जिद… सच की

महाभियोग की कांग्रेसी कोशिश के निहितार्थ

अहम सवाल यह है कि कांग्रेस नेता चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग के लिए उतावले क्यों हो रहे हैं? राज्यसभा से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक की इस कवायद के पीछे उनकी मंशा क्या न्यायपालिका पर दबाब बनाने की थी? क्या कांग्रेस अपनी सियासी मंशा में कामयाब हुई? क्या न्यायपालिका एक बार फिर दबाव के आगे मजबूती से खड़ी रही?

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग लाने की कोशिश में लगी कांग्रेस को एक और झटका लगा। न्यायाधीशों ने याचिका कर्ताओं के वकील और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल की मामले की सुनवाई के लिए पांच सदस्यीय पीठ के गठन के आदेश की कॉपी दिखाने की मांग को न केवल अस्वीकार कर दिया बल्कि याचिका को खारिज करने की बात तक कही। पीठ के रुख को देखकर सिब्बल ने याचिका वापस लेने की बात कही, जिसे पीठ ने स्वीकार कर लिया और याचिका खारिज कर दी। कांग्रेस के दो सांसद प्रताप सिंह बाजवा और अमी याज्ञनिक ने राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू द्वारा चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव खारिज किए जाने के बाद यह याचिका दाखिल की थी। अहम सवाल यह है कि कांग्रेस नेता चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग के लिए उतावले क्यों हो रहे हैं? राज्यसभा से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक की इस कवायद के पीछे उनकी मंशा क्या न्यायपालिका पर दबाब बनाने की थी? क्या कांग्रेस अपनी सियासी मंशा में कामयाब हुई? क्या न्यायपालिका एक बार फिर दबाव के आगे मजबूती से खड़ी रही? अपनी सियासत को चमकाने के लिए कांग्रेस या विपक्ष की ऐसी चालें क्या लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी नहीं है?

कांग्रेस ने सियासत के लिए इस बार न्यायपालिका को मोहरा बनाया। बिना सबूत कांग्रेस के नेताओं ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा पर आरोप लगाए और कुछ अन्य दलों के साथ मिलकर उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने का नोटिस राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू को सौंपा। सभापति ने संविधानविदों से राय लेने के बाद इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। अब कांग्रेस के दो सांसदों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए पांच सदस्यीय जजों की एक पीठ बनाई, लेकिन जब दलील देने का वक्त आया तो कपिल सिब्बल फिर सियासी चालें चलने लगे। उन्होंने पांच सदस्यीय पीठ के गठन पर सवाल उठाए। पांच सदस्यीय पीठ पर सवाल उठाना अनुचित था। जब आधार और अयोध्या विवाद जैसे मामलों की सुनवाई 5 जजों की पीठ कर रही है तो सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग मामले की सुनवाई 5 जजों की पीठ द्वारा क्यों नहीं की जानी चाहिए। दरअसल, कांग्रेस इस बात से परेशान थी कि इसमें चीफ जस्टिस के खिलाफ सार्वजनिक विरोध करने वाले चारों जज शामिल नहीं थे। इसके अलावा कांग्रेस कोर्ट के उन फैसलों से परेशान है जो उसके वोट बैंक पर असर डाल रहे हैं। ताजा घटनाक्रम से साफ है कि शीर्ष अदालत किसी राजनीतिक दबाव के आगे नहीं झुकने वाली है और यदि सियासी दलों ने अपने निहित स्वार्थों की पूर्ति के लिए न्यायपालिका को मोहरा बनाने की नीति नहीं छोड़ी तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक होगा।

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