बेरोजगारी की गंभीर चुनौती

आशुतोष चतुर्वेदी
कुछ दिन पहले बिहार के मुंगेर जिले से एक चौंकाने वाली खबर आयी कि रेलवे में नौकरी के लिए बेटे ने अपने पिता की हत्या की सुपारी दे दी। खबर सुर्खियों में नहीं आ सकी, इसलिए बहुत लोगों का ध्यान इस ओर नहीं गया। रेलवे कर्मचारी को गोली मारकर हत्या के प्रयास में एक दिन बाद पुलिस ने आरोपी बेटे को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार बेटे ने ही अपने पिता की हत्या की योजना बनायी थी। बेटा पिता की जगह रेलवे में नौकरी पाना चाहता था।
वह कई वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था, लेकिन कामयाबी नहीं मिल पा रही थी। उसके पिता 30 अप्रैल को रिटायर हो रहे थे, इसलिए उसने पिता की हत्या की योजना बनायी ताकि अनुकंपा के आधार पर उसे रेलवे में नौकरी मिल सके। इसके लिए उसने दो लाख की सुपारी दी। हाल में रेलवे ने बहुत दिनों बाद 90 हजार पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकला है। 90 हजार नौकरियों के लिए लगभग 3 करोड़ 80 लाख लोगों ने आवेदन किया है। यह घटना दो बातों की ओर इशारा करती है। एक यह कि बेरोजगारी की स्थिति इतनी भयावह है कि नौकरी के लिए युवा कुछ भी कर गुजरने को तैयार हैं। दूसरे वे संघर्ष कर अवसर का लाभ लेने में सक्षम नहीं हैं तथा बच्चों की परवरिश में हम और आप असफल साबित हो रहे हैं। कैसे कोई नवयुवक पिता की हत्या करने के बारे में सोच भी सकता है! यह घटना बेहद चिंताजनक हैं और युवाओं की मनोस्थिति को भी उजागर करती हैं। नवयुवकों में क्या परिवर्तन हो रहा है हम उसके आकलन में नाकामयाब हो रहे हैं। जहां तक बेरोजगारी की बात है, तो अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का भी कहना है कि भारत में बेरोजगारी एक बड़ी चुनौती है। हालांकि आईएमएफ ने उम्मीद जतायी है कि पिछले कुछ वर्षों के आर्थिक सुधारों से नई नौकरियां उत्पन्न होंगी। श्रम सुधारों से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। हालांकि उसने यह स्पष्ट कर दिया है कि अवसर रातोंरात नहीं बढ़ेंगे, इसमें समय लगेगा। दूसरी ओर लेबर ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार भारत दुनिया का सबसे अधिक बेरोजगारों वाला देश है। भारत तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन आर्थिक असमानता और बढ़ती बेरोजगारी उसकी दो सबसे बड़ी चुनौतियां हैं। आलम यह है कि पिछले दिनों महाराष्ट्र में सिपाही की भर्ती के लिए एलएलबी, इंजीनियरिंग, एमएड और बीएड डिग्री धारकों ने भी बड़ी संख्या में आवेदन कर सबको हैरान कर दिया। कुल 4833 पदों के लिए साढ़े सात लाख से अधिक आवेदन आये। इस पद के लिए न्यूनतम योग्यता 12 वीं पास थी। देश में हर साल तकरीबन एक करोड़ नये बेरोजगार जुड़ जाते हैं। चिंता की बात यह है कि हमारी शिक्षा प्रणाली रोजगारोन्मुखी नहीं है। केंद्र सरकार कौशल विकास योजना के अंतर्गत रोजगार का अवसर बढ़ाने की कोशिश कर रही है, लेकिन बेरोजगारों की बढ़ती भारी संख्या देश और सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती है। ज्यादा वक्त नहीं गुजरा है, जब इंजीनियरिंग की डिग्री को सम्मान से देखा जाता था। लेकिन नौकरियों की कमी के कारण बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग कॉलेज बंद हो रहे हैं। हर साल 15 लाख से ज्यादा छात्र इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिला लेते हैं, लेकिन उनमें से नौकरी सिर्फ साढ़े तीन लाख को मिल पाती है। लगभग 60 फीसदी इंजीनियर बेरोजगार रहते हैं। प्रथम एजुकेशन फांडेशन की रिपोर्ट चौंकाने वाली है। इसके अनुसार प्राथमिक स्कूलों की हालत पहले से खराब थी और अब जूनियर स्तर का भी हाल कुछ ऐसा नजर आ रहा है। टीमों ने देश के 24 राज्यों के 28 जिलों में सर्वे किया। इसमें 1641 से ज्यादा गांवों के 30 हजार से ज्यादा युवाओं ने हिस्सा लिया। सर्वे में पाया गया कि पढ़ाई की कमजोरी अब बड़े बच्चों में भी देखी जा रही है। 76 फीसदी बच्चे पैसे तक नहीं गिन पाते। 57 फीसदी को साधारण गुणा भाग नहीं आता। 25 फीसदी अपनी भाषा धाराप्रवाह नहीं पढ़ पाते। 58 फीसदी अपने राज्य का नक्शा नहीं पहचान पाये। करीब 28 फीसदी युवा देश की राजधानी का नाम नहीं बता पाये। देश को डिजिटल बनाने का जोर-शोर से प्रयास चल रहा है, लेकिन 59 फीसदी युवाओं को कंप्यूटर का ज्ञान नहीं है। प्राथमिक की तरह यदि माध्यमिक स्तर के विद्यार्थी भी बुनियादी बातें नहीं सीख रहे हैं, तो यह बात गंभीर है। दरअसल, 14 से 18 आयु वर्ग के बच्चे कामगारों की श्रेणी में आने की तैयारी कर रहे होते हैं यानी इसका सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। यदि इन युवाओं को समय रहते तैयार नहीं किया गया, तो जान लीजिए, इसका असर भविष्य में देश के विकास पर पड़ेगा। इनकी संख्या अच्छी खासी है। सरकार को बिना वक्त गंवाये इन सभी पहलुओं पर गौर करना होगा।

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