राजधानी की चिकित्सा व्यवस्था बेपटरी छुट्टी पर गए पचास फीसदी डॉक्टर

 

  • सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए मारे-मारे फिर रहे हैं मरीज
  • डॉक्टरों की कमी से लोहिया संस्थान और केजीएमयू की हालत पस्त

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। राजधानी की चिकित्सा व्यवस्था पटरी से उतर गई है। यहां के नामचीन सरकारी अस्पतालों से पचास फीसदी के करीब चिकित्सक गर्मी की छुट्टियां लेकर जा चुके हैं। डॉक्टरों की कमी से लोहिया संस्था और केजीएमयू समेत कई अस्पतालों की चिकित्सा व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई है। राजधानी और बाहर से इलाज के लिए इन अस्पतालों में आए मरीज मारे-मारे फिर रहे हैं।

सरकारी अस्पतालों के 50 फीसदी डॉक्टर 15 मई से 15 जुलाई तक ग्रीष्मकालीन छुट्टियों पर चले गए हैं। ऐसे में मरीजों को इलाज पाने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। मरीजों की अनदेखी होने से उनकी हालत खराब हो रही है। वहीं मरीजों की भीड़ बढऩे के कारण दूसरे डॉक्टर इलाज के नाम पर खानापूर्ति कर रहे हैं। रेजीडेंट डॉक्टरों के ऊपर काम का बोझ बढ़ गया है। ऐसे में राजधानी में इलाज पाना टेढ़ी खीर हो गया है।

केवल 50 फीसदी डॉक्टरों के भरोसे राजधानी की चिकित्सा व्यवस्था है। केजीएमयू के 150, पीजीआई के 100 और लोहिया संस्थान के 75 डॉक्टर अवकाश पर चले गए हैं। डॉक्टरों की कमी से केजीएमयू में बदहाली का आलम है। यहां इलाज के लिए बाहर से आ रहे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। डॉक्टरों के छुट्टी पर चले जाने से सर्जरी कम हो गई है। जहां हफ्ते में पांच दिन सर्जरी की जाती थीं, वहीं अब विभागों ने हफ्ते में तीन दिन सर्जरी करने के लिए तय किए हैं। ज्यादातर ओपीडी भी रेजिडेंट डॉक्टर के भरोसे चलाई जा रही हैं। डॉक्टरों के छुट्टी पर जाने से सबसे ज्यादा दिक्कतें सर्जरी वाले मरीजों को आ रही हैं।

महीनों से सर्जरी की आस में बैठे मरीजों को ऑपरेशन करवाने के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा। इसके चलते कई मरीजों ने दूसरे अस्पतालों के तरफ रूख कर लिया है और कुछ घर चले गए हैं। केजीएमयू में रोजाना हजारों की संख्या में मरीज इलाज की उम्मीद से आते हैं।

विभाग में सभी डॉक्टरों के होने के बाद भी मरीजों को बिना इलाज के वापस जाना पड़ता है। ऐसे मे कुछ डॉक्टरों के भरोसे चिकित्सा व्यवस्था दुरस्त रखना

मुश्किल हो रहा। पीजीआई और राममनोहर लोहिया संस्थान का भी यही हाल है। डॉक्टरों के छुट्टïी पर चले जाने से
यहां आने वाले दूरदराज के मरीज परेशान हो रहे हैं।

केजीएमयू के हर विभाग में 4 से 8 सीनियर डॉक्टर हैं। कुछ छुट्टी पर गए हैं। शेष अपने काम पर हैं। सीनियर डॉक्टरों के जाने पर विभाग के अन्य डॉक्टरों द्वारा मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
डॉ. नरसिंह वर्मा मीडिया प्रवक्ता केजीएमयू

फर्ज अदायगी करते हैं डॉक्टर

केजीएमयू में छुट्टी पर जाने वाले डॉक्टरों के मरीजों को विभाग के दूसरे डॉक्टरों के पास शिफ्ट कर दिया गया है, लेकिन वे डॉक्टर उन मरीजों को देखकर केवल फर्ज अदायगी ही कर रहे हैं। वे बस अपने मरीजों को ही देखते हैं। अन्य मरीजों को डिस्चार्ज कर घर भेज रहे हैं।

रेजिडेंट डॉक्टर के भरोसे ओपीडी

लोहिया संस्थान में 400 के करीब रेजिडेंट डॉक्टर हैं। इन दिनों रेजिडेंट डॉक्टर ही मरीजों को देख रहे हैं। डॉक्टरों की संख्या कम होने से कई रेजिडेंट डॉक्टर 12 से 16 घंटे ड्यूटी कर रहे हैं।

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