कैराना के कुरुक्षेत्र में विपक्ष का चक्रव्यूह तोडऩे के लिए योगी ने झोंकी ताकत

  • ताबड़तोड़ रैलियां कर रहे हैं मुख्यमंत्री, पांच दल मिलकर दे रहे भाजपा को टक्कर
  • कर्नाटक में एकजुटता दिखाने के बाद सक्रिय हुए विरोधी दल
  • लोकसभा उम्मीदवार मृगांका सिंह के समर्थन में मांग रहे हैं वोट

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। कैराना के कुरुक्षेत्र में विपक्ष का चक्रव्यूह तोडऩे के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। वे लोकसभा की इस सीट से भाजपा प्रत्याशी मृगांका सिंह के पक्ष में लोगों से वोट देने की अपील कर रहे हैं। दूसरी ओर कर्नाटक में कुमारस्वामी के सीएम पद के शपथ ग्रहण समारोह में एकजुटता का प्रदर्शन करने के बाद यहां विपक्ष ने भाजपा को टक्कर देने की पूरी तैयारी कर ली है। पांच दल मिलकर गठबंधन प्रत्याशी तबस्सुम का समर्थन कर रहे हैं।

लोकसभा की गोरखपुर और फूलपुर सीटों पर सपा से शिकस्त खाने के बाद भाजपा पूरी तरह सतर्क हो चुकी है। कैराना लोकसभा उपचुनाव में जीत हासिल करना भाजपा और सीएम योगी दोनों के लिए बेहद अहम है। इस सीट का परिणाम भाजपा के मिशन 2019 को प्रभावित करेगा। यह सीट सीएम योगी के लिए प्रतिष्ठïा का भी प्रश्न बन गई है। यहां जातीय समीकरण को अपने पक्ष में करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ताबड़तोड़ रैलियां कर रहे हैं। आज भी मृगांका सिंह के समर्थन में सीएम योगी ने शामली में जनसभा को संबोधित किया। इसके बाद सीएम योगी ने नूरपुर विधानसभा सीट के लिए भाजपा प्रत्याशी अवनी सिंह के समर्थन में रैली है। दूसरी ओर देश के राजनीतिक दल किसी भी कीमत पर भाजपा का विजय रथ रोकने के अभियान में लगे हैं। कैराना में 28 मई को होने वाले लोकसभा उपचुनाव के मतदान से पहले भाजपा प्रत्याशी मृंगाका सिंह के खिलाफ पांच दल लगे हैं। भाजपा के कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के बाद सबसे बड़ा दल होने के बाद भी विपक्षी दलों ने उसको सरकार बनाने से रोकने में सफलता प्राप्त की। इसके बाद से विपक्ष उत्साहित हैं। कैराना में भाजपा प्रत्याशी को हराने के लिए समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, कांग्रेस तथा राष्ट्रीय लोकदल के साथ अब आम आदमी पार्टी भी आ गई है। पांच दलों के एक साथ आने से अब यहां का चुनाव भाजपा के लिए नाक की लड़ाई बन गई है।

दिल्ली की आम आदमी पार्टी ने यहां पर सपा-रालोद समर्थित उम्मीदवार तबस्सुम के समर्थन का ऐलान कर दिया है। इससे पहले ही कांग्रेस ने भी ऐलान किया था कि वह अपने प्रत्याशी को कैराना के मैदान में नहीं उतारेगी और सपा-रालोद समर्थित उम्मीदवार को अपना समर्थन देगी। गठबंधन प्रत्याशी को बसपा का भी मौन समर्थन हासिल है। गौरतलब है कि यह सीट सांसद हुकुम सिंह की मृत्यु से रिक्त हुई है। यहां पर 28 मई को मतदान व 31 मई को मतगणना होनी है।

