर ज्यादा फोकस किया जा रहा है। पंजाब तो हरियाणा के लपेटे में आ गया। प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है। राजस्थान सरकार ने अन्नदाता के कल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। राज सहकार व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना के तहत किसानों को मिलने वाली सहायता राशि बढ़ाकर दस लाख रुपये कर दी गई है। किसान मात्र 27 रुपये के वार्षिक प्रीमियम पर इसका लाभ ले सकते हैं। इसके तहत बीमित के आंख, हाथ या पैर में से किसी एक अंग की स्थायी अपंगता पर तीन लाख रुपये, किन्हीं दो अंगों की स्थाई अपंगता अथवा दुर्घटना में मृत्यु पर दस लाख रुपये का बीमा किसान भाइयों को मिल रहा है। 2013 तक इस योजना के तहत किसानों को सिर्फ पचास हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिलती थी। अब इसे बीस गुना बढ़ा दिया गया है।
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने किसानों के कल्याण हेतु अनेक कार्य किये है। धान, गेंहू की रिकार्ड खरीद हुई। पहली बार आलू के लिए अलग व्यवस्था की गई। केंद्र के साथ मिल कर रुपे कार्ड अभियान प्रारंभ किया गया। यह किसान क्रेडिट कार्ड की भांति है, जिसे राष्ट्रीयकृत बैंकों के द्वारा जारी किया जाता है। जिससे किसान बैंकों द्वारा स्वीकृत फसली ऋण की सीमा तक धनराशि आहरित कर बीज, उर्वरक,आदि की सुविधा हासिल कर सकते है। इसी प्रकार अनेक प्रदेश सरकारों ने कदम उठाए हैं।
निश्चित ही कृषि क्षेत्र में अभी बड़े कदम उठाने की आवश्यकता है। सरकार इस दिशा में प्रयास भी कर रही है। फिलहाल समस्याएं जटिल हैं। आबादी बढऩे के साथ जोत छोटी होती जा रही है। किसान से मजदूर बनने की प्रक्रिया चल रही है। भूमि अधिग्रहण के अभाव में कृषि व ग्राम विकास की लाखों करोड़ रुपये की योजनाएं लंबित हैं। नरेंद्र मोदी सरकार शुरू में जो भूमि अधिग्रहण विधेयक लाई थी, उसका उद्देश्य इन योजनाओं को पूरा करना था। इनसे गांव की तस्वीर बदल जाती। लेकिन यथास्थिति के हिमायती विपक्ष ने उस विधेयक को राज्यसभा से पारित नहीं होने दिया। आज यही विपक्ष किसानों के प्रति हमदर्दी का प्रदर्शन कर रहा है।

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