जिद… सच की

जनकपुर-अयोध्या बस सेवा और भारत-नेपाल रिश्ते

सवाल यह है कि क्या जनकपुर-अयोध्या बस सेवा और रामायण सर्किट भारत-नेपाल रिश्तों को मजबूती दे सकेगा? क्या पीएम मोदी का दौरा नेपाल को चीन के प्रभाव से मुक्त कर पाने में सफल हो सकेगा? क्या भारतीय मूल के मधेसियों की तमाम समस्याओं को हल करने में भारत अपनी भूमिका निभा सकेगा? क्या दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी को दूर किया जा सकेगा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दो दिवसीय नेपाल दौरे पर हैं। पीएम ने नेपाल की धरती से रामायण सर्किट के तहत जनकपुर-अयोध्या बस सेवा की शुरुआत की। साथ ही जनकपुर और आसपास के क्षेत्रों के विकास के लिए सौ करोड़ रुपये की सहायता देने का भी ऐलान किया। मोदी ने जनकपुर के जरिए दोनों देशों के बीच अटूट रिश्तों की बात की। साथ इस बात पर भी जोर दिया कि दोनों देश राजनीतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को नया आयाम देंगे। सवाल यह है कि क्या जनकपुर-अयोध्या बस सेवा और रामायण सर्किट भारत-नेपाल रिश्तों को मजबूती दे सकेगा? क्या पीएम मोदी का दौरा नेपाल को चीन के प्रभाव से मुक्त कर पाने में सफल हो सकेगा? क्या भारतीय मूल के मधेसियों की तमाम समस्याओं को हल करने में भारत अपनी भूमिका निभा सकेगा? क्या दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी को दूर किया जा सकेगा?

नेपाल से भारत के संबंध काफी पुराने रहे हैं। दोनों देशों के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक समानताएं हैं। दोनों देशों के बीच रोटी-बेटी के संबंध भी हंै। नेपाल में काफी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं। इसके अलावा नेपाल की अर्थव्यवस्था बहुत कुछ भारत पर निर्भर है। नेपाल के विकास में भारत का योगदान काफी रहा है। राजशाही के पतन तक दोनों देशों के संबंध काफी प्रगाढ़ थे। लोकतंत्र की स्थापना के बाद दोनों देशों के रिश्तों में उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। नेपाल के माओवादी नेताओं का चीन की तरफ रुझान इसका बड़ा कारण रहा है। मधेसी आंदोलन के समय दोनों देशों के रिश्ते काफी बिगड़े। उस समय नेपाल सरकार ने भारत पर सीमा की नाकाबंदी करने का आरोप तक लगाया था। हालांकि यह नाकाबंदी खुद मधेसियों ने की थी। नेपाल में भारतीय मूल के लोगों को मधेसी कहा जाता है और वे नेपाली संविधान में नागरिकता के दोहरे मापदंडों और अलग मधेसी राज्य की मांग को लेकर आंदोलित थे। माओवादी हिंसा और मधेसी आंदोलन ने नेपाल की अर्थव्यवस्था पर काफी असर डाला है। हालांकि अर्थव्यवस्था के पिछडऩे का एक बड़ा कारण यहां की सरकार का अस्थिर होना भी है। नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली इस बात को अच्छी तरह समझते हैं और वे नेपाल की अर्थव्यवस्था को मजबूती देना चाहते हैं। यही वजह है कि उन्होंने चीन और भारत दोनों से अच्छे संबंधों की पहल की है। दूसरी ओर चीन की ओर नेपाल के बढ़ते रुझान से भारत चिंतित है और वह नेपाल को फिर से अपने पाले में करने की कोशिश कर रहा है। पीएम मोदी के दौरे के पीछे एक कारण यह भी है। उम्मीद की जा सकती है कि जनकपुर-अयोध्या की बस सेवा दोनों देशों के संबंधों को भी रफ्तार देगी।

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