जल संकट और सरकारी तंत्र

सवाल यह है कि शहरों में पेयजल की आपूर्ति करने वाला अमला पंगु क्यों हो गया है? पानी की किल्लत से जनता को निजात दिलाने की कोई गंभीर कोशिश क्यों नहीं की जा रही है? वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को जमीन पर उतारने की कोशिश क्यों नहीं की जा रही है? पानी की लगातार बढ़ रही किल्लत की असली वजह क्या है?

गर्मी बढऩे के साथ ही प्रदेश की राजधानी लखनऊ सहित अधिकांश शहरों में जल संकट गहरा गया है। आए दिन पानी को लेकर जनता प्रदर्शन कर रही है। लगातार गिर रहे जलस्तर से तमाम हैंडपंप शो पीस बनकर रह गए हैं। पानी की कालाबाजारी शुरू हो गई है। शहरों में पेय जल आपूर्ति के लिए जिम्मेदार सरकारी तंत्र पूरी तरह चरमरा चुका है। यही हाल रहा तो लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरसेंगे। सवाल यह है कि शहरों में पेयजल की आपूर्ति करने वाला अमला पंगु क्यों हो गया है? पानी की किल्लत से जनता को निजात दिलाने की कोई गंभीर कोशिश क्यों नहीं की जा रही है? वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को जमीन पर उतारने की कोशिश क्यों नहीं की जा रही है? पानी की लगातार बढ़ रही किल्लत की असली वजह क्या है? क्या इस समस्या का समाधान सरकार के पास नहीं है? क्या पानी की कालाबाजारी को रोका नहीं जा सकता है?
प्रदेश के अधिकांश शहरों में पानी की किल्लत हो गई है। गर्मियों में यह गंभीर समस्या बन जाती है। राजधानी लखनऊ में भी हालत बदतर हो चुके हैं। यहां के अधिकांश इलाकों में पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। खदरा, फैजुल्लागंज, इंदिरा नगर, निसातगंज, खुर्रमनगर समेत पुराने लखनऊ के कई क्षेत्रों में पेयजल की किल्लत से लोग जूझ रहे हैं। कई इलाकों में जलस्तर लगातार गिर रहा है। लिहाजा इन इलाकों में लगे हैंडपंप शो पीस बनकर रह गए हैं। इसके अलावा टंकी में पानी का पे्रशर नहीं होने के कारण घरों में पानी नहीं पहुंच पा रहा है। जल स्तर गिरने का सबसे बड़ा कारण जमीन से पानी का अंधाधुंध दोहन है। लोग सबमर्सिबल पंपों के जरिए जमीन से पानी का जबरदस्त दोहन कर रहे हैं। पानी की कमी वाले अधिकांश इलाकों में टैंकर के जरिए पानी बेचा जा रहा है। पानी की इस कालाबाजारी पर कोई अंकुश नहीं लग रहा है। इसके कारण जिन इलाकों में पानी का जलस्तर थोड़ा ठीक है, वहां भी स्थितियां लगातार बदतर होती जा रही है। इसके अलावा वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को सरकार ने अनिवार्य कर दिया है, लेकिन इसको शहर में प्रभावी रूप से लागू करने के लिए कोई कदम नहीं उठाए हैं। इसके कारण वर्षाजल जमीन के अंदर जाने के बजाए बर्बाद हो जाता है। इसका सीधा असर भूमिगत जलस्तर पर पड़ रहा है। यदि यही हाल रहा तो लोग पेयजल के लिए तरस जाएंगे। सरकार को चाहिए कि वह पेयजल व्यवस्था को न केवल दुरुस्त करे बल्कि वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को प्रभावी तरीके के लागू करे। ऐसा नहीं हुआ तो एक दिन राजधानी का भूमिगत जलस्तर पूरी तरह खत्म हो जाएगा। यह स्थिति निश्चित रूप से शहर के विकास को बुरी तरह प्रभावित करेगी।

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