जोखिम में गर्भवती महिलाओं की जान: तेजी से हो रही हैं थायराइड का शिकार

  • राजधानी में 25 प्रतिशत महिलाएं चपेट में
  • गर्भस्थ शिशु की जान को भी खतरा, गलत खान-पान मुख्य वजह

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। राजधानी में गर्भवती महिलाएं तेजी से थायराइड का शिकार हो रही है। इस बीमारी से महिला और बच्चे दोनों की जान को खतरा है। लखनऊ में 20 से 25 फीसदी महिलाएं थायराइड की शिकार हैं। गलत खान-पान और प्रदूषण इसका मुख्य कारण बताया जा रहा है। बीते सालों की तुलना में यह बीमारी महिलाओं में लगातार बढ़ती जा रही है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं को यह समस्या ज्यादा हो रही है।
थायराइड की चपेट में आने वाली गर्भवती महिला को प्रेग्नेंसी के पहले तीन माह तक ज्यादा खतरा है। गंभीर थायराइड यानी हाइपो-थायराइड होने से गर्भपात की संभावना बहुत बढ़ जाती है। शिशु की गर्भ में मौत भी हो सकती है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच सालों में गर्भवती महिलाओं में थाइराइड की शिकायतें तेजी से बढ़ी हैं। वर्तमान में यह संख्या 25 फीसदी तक पहुंच गई है। इससे शिशु के शारीरिक विकास पर खराब असर पड़ता है। इस बीमारी के कारण बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास पर गहरा प्रभाव पड़ता है। बच्चा असामान्य रूप से पैदा हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक थायराइड पीडि़त गर्भवती महिलाओं के बच्चों का विकास सामान्य बच्चों की तरह नहीं बल्कि धीमी गति से होता है। इसलिए सावधानी जरूरी है।

विश्व थायराइड दिवस पर विशेष

गर्भवती महिलाओं में थाइराइड की शिकायतें तेजी से बढ़ी हैं। वर्तमान में यह संख्या 25 फीसदी तक पहुंच गई है। इससे शिशु के शारीरिक विकास पर खराब असर पड़ता है।

क्या है थायराइड

थायराइड गले का रोग है। यह हार्मोन असंतुलन के कारण होता है। गले में स्थित ग्रंथि शरीर के मेटाबॉल्जिम को नियंत्रित करती है। यहीं से शरीर में खास तरह के हॉर्मोन टी-3, टी-4 और टीएसएच का स्त्राव होता है। जिसकी वजह से शरीर की सभी कोशिकाएं सही ढंग से काम करती हैं। यही नहीं यह ग्रंथि भोजन को ऊर्जा में बदलने का काम करती हैं, लेकिन जब इनकी मात्रा में अंसतुलन पैदा हो जाता है तो यह हमारी सेहत पर बुरा असर डालती है। इसके स्त्राव में कमी और अधिकता का सीधा असर व्यक्ति की भूख, नींद और मनोदशा पर पड़ता है। इसके अलावा यह दिल, मांसपेशियों, हड्डियों और कोलेस्ट्रॉल को भी प्रभावित करती है। पाचन क्रिया पर भी इसका बहुत ज्यादा असर पड़ता है। थायराइड बीमारी के दौरान पाचन क्रिया सामान्य से 50 फीसदी कम हो जाती है। डॉक्टरों के मुताबिक इसे इम्यून डिजीज कहते हैं। यह समस्या ज्यादातर आनुवंशिक कारणों से होती है।

प्रेग्नेंसी में इस तरह के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। समस्या को नियंत्रित करने के लिए सही समय पर इसका इलाज और व्यायाम करना बहुत ही जरूरी है। अगर महिला को पहले से थायराइड है तो उन्हें गर्भधारण करने से पहले इसकी जांच करानी ही चाहिए। प्रेग्नेंसी के बाद हर माह जांच कराते रहना चाहिए।
डॉक्टर रेखा सचान, क्वीनमेरी अस्पताल

ड्डव्यवहार में चिडचिड़ापन और उदासी
ड्डसर्दी में भी पसीना निकलना
ड्डजरूरत से ज्यादा थकान और अनिद्रा
ड्डतेजी से वजन बढऩा या कम होना
ड्डपीरियड में अनियमितता
ड्डदिल का सही ढंग से काम न करना
ड्डशरीर और चेहरे पर सूजन

सावधानी

जन्म के तीसरे से पांचवें दिन के भीतर शिशु का थायराइड टेस्ट जरूर करवाएं। डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयों को नियमित रूप से लें।

गर्भावस्था में थायराइड के इलाज के लिए दी जाने वाली दवाएं जरूरत के हिसाब से घटाई या बढ़ाई जा सकती हैं। बच्चे के जन्म के बाद इसे जरूरत के हिसाब से कम कर दिया जाता है।
-डॉक्टर सविता भट्ट एसआईसी,डफरिन अस्पताल

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