मिशन 2019 का प्लान तैयार, दलित वोटों में सेंधमारी की जुगत में लगी भाजपा

  • विपक्ष की एकजुटता से चिंतित भाजपा ने बनायी रणनीति
  • मोदी के विकास मंत्र से दलितों में पैठ बढ़ाएगी पार्टी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। विपक्ष की एकजुटता को देखते हुए आगामी लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा ने अभी से खाका तैयार करना शुरू कर दिया है। मोदी सरकार के चार वर्ष पूरे होने पर शनिवार से शुरू होने वाले अभियान के जरिये भाजपा लोकसभा की चुनावी तैयारी में पूरी तरह जुटेगी। इस दौरान दलित वोट बैंक पर भाजपा की खास नजर होगी, दलित बस्तियों में चलने वाले एक दिवसीय विशेष संपर्क अभियान के जरिये दलित वोट बैंक को साधने की भाजपा ने रणनीति तैयार की है। यदि भाजपा नेता अपने इस मकसद में कामयाब हो जाते हैं तो बसपा को सबसे बड़ा नुकसान होगा। भाजपा नेताओं ने मोदी के विकास के मंत्र के जरिये दलित बस्तियों में अपनी पैठ तैयार करने की रणनीति बनायी है। सपा-बसपा गठबंधन, गोरखपुर व फूलपुर उपचुनाव में हार और दलित आंदोलन के बाद भाजपा एक बार फिर पूरी मजबूती से दलित समाज को साधने में जुटी है। सांगठनिक दृष्टि से प्रदेश में भाजपा के 1471 मंडल हैं। इन सभी मंडलों की एक-एक दलित बस्तियों में भाजपा का जनसंपर्क अभियान चलेगा। ग्राम स्वराज अभियान के दौरान दलित बस्तियों में भोज और रात्रि प्रवास के जरिये रिश्तों को मजबूत करने की पहल हुई थी, लेकिन इस बार समरसता संपर्क के लिए वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है। भाजपा प्रदेश महामंत्री और अनुसूचित मोर्चा के प्रभारी गोविंद नारायण शुक्ल के नेतृत्व में प्रदेश मंत्री अंजुला माहौर और संजय राय को इस अभियान के समन्वय की जिम्मेदारी दी गई है। भाजपा ने तय किया है कि दलित बस्तियों में संगठन के वरिष्ठ नेता मोदी सरकार की चार वर्ष की उन योजनाओं को लेकर जाएंगे, जिनसे दलितों को सीधा फायदा हुआ है। इसके अलावा डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर के लिए मोदी सरकार द्वारा पंच तीर्थ समेत अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी दी जाएगी। मंडल स्तर के संगठन को इस बात के भी निर्देश हैं कि योजनाओं का लाभ जिन पात्रों को नहीं मिल सका है, उनकी सूची तैयार रखें। भाजपा के लोग पात्रों को योजनाओं का भी लाभ दिलाएंगे। इस तरह विकास के जरिये दलित बस्तियों में भाजपा सरकार की उपलब्धियों पर चर्चा होगी। भाजपा नेताओं का मानना है कि 2014 और 2017 के चुनाव में सभी वर्गों ने भाजपा का साथ दिया। सबका साथ-सबका विकास हमारा नारा है और इसी कड़ी में यह कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।

दलित सांसदों को भी साधने की कवायद

आरक्षण और संविधान बचाओ समेत तमाम नारों के साथ दो अप्रैल को दलितों ने भारत बंद आंदोलन किया था। इस आंदोलन के पहले से ही बहराइच की भाजपा सांसद सावित्री बाई फुले, राबट्र्सगंज के छोटेलाल खरवार, इटावा के अशोक दोहरे, नगीना के सांसद डॉ. यशवंत सिंह समेत कई लोगों ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। कुछ दलित सांसदों जैसे नगीना के सांसद यशवंत ने फिर से भाजपा का झंडा लहराना शुरू कर दिया है। हालांकि सावित्री अभी तक अपनी पार्टी के विरोध में मुखर हैं। दलित सांसदों को भाजपा ने एकजुट करने का अभी से प्रयास शुरू कर दिया है। इसका असर दिखने भी लगा है। कुछ सांसद पक्ष में नजर आने लगे हैं।

भाजपा ने तय किया है कि दलित बस्तियों में संगठन के वरिष्ठ नेता मोदी सरकार की चार वर्ष की उन योजनाओं को लेकर जाएंगे, जिनसे दलितों को सीधा फायदा हुआ है। इसके अलावा डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर के लिए मोदी सरकार द्वारा पंच तीर्थ समेत अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी दी जाएगी।

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