गर्भावस्था में वायरल इंफेक्शन से बच्चा हो सकता है मानसिक अपंग: डॉ. तिवारी

  • सभी प्रकार के संक्रमण से बचाव जरूरी
  • समय से स्किजोफ्रेनिया का इलाज होने से बीमारी हो सकती है ठीक

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। गर्भावस्था के दौरान किसी भी तरह के वायरल इंफेक्शन से शिशु पर घातक प्रभाव पड़ सकता है। इससे शिशु में स्किजोफ्रेनिया (पागलपन) होने की अधिक आशंका होती है। इसके अलावा प्रसव के समय शिशु को चोट लगने से भी स्किजोफ्रेनिया होने की संभावना बढ़ जाती है। यह जानकारी स्टेट मेंटल हेल्थ अथॉरिटी के सचिव तथा किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के जिरियाट्रिक मेंटल हेल्थ के विभागाध्यक्ष प्रो. एससी तिवारी ने दी।

उन्होंने बताया कि शिशु को इस मानसिक बीमारी से बचाने के लिए गर्भवती महिला को सभी प्रकार के संक्रमण से बचाव जरूरी है। विश्व स्वास्थ संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक कुल आबादी के लगभग एक प्रतिशत लोग इस बीमारी कीे चपेट में हैं। डा. तिवारी ने बताया कि स्किजोफ्रेनिया एक तरह की मानसिक बीमारी है। इसे उन्माद भी कहा जा सकता है। इस बीमारी में व्यक्ति के दिमाग की सोचने समझने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। उन्होंने बताया कि स्किजोफ्रेनिया बीमारी 13 से 14 साल की उम्र ही किसी को भी हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस बीमारी की यदि समय पर पहचान और इलाज हो जाए तो करीब 90 फीसदी से अधिक मरीज पूरी तरह ठीक हो जाते हैं।

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