प्रदूषण से थमने लगीं जीवनदायिनी गोमती की सांसें

  • रोजाना गिराया जा रहा है लाखों लीटर गंदा पानी
  • आज तक नहीं किया जा सका नालों को डायवर्ट
  • बिना संशोधित पानी बढ़ा रहा प्रदूषण, जलकुंभी ने और बढ़ाई मुसीबत

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। जीवनदायिनी गोमती अब अंतिम सांसें ले रही है। तमाम कवायदों के बावजूद स्थितियों में सुधार होता नहीं दिख रहा है। शहर के नालों से इसमें रोजाना लाखों लीटर गंदा पानी गिर रहा है। प्रदूषण के कारण गोमती का पानी आचमन लायक भी नहीं रह गया है। यह स्थिति तब है जब प्रदेश सरकार ने गोमती को स्वच्छ और निर्मल करने का निर्देश जारी कर रखा है।
गोमती पीलीभीत से निकलती है और गंगा में मिलने से पहले 900 किलोमीटर का सफर यूपी के कई शहरों में तय करती है। गोमती अपने उद्गम के पहले बड़े पड़ाव लखनऊ में दम तोडऩे लगी हैं। बढ़ती आबादी, नालों का गंदा पानी और नदी में लगातार फेंके जा रहे कूड़े-कचरे के कारण गोमती का प्रदूषण स्तर बढ़ता जा रहा है। हाल यह है कि धार्मिक पर्वों में यहां लोग नहाने तक से कतराने लगे हैं। गोमती को प्रदूषण मुक्त करने की तमाम योजनाएं बनीं लेकिन नदी निर्मल होने की जगह प्रदूषित होती रही। यदि यही हाल रहा और नदी की अविरलता को बनाने की कोशिश नहीं की गई तो इसका अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गोमती तट को खूबसूरत बनाने के लिए काफी काम किया था। अखिलेश ब्रिटेन की टेम्स नदी की तर्ज पर गोमती का कायाकल्प करना चाहते थे। इसके लिए गोमती रिवर फ्रंट का निर्माण कराया गया था लेकिन अब रिवर फ्रंट की भी हालत खराब हो चुकी है।
योगी आदित्यनाथ ने जब प्रदेश की कमान संभाली तो राज्य सरकार ने एक बार फिर गोमती को निर्मल करने की कवायद शुरू की। सीएम योगी ने गोमती में गिरने वाले नालों को डायवर्ट करने और इसे प्रदूषण से मुक्त करने के लिए एसटीपी की स्थापना के निर्देश भी दिए थे। लेकिन आज भी गोमती के नाले डायवर्ट नहीं किए गए और वे शहर की गंदगी नदी में उगल रहे हैं। शहर भर की यह गंदगी बिना संशोधित किए ही गोमती में गिरायी जा रही है। मौजूदा समय में 37 नालों का गंदा पानी सीधे गोमती में गिर रहा है। एक रिसर्च के मुताबिक 2013 से 2017 तक गोमती के पॉल्यूशन लेवल में करीब चार गुना की बढ़ोत्तरी हो चुकी है।
अगर समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की गई तो गोमती महज एक गंदे नाले में तब्दील हो जायेगी। चौंकाने वाली बात यह भी है कि नदी का पानी अब किसी भी काम लायक नहीं बचा है।

सामाजिक संगठनों के प्रयास भी नाकाफी

गोमती को स्वच्छ बनाने के लिए कई सामाजिक संगठन भी लगे हुए हैं। ये लोगों को जागरूक करने का काम कर रहे हैं, लेकिन इसका भी बहुत असर पड़ता नहीं दिख रहा है। हाल यह है कि गोमती के दोनों किनारों पर कचरा और पूजन सामग्री बिखरी रहती है। इसे गोमती में प्रवाहित कर दिया जाता है। इसके कारण गोमती का प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा ने भी सामाजिक संगठनों से प्रदेश की तमाम नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए सघन जागरूकता अभियान चलाने की अपील की है।

बहाव बाधित होने से बिगड़ा संतुलन

गोमती के पानी के गंदा होने का सबसे बड़ा कारण उसके किनारों पर हो रहा निर्माण है। निर्माण कार्य के लिए गोमती के बहाव को रोका गया, जिस कारण नदी का सेल्फ क्लीनिंग सिस्टम खत्म हो गया। वहीं पानी को साफ रखने वाले जीवाणु पूरी तरह खत्म हो गये। गोमती रिवर फ्रंट के निर्माण कार्य से भी नदी सीधे तौर पर प्रदूषित हो रही है। वर्षो से चल रहा निर्माण कार्य तो पूरा नहीं हुआ उल्टा नेचुरल फ्लो न होने से नदी का पानी गंदा होता जा रहा है। वहीं सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की बेहतर व्यवस्था न होने से भी नदी प्रदूषित हो रही है।

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