28 मई को मतदान

31 मई को परिणाम

17 लाख हैं वोटर

नूरपुर में भी सभा

बिजनौर जिले के नूरपुर विधान सभा उपचुनाव को लेकर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी बेहद गंभीर है।
इसी के तहत यहां पर 28 मई को मतदान से पहले भाजपा कोई भी कसर नहीं छोडऩा चाहती। योगी आदित्यनाथ सरकार के कई मंत्री यहां पर डेरा डाले हैं। इस सब तैयारियों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक चुनावी जनसभा को संबोधित किया।

जातीय समीकरण

कैराना लोकसभा क्षेत्र में कुल 17 लाख वोटर हैं, जिसमें मुस्लिमों की संख्या पांच लाख और जाटों की संख्या दो लाख हैं। यहां पर दलितों के साथ ही ओबीसी की संख्या दो लाख है। ओबीसी में गूजर, कश्यप और प्रजापति शामिल हैं।

स्वच्छता अभियान को ठेंगा

कानपुर रेलवे स्टेशन सबसे गंदा, लखनऊ नंबर नौ पर

पीएम के संसदीय क्षेत्र वाराणसी का स्टेशन चौथे स्थान पर

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। भारतीय रेलवे ने देश के टॉप टेन सबसे गंदे रेलवे स्टेशनों की सूची जारी की है। इसके मुताबिक यूपी का कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन देश का सबसे गंदा रेलवे स्टेशन है जबकि लखनऊ नवें स्थान पर है। सबसे गंदे रेलवे स्टेशनों में मुंबई के तीन रेलवे शामिल हैं। भारतीय रेलवे ने यह सर्वे 11 मई से 17 मई के बीच किया था। यात्रियों से बातचीत के आधार पर यह रेटिंग दी गई है।

सर्वे के मुताबिक, कानपुर को सबसे ज्यादा 61.06 फीसदी लोगों ने गंदा स्टेशन बताया। इसके बाद पटना जंक्शन का नंबर था। वाराणसी चौथे, इलाहाबाद छठा, पुरानी दिल्ली सातवां, लखनऊ नौवां और चंडीगढ़ दसवां सबसे गंदा स्टेशन है। वहीं मुंबई का कल्याण तीसरा, लोकमान्य तिलक टर्मिनस पांचवां और ठाणे आठवां सबसे गंदा स्टेशन बताया गया।

मोदी को सत्ता से हटाने की जुगत में लगी कांग्रेस आर्थिक संकट में फंसी

  • पिछले पांच माह से क्षेत्रीय कार्यालयों को नहीं भेजा गया पैसा
  • पार्टी खर्च कम करने और मदद के लिए लोगों से की अपील

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा को हराने के लिये विपक्ष को लामबंद कर रही कांग्रेस नये संकट में घिर गई है। पिछले पांच महीने से केंद्रीय नेतृत्व की ओर से पार्टी के क्षेत्रीय कार्यालयों को चलाने के लिये एक भी पैसा नहीं भेजा गया है। वहीं पार्टी ने खर्चों को कम करने और मदद के लिए लोगों को आने आने की अपील की है।

राहुल गांधी के नेतृत्व में चल रही कांग्रेस के पास उद्योगपतियों की ओर से मदद तो आ रही है लेकिन वह काफी कम है। नगदी की समस्या से जूझ रही पार्टी को प्रत्याशियों की मदद के लिये अब जनता के चंदे के पैसा का सहारा लेना पड़ सकता है। कांग्रेस की सोशल मीडिया हेड दिव्या स्पंदना ने कहा कि पार्टी के पास पैसे नहीं हैं। पार्टी को पैसा जुटाने के लिए अब ऑनलाइन फंडिंग का सहारा लेना पड़ सकता है। वहीं इस मामले में कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया है।

भाजपा का चौथाई फंड भी नहीं जुटा पाई
मार्च 2017 में खत्म हुए वित्तीय साल तक भाजपा ने जितना फंड एकत्र किया था। कांग्रेस उसका एक चौथाई भी नहीं जुटा पाई है। 2019 को देखते हुये सोशल मीडिया की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता है। ऐसे में कांग्रेस बदली हुई परिस्थिति में कितना प्रबंधन करती है, यह देखने वाली बात होगी।

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