जिद… सच की

निपाह से निपटने के लिए कितने तैयार हैं हम ?

अहम सवाल यह है कि क्या देश की चिकित्सा व्यवस्था इस तरीके की अज्ञात बीमारियों से निपटने में सक्षम है? क्या निपाह की चपेट में आने वाले वायरस से संक्रमित लोगों को बचाया जा सकता है? क्या जांच-पड़ताल करने और लक्षणों के हिसाब से दवा देने के अलावा चिकित्सकों के पास इसके निदान का कोई चारा है?

केरल में फैले निपाह वायरस का खौफ पूरे देश में दिखने लगा है। चमगादड़ से फैलने वाले इस वायरस की चपेट में आकर केरल में अभी तक दस लोगों की मौत हो चुकी है। कई लोग गंभीर रूप से बीमार हैं और उनका इलाज चल रहा है। अब विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी चेतावनी जारी कर दी है। संगठन ने भारत और ऑस्टेलिया में निपाह वायरस के फैलने का सबसे अधिक खतरा बताया है। केरल में निपाह वायरस मिलने के बाद खतरे की घंटी बज चुकी है। फिलहाल इस वायरस के खतरे को देखते हुए देश के अधिकांश राज्यों में अलर्ट जारी कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग को तैयार रहने को कहा गया है। इन सबके बीच अहम सवाल यह है कि क्या देश की चिकित्सा व्यवस्था इस तरीके की अज्ञात बीमारियों से निपटने में सक्षम है? क्या निपाह की चपेट में आने वाले वायरस संक्रमित लोगों को बचाया जा सकता है? क्या जांच-पड़ताल करने और लक्षणों के हिसाब से दवा देने के अलावा चिकित्सकों के पास इसके निदान का कोई चारा है? विश्व स्वास्थ्य संगठन की चेतावनी के बाद भी इससे बचाव के कोई उपाय क्यों नहीं किए जा रहे हैं? इस लाइलाज बीमारी को लेकर किसी प्रकार का जागरूकता अभियान क्यों नहीं चलाया जा रहा है? क्या सरकार को स्थिति के विस्फोटक होने का इंतजार है?

निपाह वायरस ने देश की धरती पर अपने कदम रख दिए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक वायरस का संक्रमण बेहद खतरनाक है। यह केवल मनुष्यों को ही नहीं बल्कि जानवरों को भी संक्रमित करता है। इस वायरस के वाहक फल खाने वाले चमगादड़ माने जा रहे हैं। यह बीमारी लाइलाज है। संक्रमण के बाद बीमारी को बढऩे से नहीं रोका गया तो 48 घंटे में मरीज की मौत हो सकती है। इसके पहले भी निपाह वायरस के कई मामले आ चुके हैं। बांग्लादेश, थाईलैंड, कंबोडिया, फिलीपिन्स, मलेशिया में कई मामले प्रकाश में आ चुके हैं। 1998 में मलेशिया के कांपुंग सुंगई निपाह गांव के लोग पहली बार इस संक्रमण से पीडि़त हुए थे तभी से इसका नाम निपाह वायरस पड़ा। बावजूद इसके आज तक इस जानलेवा बीमारी से लोगों को राहत देने की कोई कोशिश नहीं की गई। जहां तक भारत का सवाल है, यहां की चिकित्सा व्यवस्था में इसका कोई इलाज फिलहाल नहीं है। वहीं इस वायरस की दहशत लोगों में फैल चुकी है। ऐसे समय में सरकार को इसके संक्रमण से बचने के तरीकों के बारे में लोगों को जागरूक करना चाहिए। लेकिन चिकित्सा विभाग इस मामले में गंभीर नहीं दिख रहा है। हकीकत यह है कि देश में सरकारी चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। जिला अस्पतालों में सामान्य रोगों का इलाज कायदे से नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में यदि वायरस का फैलाव दूसरे स्थानों पर हुआ तो स्थितियां विस्फोटक हो जाएंगी। इसलिए सरकार को त्वरित और प्रभावी जागरूता अभियान चलाना चाहिए ताकि वायरस को फैलने से रोका जा सके।

 

 

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